ओमान तट के पास 24 भारतीयों को ले जा रहे जहाज पर हमले को लेकर MEA सख्त, अमेरिकी राजनायिक को जारी किया विरोध पत्र
Oman Commercial Vessel Attack: भारत सरकार ने बुधवार 10 जून को ओमान तट के पास एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है. इस हमले के बाद भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी राजनयिक को एक औपचारिक विरोध पत्र यानी डिमार्शे जारी किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से उठाया गया यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है, जिससे अमेरिका को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया गया है. ओमान के समंदर में हुआ यह हमला अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है.
क्या होता है डिमार्शे?
डिमार्शे एक औपचारिक राजनयिक दस्तावेज या मांग पत्र होता है. इसे एक देश की सरकार या दूतावास की तरफ से दूसरे देश की सरकार को सौंपा जाता है. इसका मुख्य उपयोग किसी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने या अपनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए किया जाता है. भारत ने इस संवेदनशील मामले में अमेरिकी राजनयिक को डिमार्शे देकर साफ कर दिया है कि वह अपने नागरिकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा.
Explainer: बॉलीवुड कैंप पॉलिटिक्स क्या होती है? बड़े प्रोजेक्ट्स, नए चेहरे और स्टारडम के पीछे का पूरा खेल समझिए
What is Bollywood Camp Politics Explained: फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर 'कैंप पॉलिटिक्स' शब्द सुनने को मिलता है. जब किसी नए कलाकार को बड़ा मौका मिलता है, किसी स्टार किड की लॉन्चिंग होती है या फिर कोई स्टार एक्टर या एक्ट्रेस अचानक फिल्मों में कम नजर आने लगता है, तब यह बहस शुरू हो जाती है. इसको लेकर कई आर्टिस्ट, फिल्म क्रिटिक्स और ऑडियंस मानती है कि बॉलीवुड में सिर्फ टैलेंट ही नहीं, बल्कि रिलेशन, नेटवर्किंग और इंडस्ट्री के बड़े लोगों से भी मजबूत बॉन्डिंग होनी जरूरी हैं. हालांकि इस मुद्दे पर अलग-अलग राय हैं, लेकिन यह सच है कि 'कैंप पॉलिटिक्स' पिछले की सालों से बॉलीवुड की सबसे बड़ी बहसों में से एक रही है. आइए समझते हैं कि आखिर यह कैंप पॉलिटिक्स क्या होती है और इसे लेकर इतने सवाल क्यों उठते हैं.
क्या होती है बॉलीवुड की कैंप पॉलिटिक्स?
अगर आपको आसान शब्दो में कैंप पॉलिटिक्स के बारे में बताएं तो आपको सबसे पहले इस शब्द का मतलब समझना होगा. 'कैंप' का मतलब ऐसे ग्रुप से है, जिसमें कुछ प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, कलाकार, मैनेजर या क्रिटिव लोग लगातार एक-दूसरे के साथ काम करते हैं. समय के साथ यह ग्रुप इतना मजबूत हो जाता है कि इंडस्ट्री में उसकी अलग पहचान बन जाती है. फिल्म इंडस्ट्री में यह कोई नई बात नहीं है. पहले भी कई बड़े फिल्मकारों और स्टार्स के अपने-अपने पसंदीदा आर्टिस्ट और टेक्नीशियन टीमें हुआ करती थीं. फर्क सिर्फ इतना है कि आज सोशल मीडिया के दौर में इस मुद्दे पर ज्यादा बातें होने लगी हैं. कैंप पॉलिटिक्स को लेकर क्रिटिक्स का मानना है कि इससे कुछ लोगों को ज्यादा मौके मिलते हैं, जबकि इसकी सपोर्ट में कहना है कि हर इंडस्ट्री में लोग उन्हीं के साथ काम करना पसंद करते हैं जिन पर उन्हें भरोसा होता है.
क्या सिर्फ टैलेंट से मिलता है मौका?
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या बॉलीवुड में सक्सेस होने के लिए सिर्फ एक्टिंग काफी है. हालांकि, इसका जवाब इतना आसान नहीं है. फिल्म इंडस्ट्री एक क्रिटिव फील्ड होने के साथ-साथ बड़ा बिजनेस भी है. यहां करोड़ों रुपये का इंवेस्ट होते हैं. ऐसे में प्रोड्यूसर और डायरेक्टर कई बार उन्हीं लोगों के साथ काम करना पसंद करते हैं जिनके साथ उनका पहले से अच्छा एक्सपीरियंस रहा हो. यही वजह है कि कुछ कलाकार बार-बार बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आते हैं. दूसरी तरफ, कई टैलेंटेड कलाकार को लंबे समय तक मौके की तलाश में रह जाते हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर कामयाब कलाकार किसी कैंप का हिस्सा है. बॉलीवुड में कई ऐसे नाम भी हैं जिन्होंने बिना किसी गॉड फादर के अपनी जगह बनाई है.
