Parama Ekadashi 2026: परमा एकादशी पर आज जरूर करें इन वस्तुओं का दान, जानें व्रत से जुड़े नियम
Parama Ekadashi 2026: इस साल परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रहै. इसलिए, आज के दिन एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. एकादशी का व्रत वैसे तो बहुत खास माना जाता है. मगर आज के दिन तिथि बहुत ज्यादा खास है. परमा एकादशी सिर्फ 3 सालों में एकबार आती है. इसलिए, इस एकादशी का अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. शास्त्रों में परमा एकादशी को धन-धान्य और संतान सुख के लिए खास माना जाता है. परमा एकादशी व्रत के कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना चाहिए. आज व्रत के साथ-साथ कुछ चीजों का दान करना भी अतिशुभ माना जाता है. चलिए जानते हैं इस बारे में विस्तार से.
परमा एकादशी 2026 का महत्व (parama ekadashi 2026 date significance)
परमा एकादशी व्रत के बारे में पुराणों में भी बताया गया है. इस व्रत को करने से सभी एकादशियों के समान फल मिलता है. ये एकादशी 3 सालों में एक बार आती है. मनुष्य के जीवन में इस एकादशी को करने से यश-कीर्ती और प्रसिद्धि आती है. परमा एकादशी का विधि-विधान से पालन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस एकादशी तिथि का व्रत करने से जीवन में धन-धान्य और सुखों की कमी नहीं होती है. संतान सुख की कामनापूर्ति के लिए भी परमा एकादशी का व्रत कर सकते हैं.
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यह व्रत अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाता है. परमा एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है, आर्थिक स्थिति बेहतर होती है और समृद्धि की प्राप्ति होती है. महिलाओं को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है. धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस व्रत को कर लेता हैं, उन्हें वैकुंठ धाम में स्थान मिलता है. इस दिन विष्णु पूजा के साथ गरीबों को दान-पुण्य किया जाता है. चलिए जानते हैं परमा एकादशी पर किन वस्तुओं का दान करना चाहिए.
परमा एकादशी पर करें इन चीजों का दान (Parama Ekadashi Donate These Things)
1.धन का दान- परमा एकादशी पर धन का दान करने से साधक के जीवन में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है. ऐसे लोगों के घर में हमेशा बरकत होती है और जीवन सफल होता है.
2.जलदान- एकादशी के दिन जल का दान, जलवितरण या शरबत वितरण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. ऐसा करने से पितर शांत होते हैं. इसलिए, परमा एकादशी पर राहगिरों को जल पिलाएं, पशु-पक्षियों को जल पिलाएं और मंदिर में जल की व्यवस्था करें.
3.वस्त्रदान- परमा एकादशी पर गरीबों व जरूरतमंदों को वस्त्र का दान कर सकते हैं. ये लाभकारी माना जाता है. पीले रंग के कपड़ों का दान अतिशुभ माना जाता है.
4.अन्नदान- परमा एकादशी पर अन्न का दान करना भी शुभ माना जाता है. इस दिन अन्न का दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है.
परमा एकादशी व्रत के नियम (Param Ekadashi Fasting Rules)
ज्योतिषाचार्य हरीगोपाल शर्मा बताते हैं कि परमा एकादशी का व्रत करना बेहद शुभ होता है. ये व्रत 5 दिनों के पर्व की तरह मनाया जाता है. मान्यता है कि दशमी तिथि, एकादशी तिथि और द्वादशी तिथि पर कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए. इन नियमों के पालन से ही व्रत का पूरा फल मिलेगा.
- व्रत करने वाले लोगों को कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना है.
- उड़द, मसूर दाल और चने की दाल नहीं खनी चाहिए.
- कद्दू, साग, शहद, दूसरों का अन्न, दो बार भोजन नहीं करना होता है.
- एकादशी पर जुआ खेलना, सोना, पान खाना, दातुन करना और मदिरापान नहीं करना चाहिए.
- इस दिन किसी की बुराई, चुगली, चोरी, गुस्सा और लोभ के साथ झूठ भी नहीं बोलना चाहिए.
- द्वादशी तिथि में भी कांसे के बर्तन और वर्जित भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए.
- द्वादशी पर पारण करना चाहिए. इस दिन व्यायाम, दूसरे देश या शहर में यात्रा नहीं करनी चाहिए.
- इस दिन दान करना अत्यंत लाभकारी साबित होगा.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
अब सिर्फ होममेकर्स नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माता कहिए! सुप्रीम कोर्ट का गृहणियों पर बड़ा फैसला, तय की 30 हजार रुपये मासिक आय
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने गृहणियों पर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने घर संभालने वाली महिलाओं यानी होममेकर्स को 'राष्ट्र निर्माता' माना है। साथ ही कोर्ट ने घर की देखभाल से जुड़ी सेवाओं के नुकसान को मुआवजे के लिए एक अलग श्रेणी माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस नुकसान का आकलन करने के लिए ₹30,000 की काल्पनिक मासिक आय तय की। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसने निर्देश जारी किए हैं और उम्मीद व भरोसा जताया है कि सभी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस मामले पर नजर रखेंगे।
मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने बिना पैसे के किए जाने वाले घरेलू काम के आर्थिक मूल्य पर जोर दिया और उम्मीद जताई कि 'होममेकर' शब्द को अब 'राष्ट्र निर्माता' की पहचान भी मिलेगी। कोर्ट ने कहा कि घरेलू महिलाएं घर में योगदान देती हैं। वे राष्ट्र निर्माता हैं। वे राष्ट्र का निर्माण करती हैं। आप उस योगदान का आकलन कैसे करेंगे और उसे पैसे में कैसे बदलेंगे? 'होममेकर' शब्द को अब 'राष्ट्र निर्माता' की पहचान भी मिलेगी।
अब होममेकर्स नहीं राष्ट्रनिर्माता कहिए
कोर्ट ने कहा कि घरेलू महिलाएं घर में योगदान देती हैं। वे राष्ट्र निर्माता हैं। वे राष्ट्र का निर्माण करती हैं। आप उस योगदान का आकलन कैसे करेंगे और उसे पैसे में कैसे बदलेंगे? 'होममेकर' शब्द को अब 'राष्ट्र निर्माता' की पहचान भी मिलेगी।
The Supreme Court recognised homemakers as nation builders and held that the loss of domestic-care services must be treated as a distinct head of compensation. The Court fixed a notional monthly income of ₹30,000 for assessing such loss.
— ANI (@ANI) June 11, 2026
A bench of Justices Sanjay Karol and N.… pic.twitter.com/o2mz9MVm1Z
क्यों कोर्ट ने सुनाया यह फैसला?
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि परिवारों और समाज में घर संभालने वाली महिलाओं के बड़े, लेकिन अक्सर बिना पैसे के किए जाने वाले योगदान को मानते हुए, घर की देखभाल से जुड़े नुकसान को मुआवजे के लिए एक अतिरिक्त श्रेणी के तौर पर मान्यता दी जानी चाहिए।
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