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स्पोर्ट्स अपडेट- क्रोएशिया टीम फुटबॉल वर्ल्ड कप खेलने अमेरिका पहुंची:रोनाल्डो वॉर्मअप मैच में गोल नहीं कर सके, अर्जेंटीना का मैच देखने पहुंचे 88 हजार फैंस

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्रोएशिया की टीम अमेरिका पहुंच चुकी है। टीम ने वॉशिंगटन डीसी क्षेत्र में अपना बेस कैंप बनाया है। लगातार दो वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंची क्रोएशियाई टीम इस बार भी अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा कर रही है। 40 वर्षीय लुका मोड्रिच और 37 वर्षीय इवान पेरिसिक टीम का हिस्सा हैं। दोनों ने 2018 में टीम को फाइनल और 2022 में तीसरे स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। मोड्रिच अपने करियर का पांचवां वर्ल्ड कप खेलेंगे और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में 200 मैच पूरे करने के करीब हैं। क्रोएशिया ने कोच ज्लात्को डालिच पर भरोसा बरकरार रखा है। डालिच 2018 और 2022 वर्ल्ड कप में भी टीम के कोच थे। अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के मिश्रण के साथ टीम एक और सफल अभियान की उम्मीद कर रही है। क्रोएशिया का पहला मुकाबला इंग्लैंड से होगा। यह मैच 2018 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल की याद दिलाएगा, जब क्रोएशिया ने इंग्लैंड को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। खेल से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… बस में 40 घंटे सफर कर पहुंची ईरानी टीम; सपोर्ट स्टाफ को अमेरिका का वीजा भी नहीं मिला न्यूयॉर्क| ईरानी फुटबॉल टीम फुटबॉल वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने के लिए मैक्सिको के तिजुआना पहुंच गई है। एक ऐसे सह-मेजबान देश (अमेरिका) में जाकर खेलना, जिसने उन पर युद्ध थोप रखा हो, ईरान के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। युद्ध की वजह से इस टीम का सफर बहुत दर्दनाक रहा है। मार्च में टीम को तेहरान से तुर्की बॉर्डर तक 40 घंटे का लंबा बस का सफर तय करना पड़ा था। हालात इतने मुश्किल थे कि 6 फुट 5 इंच लंबे गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवांड को अपने पैर फैलाने के लिए बस की फर्श पर सोकर सफर करना पड़ा था। कूटनीतिक तनाव, एरिजोना की भीषण गर्मी और वहां ईरानी दूतावास न होने के कारण टीम मैनेजमेंट ने अपना बेस कैंप अमेरिका से हटाकर मैक्सिको के तिजुआना में कर लिया, जो अमेरिकी बॉर्डर से बिल्कुल सटा हुआ है। ग्रुप जी में ईरान को अपने अहम मैच लॉस एंजिल्स और सिएटल में खेलने हैं। खिलाड़ियों और मुख्य कोच आमिर घलेनोई को तो वीजा मिल गया, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने आतंकवादियों की घुसपैठ का हवाला देते हुए टीम के 13 सपोर्ट स्टाफ, विश्लेषकों और मीडिया अधिकारियों को वीजा देने से इनकार कर दिया। --------------------------------------------------- फुटबॉल वर्ल्ड कप के वॉर्मअप मैच में पुर्तगाल ने नाइजीरिया को 2-1 से हराया लीरिया (पुर्तगाल)। फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले खेले गए वार्म-अप मैच में पुर्तगाल ने नाइजीरिया को 2-1 से हराकर जीत के साथ अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दिया। हालांकि टीम के कप्तान और स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो गोल करने में नाकाम रहे। 41 वर्षीय रोनाल्डो को मैच में दो बार गोल करने के सुनहरे मौके मिले, लेकिन वह दोनों बार गोलकीपर को नहीं भेद सके। उन्हें 65वें मिनट में मैदान से बाहर बुला लिया गया। पुर्तगाल ने 23वें मिनट में पेड्रो नेटो के गोल से बढ़त बनाई थी। नाइजीरिया ने अकोर एडम्स के गोल की मदद से स्कोर 1-1 कर दिया। दूसरे हाफ में विकल्प खिलाड़ी के रूप में मैदान में आए फ्रांसिस्को कॉन्सेइकाओ ने 75वें मिनट में शानदार गोल दागकर पुर्तगाल को फिर बढ़त दिलाई। यही गोल टीम की जीत का कारण बना। पुर्तगाल अब वर्ल्ड कप में ग्रुप-K में कांगो, उज्बेकिस्तान और कोलंबिया के खिलाफ चुनौती पेश करेगा। वहीं रोनाल्डो अपने करियर का छठा वर्ल्ड कप खेलने उतरेंगे, जो विश्व रिकॉर्ड की बराबरी होगी। ---------------------------------------------- मेसी के गोल से अर्जेंटीना ने जीता प्रैक्टिस मैच ऑबर्न (अलाबामा, अमेरिका)। वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले अमेरिका में जबरदस्त माहौल देखने को मिल रहा है। टूर्नामेंट से पहले अर्जेंटीना और आइसलैंड के अभ्यास मैच को देखने 88 हजार दर्शक पहुंचे। मुकाबले में अर्जेंटीना ने आइसलैंड को 3-0 से करारी शिकस्त दी। अलबामा में खेले गए इस मैच के असली हीरो कप्तान लियोनल मेसी रहे। चोट के कारण आराम कर रहे मेसी मैच के आखिरी 20 मिनट में मैदान पर उतरे। आते ही उन्होंने अपना 117वां अंतरराष्ट्रीय गोल दागा और तीसरे गोल (थियागो) में भी अहम भूमिका निभाई।