आउटसाइडर्स के लिए फिल्म इंडस्ट्री में मौका मिलना क्यों होता है कठिन
जब भी कैंप पॉलिटिक्स की बात होती है, तब 'आउटसाइडर' शब्द जरूर सामने आता है. आउटसाइडर उन आर्टिस्ट को कहा जाता है, जिनका फिल्म इंडस्ट्री में कोई जान पहचान या गॉड फादर नहीं होता है. ऐसे शुरुआत में ऑडिशन, नेटवर्किंग और सही लोगों तक पहुंच बनाने के लिए ज्यादा स्ट्रगल करना पड़ता है. आर्टिस्ट ने इंटरव्यू में यह बात मानी है कि इंडस्ट्री में शुरुआत में पैर जमान आसान नहीं होता है. हालांकि दूसरी तरफ ऐसे भी कई एग्जांपल भी मौजूद हैं, जहां आउटसाइडर्स ने अपनी मेहनत और ऑडियंस के प्यार के बलबूते के कामयाबी हासिल की. इससे यह भी साबित होती है कि चैलेंज जरूर हैं, लेकिन सक्सेस का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता.
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बॉलीवुड में कैंप्स पॉलिटिक्स की चर्चा क्यों होती रहती है?
फिल्म इंडस्ट्री में अलग-अलग ग्रुप और नेटवर्क्स की चर्चा लंबे समय से होती रही है. कई बड़े सितारों, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के आसपास ऐसे ग्रुप बन जाते हैं जिनके साथ वे लगातार काम करते रहते हैं. इसी वजह से कई बार लोगों को लगता है कि कुछ आर्टिस्ट को लगातार बड़े मौके मिल रहे हैं, जबकि दूसरे कलाकारों को कम मौके मिल पाते हैं. हालांकि यह भी सच है कि किसी भी आर्टिस्ट को लंबे समय तक केवल रिलेशन के दम पर मौके नहीं मिल सकते हैं. अगर ऑडियंस को कोई फिल्म पसंद नहीं आती, तो बड़े सितारे और बड़े बैनर भी उसे स्टार नहीं बना सकते. वहीं अच्छी स्टोरी और दमदार एक्टिंग कई बार छोटे आर्टिस्ट को भी रातों-रातों हिट बना देती हैं.
कंट्रोवर्सी के दौरान क्यों चर्चा में आती है कैंप पॉलिटिक्स?
आपको बता दें कि जब भी किसी आर्टिस्ट और प्रोड्यूसर के बीच विवाद होता है या किसी एक्टर के किसी बड़े प्रोजेक्ट से बाहर होने की खबर आती है, तब कैंप पॉलिटिक्स को लेकर बातें होना शुरू जाती है. इसका बड़ा उदाहरण हाल ही रणवीर सिंह का कथित तौर पर डॉन 3 फिल्म छोड़ने के दौरान देखने को मिला था. बीते कुछ सालों में कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ी कि क्या इंडस्ट्री में कुछ ग्रुप जरूरत से ज्यादा ताकत रखते हैं. हालांकि इन मामलों में कई दावे और आरोप कभी आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुए. यही कारण है कि कैंप पॉलिटिक्स को लेकर अक्सर दो तरह की राय देखने को मिलती है. एक पक्ष इसे इंडस्ट्री की हकीकत मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई धारणा बताता है.
क्या ओटीटी और पैन-इंडिया फिल्मों ने बदला खेल?
यह सच है कि पिछले कुछ सालों में फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने के लिए मिला है. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के आने से आर्टिस्ट्स के लिए नए मौके जरूर पैदा हुए हैं. अब किसी एक्टर या एक्ट्रेस का करियर केवल बॉलीवुड फिल्मों पर डिपेंड नहीं रह गया है.
आज के दौर में वेब सीरीज, डिजिटल फिल्में और अलग-अलग भाषाओं की पैन-इंडिया फिल्मों ने आर्टिस्ट्स के लिए नए दरवाजे खोले हैं. कई ऐसे एक्टर और एक्ट्रेस हैं जिन्हें ओटीटी ने नई पहचान दी.
इसी तरह साउथ इंडियन फिल्मों की बढ़ती पॉपुलैरिटी ने भी विकल्प बढ़ाए हैं. अब आर्टिस्ट सिर्फ एक ही इंडस्ट्री तक लिमिटेड नहीं हैं. यही वजह है कि कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पहले की तुलना में कैंप पॉलिटिक्स का प्रभाव कुछ हद तक कम हुआ है.
आपको बता दें कि बॉलीवुड कैंप पॉलिटिक्स एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सालों से बहस होती रही है और शायद आगे भी होती रहेगी. इसमें कोई दो राय नहीं कि नेटवर्किंग, रिलेशन और कॉन्टैक्ट्स किसी भी इंडस्ट्री की तरह फिल्म इंडस्ट्री में भी बहुत जरूरी होते हैं, लेकिन टैलेंट, मेहनत और ऑडियंस का प्यार भी किसी भी आर्टिस्ट के लिए सबसे जरूरी होता है.
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