वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर की बिजली मांग में इस साल 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद
नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। डेटा सेंटर्स के लिए दुनिया में बिजली की मांग 2026 में 26.4 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जिससे खपत 2025 के 447 टेरावाट घंटे से बढ़कर 565 टेरावाट घंटे होने की उम्मीद है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
बिजनेस और टेक्नोलॉजी इनसाइट्स कंपनी गार्टनर, इंक. की रिपोर्ट के अनुसार, खपत में अनुमानित बढ़ोतरी की वजह कंप्यूट-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्कलोड है, जिनकी वजह से बिजली की मांग नए उच्चतम स्तर तक पहुंच जाएगी।
गार्टनर की डायरेक्टर एनालिस्ट लिंगलान वांग ने कहा, अब एआई की क्षमता बिजली की उपलब्धता पर निर्भर करती है, इसलिए ग्लोबल एआई रेस में आगे बढ़ने और मुनाफा बनाए रखने के लिए डेटा सेंटर की बिजली सुरक्षा एक नया अहम मुद्दा बन गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, एआई-ऑप्टिमाइज्ड सर्वर की वजह से डेटा सेंटर में बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। 2026 में डेटा सेंटर की कुल बिजली खपत में एआई-ऑप्टिमाइज्ड सर्वर की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत होगी और 2027 तक इनकी बिजली खपत पारंपरिक सर्वर से भी ज्यादा हो जाएगी।
2030 तक डेटा सेंटर में बिजली की खपत 1,200टीडब्ल्यूएच से अधिक होने का अनुमान है। ऐसे में, भविष्य में बनने वाले डेटा सेंटरों की जरूरतें पूरी करने के लिए ग्रिड सप्लाई कम पड़ जाएगी, जिससे सभी डेटा सेंटर यूजर्स पर असर पड़ेगा।
वांग ने कहा, “इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन्स (आईएंडओ) लीडर्स को काम करने के तरीके को बेहतर बनाने और सुरक्षित ग्रिड एक्सेस को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्हें बिजली की कमी को दूर करने और टिकाऊ व स्केलेबल ग्रोथ सुनिश्चित करने के लिए हाई-एफिशिएंसी कूलिंग सिस्टम और एज कंप्यूटिंग में भी निवेश करने की जरूरत है।”
कूलिंग और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतें भी तेजी से बढ़ रही हैं जो 2026 में 22.6 प्रतिशत और 2027 में 24.6 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
हाल ही में आई एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल डेटा सेंटर्स ने सऊदी अरब जितनी बिजली की खपत की थी। अगर 2030 तक बिजली का इस्तेमाल दोगुना हो जाता है, तो उससे होने वाले कार्बन फुटप्रिंट की भरपाई के लिए दस सालों में 6.7 अरब पेड़ लगाने होंगे।
--आईएएनएस
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ब्लैक-मनी केस में अनिल अंबानी को हाई कोर्ट से राहत:IT विभाग की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई, ₹420 करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप था
बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकम टैक्स (IT) डिपार्टमेंट को रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ ब्लैक मनी एक्ट के तहत किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। आईटी विभाग ने अंबानी पर दो स्विस बैंक खातों में रखे 814 करोड़ रुपए से ज्यादा के अघोषित फंड पर 420 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी करने का आरोप लगाया है। जस्टिस बी पी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदोष पूनीवाला की डिवीजन बेंच ने अंबानी की याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने कहा कि ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली ऐसी ही अन्य याचिकाएं भी कोर्ट के सामने पेंडिंग हैं। स्विट्जरलैंड के दो बैंक खातों में ₹814 करोड़ होने का आरोप इनकम टैक्स विभाग का आरोप है कि अनिल अंबानी ने जानबूझकर भारतीय टैक्स अधिकारियों से अपने विदेशी बैंक खातों और वित्तीय हितों की जानकारी छुपाई है। विभाग के असेसिंग ऑफिसर ने 31 मार्च 2022 को ब्लैक मनी एक्ट की धारा 10(3) के तहत एक असेसमेंट ऑर्डर पास किया था। इस ऑर्डर में कहा गया था कि अंबानी के पास अघोषित विदेशी संपत्तियां हैं। बहामास और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स से जुड़ा है कनेक्शन आईटी विभाग के नोटिस के अनुसार, अनिल अंबानी बहामास स्थित 'डायमंड ट्रस्ट' और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड कंपनी 'नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड' (NATU) के 'इकोनॉमिक कंट्रीब्यूटर' और 'बेनिफिशियल ओनर' थे। विभाग ने इसे 'जानबूझकर' की गई टैक्स चोरी का मामला बताया है। कोर्ट ने कहा- अपील जारी रहेगी, लेकिन एक्शन नहीं होगा हाई कोर्ट ने नोट किया कि अनिल अंबानी असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ पहले ही कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) के सामने चुनौती दे चुके हैं। अदालत ने साफ किया कि वह अपील प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है और उस पर आदेश भी जारी हो सकते हैं। हालांकि, जब तक इस रिट याचिका पर सुनवाई और अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा चलाने या जुर्माना लगाने जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। 2015 का कानून पुराने मामलों पर लागू नहीं हो सकता अनिल अंबानी ने याचिका में दलील दी है कि ब्लैक मनी एक्ट साल 2015 में लागू हुआ था। जबकि आईटी विभाग जिन ट्रांजैक्शन्स की जांच कर रहा है, वे असेसमेंट ईयर 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं। अंबानी के मुताबिक, इस एक्ट के प्रावधानों को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने एक्ट के कुछ प्रावधानों को भारतीय संविधान के खिलाफ भी बताया है। कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। दोषी पाए जाने पर हो सकती है 10 साल तक की जेल इनकम टैक्स विभाग के नोटिस के मुताबिक, इस मामले में अनिल अंबानी को ब्लैक मनी एक्ट की धारा 50 और 51 के तहत मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल की जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अंतरिम राहत मिल गई है और मामले की अंतिम सुनवाई बाद में होगी। क्या है ब्लैक मनी एक्ट की धारा 50 और 51? 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 की धारा 50 और 51 के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपने विदेशी खातों या संपत्तियों की जानकारी आईटी रिटर्न में नहीं देता है या टैक्स चोरी की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। इसमें कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की कड़ी जेल की सजा के साथ भारी जुर्माने का नियम है। ये खबर भी पढ़ें… अडाणी एनर्जी सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी बनी: ₹3,050 करोड़ में खरीदी इंटेलिस्मार्ट, अब कंपनी के पास 4.7 करोड़ स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) ने इंटेलिस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को खरीद लिया है। यह सौदा पूरे 3,050 करोड़ रुपए में हुआ है। इसके तहत एईएसएल को इंटेलिस्मार्ट की पूरी 100% हिस्सेदारी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…

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