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जमीन बेचकर बेटे को बनाया Cricketer, Bihar के Vaibhav Suryavanshi की Team India तक की संघर्ष गाथा

बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले संजीव सूर्यवंशी की कहानी एक ऐसे पिता की है, जिन्होंने अपने बेटे वैभव सूर्यवंशी के क्रिकेटर बनने के सपने को साकार करने के लिए हर वह त्याग किया, जिसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है।

आज 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट का नया चमकता सितारा बन चुके हैं। लेकिन इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवार के बलिदान की लंबी कहानी छिपी हुई है। मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी थी, ताकि बेटे को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिल सकें।

गौरतलब है कि ग्रामीण भारत में पैतृक जमीन केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि परिवार की पहचान और विरासत का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में जमीन बेचना किसी परिवार के लिए बेहद भावनात्मक फैसला होता है। लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने बेटे के सपनों को जमीन और पैसों से अधिक महत्व दिया।

संजीव सूर्यवंशी का कहना है कि अब जब उनका सपना पूरा हो रहा है, तब जमीन और धन की कोई अहमियत नहीं रह गई है। उनके अनुसार वैभव को जो सम्मान और पहचान देश-विदेश में मिल रही है, वही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।

बता दें कि वैभव सूर्यवंशी का नाम हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली छोटी अवधि की श्रृंखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वह भारतीय क्रिकेट टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें शानदार घरेलू प्रतियोगिता और जूनियर विश्व कप में दमदार प्रदर्शन के बाद मिली है।

मौजूद जानकारी के अनुसार वैभव ने वर्ष 2026 की बड़ी घरेलू प्रतियोगिता में 776 रन बनाकर सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज का गौरव हासिल किया था। उन्होंने पूरे सत्र में एक शतक और पांच अर्धशतक लगाए। इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ उभरते खिलाड़ी, सबसे मूल्यवान खिलाड़ी, सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज, सर्वश्रेष्ठ प्रहार दर और सबसे अधिक छक्के लगाने जैसे कई पुरस्कार भी मिले थे।

वैभव की क्रिकेट यात्रा तब शुरू हुई थी, जब वह केवल चार साल के थे। उनके पिता ने पहली बार उनके खेल में असाधारण प्रतिभा देखी। इसके बाद प्लास्टिक और टेनिस गेंद से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे पेशेवर प्रशिक्षण तक पहुंचा। समस्तीपुर से पटना तक लगभग 90 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रशिक्षण के लिए जाना परिवार के लिए आसान नहीं था, लेकिन संजीव सूर्यवंशी ने कभी हार नहीं मानी।

गौरतलब है कि बेटे को नियमित अभ्यास के लिए ले जाने के उद्देश्य से उन्होंने एक वाहन भी खरीदा था। इसके लिए भी जमीन बेचने से प्राप्त धन का उपयोग किया गया था। आज जब वैभव भारतीय टीम की दहलीज पर खड़े हैं, तब उनके पिता को अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

संजीव सूर्यवंशी बताते हैं कि वैभव बचपन से ही देश के लिए खेलने का सपना देखते थे और उसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। जब भारतीय टीम में चयन की खबर आई, तब पूरा परिवार भावुक हो गया। घर पर रिश्तेदारों, दोस्तों और गांव के लोगों का तांता लग गया। हर कोई इस उपलब्धि का जश्न मना रहा था।

मौजूद जानकारी के अनुसार चयन की खबर मिलने के समय वैभव श्रीलंका में अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने अपने पिता को फोन कर चयन की जानकारी दी और बताया कि वहां मौजूद सभी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वैभव को आयरलैंड या इंग्लैंड दौरे पर पदार्पण का मौका मिलता है या नहीं। यदि वह अंतिम एकादश में जगह बनाने में सफल रहते हैं, तो वह भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के सामने इतिहास रचने का सुनहरा अवसर है और पूरा देश उनके अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
Thu, 11 Jun 2026 22:58:57 +0530

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