ब्लैक-मनी केस में अनिल अंबानी को हाई कोर्ट से राहत:IT विभाग की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई, ₹420 करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप था
बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकम टैक्स (IT) डिपार्टमेंट को रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ ब्लैक मनी एक्ट के तहत किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। आईटी विभाग ने अंबानी पर दो स्विस बैंक खातों में रखे 814 करोड़ रुपए से ज्यादा के अघोषित फंड पर 420 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी करने का आरोप लगाया है। जस्टिस बी पी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदोष पूनीवाला की डिवीजन बेंच ने अंबानी की याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने कहा कि ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली ऐसी ही अन्य याचिकाएं भी कोर्ट के सामने पेंडिंग हैं। स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में ₹814 करोड़ होने का आरोप इनकम टैक्स विभाग का आरोप है कि अनिल अंबानी ने जानबूझकर भारतीय टैक्स अधिकारियों से अपने विदेशी बैंक खातों और वित्तीय हितों की जानकारी छुपाई है। विभाग के असेसिंग ऑफिसर ने 31 मार्च 2022 को ब्लैक मनी एक्ट की धारा 10(3) के तहत एक असेसमेंट ऑर्डर पास किया था। इस ऑर्डर में कहा गया था कि अंबानी के पास अघोषित विदेशी संपत्तियां हैं। बहामास और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स से जुड़ा है कनेक्शन आईटी विभाग के नोटिस के अनुसार, अनिल अंबानी बहामास स्थित 'डायमंड ट्रस्ट' और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड कंपनी 'नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड' (NATU) के 'इकोनॉमिक कंट्रीब्यूटर' और 'बेनिफिशियल ओनर' थे। विभाग ने इसे 'जानबूझकर' की गई टैक्स चोरी का मामला बताया है। कोर्ट ने कहा- अपील जारी रहेगी, लेकिन एक्शन नहीं होगा हाई कोर्ट ने नोट किया कि अनिल अंबानी असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ पहले ही कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) के सामने चुनौती दे चुके हैं। अदालत ने साफ किया कि वह अपील प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है और उस पर आदेश भी जारी हो सकते हैं। हालांकि, जब तक इस रिट याचिका पर सुनवाई और अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा चलाने या जुर्माना लगाने जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। 2015 का कानून पुराने मामलों पर लागू नहीं हो सकता अनिल अंबानी ने याचिका में दलील दी है कि ब्लैक मनी एक्ट साल 2015 में लागू हुआ था। जबकि आईटी विभाग जिन ट्रांजैक्शन्स की जांच कर रहा है, वे असेसमेंट ईयर 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं। अंबानी के मुताबिक, इस एक्ट के प्रावधानों को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने एक्ट के कुछ प्रावधानों को भारतीय संविधान के खिलाफ भी बताया है। कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। दोषी पाए जाने पर हो सकती है 10 साल तक की जेल इनकम टैक्स विभाग के नोटिस के मुताबिक, इस मामले में अनिल अंबानी को ब्लैक मनी एक्ट की धारा 50 और 51 के तहत मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल की जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अंतरिम राहत मिल गई है और मामले की अंतिम सुनवाई बाद में होगी। क्या है ब्लैक मनी एक्ट की धारा 50 और 51? 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 की धारा 50 और 51 के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपने विदेशी खातों या संपत्तियों की जानकारी आईटी रिटर्न में नहीं देता है या टैक्स चोरी की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। इसमें कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की कड़ी जेल की सजा के साथ भारी जुर्माने का नियम है। ये खबर भी पढ़ें… अडाणी एनर्जी सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी बनी: ₹3,050 करोड़ में खरीदी इंटेलिस्मार्ट, अब कंपनी के पास 4.7 करोड़ स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) ने इंटेलिस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को खरीद लिया है। यह सौदा पूरे 3,050 करोड़ रुपए में हुआ है। इसके तहत एईएसएल को इंटेलिस्मार्ट की पूरी 100% हिस्सेदारी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
ऋतब्रत बनर्जी का बड़ा दावा, बता दिया उनके पाले में कितने विधायक, आगे क्या करने वाले हैं?
पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों लगातार उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. खास तौर पर विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से तृणमूल कांग्रेस उभर ही रही थी कि अचानक पार्टी नेताओं का टीएमसी छोड़ना बड़ घटनाक्रम बन गया. हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसी बीच विधानसभा में नेता विपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के एक बड़े दावे ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है.
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उन्हें 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और जल्द ही ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष को अपना समर्थन पत्र सौंप सकते हैं. उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है.
64 विधायकों के समर्थन का दावा
मीडिया से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक खड़े हैं. उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में यह समर्थन औपचारिक रूप से सामने आ सकता है.
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके राजनीतिक समूह का किसी अन्य दल में विलय करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने विशेष रूप से कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि न तो विधायक, न सांसद और न ही स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि कांग्रेस में जाने की तैयारी कर रहे हैं.
उनके बयान से यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम को किसी दल विशेष में विलय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
टीएमसी को सुष्मिता देव के इस्तीफे से झटका
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे को राज्यसभा सभापति ने स्वीकार भी कर लिया है.
सुष्मिता देव वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुई थीं और पार्टी की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाती थीं. उनके अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस्तीफे के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में उनके अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी.
क्या टीएमसी में बढ़ रही है अंदरूनी नाराजगी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी झटके के बाद पार्टी के भीतर कई स्तरों पर असंतोष सामने आ रहा है. कुछ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के अलग रुख अपनाने से पार्टी नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है.
हालांकि टीएमसी नेतृत्व लगातार यह दावा कर रहा है कि पार्टी मजबूत है और किसी बड़े विभाजन की संभावना नहीं है. इसके बावजूद लगातार सामने आ रही घटनाएं विपक्ष को सरकार और पार्टी पर निशाना साधने का अवसर दे रही हैं.
बंगाल की राजनीति पर रहेगी नजर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे इन घटनाक्रमों का असर आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा पर पड़ सकता है. 64 विधायकों के समर्थन का दावा, सुष्मिता देव का इस्तीफा और संभावित नए राजनीतिक गठबंधनों की चर्चाएं यह संकेत दे रही हैं कि बंगाल की सियासत अभी और दिलचस्प मोड़ ले सकती है.
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में टीएमसी नेतृत्व इन चुनौतियों का सामना कैसे करता है और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है.
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