PM Kisan Yojana: खाते में कब आएंगे 2,000 रुपये? PM Kisan 23वीं किस्त को लेकर सामने आया बड़ा अपडेट जो किसानों को कर देगा खुश
PM Kisan Yojana: PM Kisan योजना की 23वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने अभी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। लेकिन पिछले भुगतान पैटर्न के अनुसर 2,000 रुपये की अगली किस्त जून से जुलाई 2026 के बीच किसानों के बैंक खातें में आने की उम्मीद है।TMC Mega Split: संसद से विधानसभा तक टीएमसी में ऐतिहासिक बगावत, आंकड़ों के फेर में फंसा ममता का साम्राज्य
पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर सुलग रही असंतोष की आग अब पूरी तरह भड़क चुकी है। दिल्ली से लेकर कोलकाता तक टीएमसी के संसदीय और विधायी दल में ऐसी भगदड़ मची है, जिसकी कल्पना खुद पार्टी आलाकमान ने भी नहीं की थी।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार, सांसद और विधायक एक-एक कर पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। इस महासंकट के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि संसद और बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी के पास आखिर कितनी ताकत बची है।
लोकसभा में बगावत और सांसदों का पूरा गणित
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी ने राज्य की कुल 42 सीटों में से 29 पर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। बाद में बशीरहाट के सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद पार्टी के पास 28 सांसद बचे थे। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन 28 सांसदों में से रिकॉर्ड 19 लोकसभा सांसद पूरी तरह बागी हो चुके हैं। इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बाकायदा एक लिखित पत्र सौंपकर सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था और एनडीए (NDA) को समर्थन देने का बड़ा फैसला सुनाया है।
इस बागी गुट का नेतृत्व वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। इस विद्रोही फेहरिस्त में शत्रुघ्न सिन्हा, जगदीश चंद्र बसुनिया, खलीलुर रहमान, यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ भौमिक, बापी हलधर, सयानी घोष, माला रॉय, मिताली बाग, दीपक अधिकारी (देव), कालीपद सोरेन, जून मालिया, अरूप चक्रवर्ती, शर्मिला सरकार, असित कुमार मल्ल, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं। इन 19 सांसदों की बगावत के बाद अब लोकसभा में ममता बनर्जी के साथ केवल 9 सांसद ही शेष बचे हैं, जिनमें कीर्ति आजाद, अभिषेक बनर्जी, सौगात राय, प्रसून बनर्जी, प्रतिमा मंडल, सुदीप बंदोपाध्याय, महुआ मोइत्रा, कल्याण बनर्जी और सजदा अहमद शामिल हैं।
विधानसभा और राज्यसभा में भी भारी नुकसान
लोकसभा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा के भीतर भी टीएमसी पूरी तरह से दोफाड़ हो चुकी है। राज्य के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर कुल 80 विधायक जीतकर आए थे। इनमें से ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पहले ही ममता बनर्जी ने अनुशासनहीनता के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद टीएमसी के 58 विधायकों ने अलग गुट बनाया, जिसमें कुछ अन्य विधायकों के जुड़ने के बाद अब बागी विधायकों की कुल संख्या 65 पहुंच चुकी है।
बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें कुल 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और एक और विधायक के जुड़ने से यह संख्या 65 हो जाएगी। इस तरह विधानसभा में भी पासा पूरी तरह पलट चुका है और 80 में से 65 विधायकों के बागी होने के बाद ममता बनर्जी के पाले में सिर्फ 15 विधायक ही बचे हैं। इसके अलावा संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी टीएमसी के कुल 13 सांसद थे, जिनमें से दो बड़े चेहरों- सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया है। अब वहां केवल 11 सांसद बचे हैं, जिनके राजनैतिक भविष्य और वफादारी को लेकर भी सस्पेंस गहरा गया है।
बड़े सितारों का मोहभंग और अभिषेक के नेतृत्व को चुनौती
इस पूरी बगावत की सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें वो चेहरे शामिल हैं जिन्हें खुद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी राजनीति में लेकर आए थे और जिन्हें पार्टी का 'क्राउड पुलर' यानी स्टार प्रचारक माना जाता था। जादवपुर की सांसद सयानी घोष, जिन्हें 2023 में टीएमसी की यूथ विंग का अध्यक्ष बनाया गया था और जो हर मंच पर ममता बनर्जी की तरह साड़ी और चप्पल पहनकर भाषण देती थीं, उन्होंने भी इस बागी गुट का दामन थाम लिया है।
सयानी घोष के अलावा फिल्म स्टार शत्रुघ्न सिन्हा, रचना बनर्जी, जून मालिया और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे बड़े सेलिब्रिटी भी अब ममता बनर्जी का साथ छोड़ चुके हैं। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि 1 जनवरी 1998 को कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन करने वाली ममता बनर्जी ने साढ़े तीन दशक तक जो सियासी संघर्ष किया था, वह अब उनके हाथों से निकलता जा रहा है। सत्ता बदलते ही पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के एकाधिकार और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ जो गुस्सा था, वह इस ऐतिहासिक बगावत के रूप में सामने आया है।
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