IBPS PO Admit Card 2026 Post Update Date: 14-08-2026 Short Description : IBPS PO Admit Card 2026 Released on the official website of the Institute of Banking Personal Selection. Candidates who applied for this recruitment can download their admit card online. The online application deadline was 26/07/2026, and this recruitment has a Total of 7365 ...
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अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता को 5 साल पूरे हो गए हैं। लेकिन इन 5 सालों में अगर किसी रिश्ते ने सबसे ज्यादा करवट ली है तो वो है भारत और तालिबान का रिश्ता। कभी दिल्ली तालिबान से दूरी बनाकर चलती थी। अब उसी तालिबान के मंत्री लगातार भारत आ रहे हैं और सबसे बड़ी बात पहली बार दिल्ली में तालिबान अपना विक्ट्री डे रिसेप्शन आयोजित करने जा रहा है। दरअसल तालिबान के दिल्ली स्थित चार्ज डी अफेयर्स मुफ्ती नूर अहमद नूर 17 अगस्त को नई दिल्ली में एक सार्वजनिक विक्ट्री डे रिसेप्शन आयोजित करने जा रहे हैं। इस कार्यक्रम में राजनायकों, अफगान डायस्पोरा समाज के प्रमुख लोगों और मीडिया के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है और ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि भारत सरकार के अधिकारी भी इस विक्ट्री डे रिसेप्शन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि कौन अधिकारी शामिल होगा इसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है। लेकिन इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी बात यह है कि तालिबान के 2021 में काबुल की सत्ता में लौटने के बाद भारत में यह उसका पहला सार्वजनिक विक्ट्री डे रिसेप्शन होगा जो कहीं ना कहीं यह दिखाता है कि आज भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते कैसे हैं और साथ ही साथ यह भी दिखाता है कि कैसे पिछले 5 सालों में भारत और तालिबान कितने करीब आए।
तालिबान हर साल 15 अगस्त को अपना विक्री डे मनाता है। 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बीच तालिबान ने काबुल पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया था। तालिबान इसी सत्ता वापसी को अपनी जीत के तौर पर देखता है और इसी वर्षगाठ को विक्ट्री डे के रूप में मनाता है। हालांकि दिल्ली में इस साल इसका सार्वजनिक रिसेप्शन 17 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है और यही तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने अभी तक तालिबान शासन को औपचारिक तौर पर मान्यता नहीं दी। भारत का आधिकारिक रूप अंतरराष्ट्रीय समुदाय के व्यापक रूप के अनुरूप रहा है। लेकिन मान्यता नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि भारत तालिबान से बात भी नहीं करेगा। मान्यता नहीं देने के अलावा भी भारत और तालिबान के रिश्ते बहुत अच्छे हैं। और यही वजह है कि इन 5 सालों में पहली बार इस तरह का कार्यक्रम तालिबान भारत में आयोजित कर रहा है।
भारत ने तालिबान के साथ अपना व्यावहारिक बातचीत का रास्ता हमेशा से खुला रखा। तालिबान के आने से पहले भी और अब जब तालिबान सत्ता में है उसके बाद भी भारत ने तालिबान के सामने बार-बार यह बात कही है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए ना हो और कहीं ना कहीं तालिबान ने भी इस चीज को समझा है। इसके साथ ही भारत चाहता है कि वहां स्थिरता बनी रहे और अफगानिस्तान में भारत की आर्थिक और नैनीतिक मौजूदगी भी कायम रहे।
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