Sawan Month 2026: सावन के पवित्र महीने में करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, भारत में कहां-कहां हैं? जानें स्थान और महत्व
Sawan Month 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने को अत्यंत पावन और फलदायी माना जाता है. इस पूरे महीने में शिव की भक्ति करनी चाहिए. ये महीना उनकी महिमा के लिए जाना जाता है. सावन में सोमवार के व्रत रखने की परंपरा है. कहते हैं कुंआरी कन्याएं और महिलाएं, इस व्रत को करने से मनवांछित वर पाती है और दांपत्य सुख पाती है. सावन माह में ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से जीवन सफल हो जाता है. ऐसा कहा जाता है कि ज्योतिर्लिंगों जाने से महादेव के साक्षात दर्शन हो जाते हैं. चलिए आपको इस खबर में बताते हैं कि भारत में कितने ज्योतिर्लिंग है और इनकी खासियत.
सावन माह में ज्योतिर्लिंग दर्शन क्यों खास?
सावन का महीना भगवान शिव की अराधना करने के लिए सबसे खास महीना माना जाता है. इस महीने में कांवड़ यात्रा होती है, भक्त सोमवार व्रत रखते हैं, लड़कियां सोलह सोमवार का व्रत करती है और इस पूरे महीने में शिवलिंग का अभिषेक करने का भी खास महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में शिव जी की उपासना करने से उसका फल कई गुना मिलता है. यही वजह है कि इस महीने में 12 ज्योतिर्लिंगों समेत प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है.
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सावन से भगवान शिव का संबंध क्या है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में भोलेनाथ अत्यंत प्रिय होते हैं. माता पार्वती ने शिव को अपने पति रूप में प्राप्त करने के लिए इस महीने में ही तप किए थे. उनकी मनोकामना पूर्ण हुई थी. इस महीने को शिव और शक्ति के मिलन का महीना भी कहा जाता है. सावन महीने का संबंध समुद्र मंथन से भी है. कहा जाता है कि इस महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था और उन्होंने इस महीने में ही विष पिया था.
सावन के महीने में रुद्राभिषेक का महत्व
सावन के महीने में शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए. मान्यता है कि इस महीने में यह उपाय करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं. भक्तों को वरदान देते हैं. इस महीने किए जाने वाले अनुष्ठानों में भी शिव जी का आशीर्वाद मिलता है.
ज्योतिर्लिंग क्या होता है?
ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के अनंत और शाश्वत प्रकाश का प्रतीक माना जाता है. ज्योति का अर्थ होता है प्रकाश और लिंग. हिंदू धर्म में शिव के स्वयंभू को ज्योतिर्लिंग कहते हैं. इसका मतलब है कि स्वयं प्रकट हुआ शिवलिंग.
कैसे हुई ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा और विष्णु के बीच सर्वश्रेष्ठ होने का विवाद हो गया. इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव एक विशाल, अनंत प्रकाश वाले अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हुए. ब्रह्मा जी उस खंभे का ऊपरी हिस्सा और विष्णु जी निचला हिस्सा खोजने गए, लेकिन कोई भी छोर तक नहीं पहुंच पाया. प्रकाश के उस अनंत स्तंभ को ही 'ज्योतिर्लिंग' कहा गया. ऐसे ही ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति हुई थी.
ज्योतिर्लिंग दर्शन को क्यों शुभ माना जाता है?
शिव पुराण में वर्णन है कि 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के दिव्य और स्वयं प्रकट स्वरूप माने जाते हैं. मान्यता है कि इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन से भक्त को विशेष रूप से आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है. सावन के महीने में इन पवित्र धामों के दर्शन करने से शिव कृपा प्राप्त होती है, पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है. इसलिए, सावन के दौरान ज्योतिर्लिंग यात्रा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.
भारत के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग
1.सोमनाथ ज्योतिर्लिंग- यह सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है, गुजरात राज्य में स्थित है. चंद्रदेव ने इसी स्थान पर शिवजी की भक्ति कर खुद को श्राप मुक्त किया था. इसके बाद अरब सागर के तट पर इस मंदिर को स्थापित किया था.
2.मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग- आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि यहां के दर्शन करने से भक्तों को शिव-शक्ति का आशीर्वाद मिलता है.
3.महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग- मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की भस्म आरती पूरे देश में मशहूर है. धार्मिक मान्यता है कि महाकाल की अराधना करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है. यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है.
4.ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग- मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे पर स्थित ऊं के आकार जैसा दिखने वाला यह ज्योतिर्लिंग मोक्ष की प्राप्ति से जुड़ा माना जाता है. इसके आकार के कारण ही इसे ओंकारेश्वर नाम दिया गया था.
5.केदारनाथ ज्योतिर्लिंग- हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखंड का केदारनाथ धाम भी एक पवित्र ज्योतिर्लिंग है. इसे देश का सबसे कठिन और सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंग कहा जाता है.
6.भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग- सह्माद्रि पर्वतमाला पर स्थित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का संबंध कुंभकरण के बेटे भीम से जुड़ा हुआ है. जब रावण और कुंभकरण की मृत्यु हो गई थी तो उसने प्रतिशोध लेने के लिए तप किया और ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया. इसके बाद वे देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार करने लगा. इसके बाद शिव और भीम में भयानक युद्ध हुआ और भीम का वध करके उसे भस्म कर दिया गया. युद्ध के कारण शिव जी के शरीर से पसीना बहा, जिससे वहां एक नदी बहने लगी. तब सभी देवों ने शिव जी से वहीं भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान होने के लिए कहा.
7.काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग को मोक्षदायिनी कहा जाता है. यह मंदिर काशी का हृदय कहलाती है. धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन और पूजा करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त हो जाती है. ये प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है.
8.त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग- महाराष्ट्र के नासिक में स्थित यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के समीप है. इस ज्योतिर्लिंग की खासियत है कि यहां के शिवलिंग को भगवान शिव, ब्रह्मा और महेश तीनों का प्रतीक है.
9.वैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग- झारखंड का यह वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है. सावन के महीने में यहां कांवड़ियों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. कहा जाता है कि रावण ने यहीं पर शिव जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी. यहां रोगियों के दर्शन करने से वे बीमारी से निजात पा जाते हैं.
10.नागेश्वर ज्योतिर्लिंग- गुजरात के द्वारका में स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को सर्पों के स्वामी शिव का स्वरूप माना जाता है. यहां की शिव प्रतिमा विशाल है. यह भक्तों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र है.
11.रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग- तमिलनाडु में स्थित इस मंदिर का संबंध भी त्रेतायुग से है. रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान श्रीराम ने की थी. मान्यता है कि लंका विजय करने से पहले उन्होंने यहां शिवलिंग बनाकर पूजा की थी. हिंदुओं के बीच यह तीर्थस्थल भी मशहूर है.
12.घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग- यह 12वां ज्योतिर्लिंग भी महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है. छत्रपति संभाजीनगर के पास मौजूद घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग अंतिं ज्योतिर्लिंग माना जाता है. यहां की विश्व प्रसिद्ध एलोवेरा की गुफाएं भी प्राचीन काल से जुड़ी हुई है. संतान प्राप्ति और दूसरे विवाह की कामना इस मंदिर में पूरी होती है.
FAQs
Q1.भारत में कुल कितने ज्योतिर्लिंग हैं?
भारत में भगवान शिव के कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं.
Q2.सावन में ज्योतिर्लिंग दर्शन का क्या महत्व है?
सावन महीने में भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दौरान ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
Q3.12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग कौन सा है?
गुजरात का सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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