15 अगस्त 2026: लाल किले से पहली बार क्यों गूंजेगा 'वंदे मातरम्'? जानिए इस बार क्या रहेगा खास...
Independence Day 2026: इस साल का स्वतंत्रता दिवस समारोह पहले जैसा नहीं होगा. दरअसल, देश इस साल अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस साल लाल किले की प्राचीर से एक नई परंपरा जुड़ने जा रही है. ये पहले बार है जब आजादी के बाद किसी प्रधानमंत्री के भाषण से ठीक पहले राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की सामूहिक प्रस्तुति होगी और वह भी इसके सभी छह छंदों के साथ होगी.
जानकारी के मुताबिक अब तक लाल किले के मुख्य आयोजन में आधिकारिक तौर पर सिर्फ राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाया जाता रहा है. लेकिन इस बार से समारोह से पहले वंदे मातरम् की प्रस्तुति होगी. बता दें वंदे मातरम् आजादी की लड़ाई का एक बड़ा प्रेरणा-स्रोत रहा है.
इस बार यह बदलाव क्यों हो रहा है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है साल का संयोग. 2026 में वंदे मातरम् के रचे जाने को 150 साल पूरे हो रहे हैं. आज देश के करोड़ों लोगों के लिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ये रचना राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन चुकी है. बता दें ये कभी 'आनंदमठ' उपन्यास का हिस्सा था. इस बार 150वीं वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए सरकार ने ये फैसला लिया है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने दिल्ली में हुई एक प्रेस वार्ता में इस फैसले की जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि स्वाधीनता संग्राम के दौरान इस गीत ने लाखों लोगों में जोश भरा था और अब इसकी विरासत को सम्मान देने के लिए इसे लाल किले की प्राचीर से पहली बार गाया जाएगा.
???? स्वतंत्रता की संध्या, सुरों के संग ????????
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) August 14, 2026
स्वतंत्रता दिवस संध्या पर इंडिया गेट पर
Symphony Band की भव्य संगीतमय प्रस्तुति।
आइए और देशभक्ति की भावना से भरपूर इस संध्या का हिस्सा बनें।
????स्थान: इंडिया गेट
???? समय: 15 अगस्त 2026,
शाम 6 बजे
???? Symphony of Freedom????????
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क्या वंदे मातरम् को कानूनी दर्जा भी मिला है?
हां, इस साल 1971 के 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम' में संशोधन करते हुए वंदे मातरम् को भी उसी तरह का कानूनी संरक्षण दिया गया है जैसा अब तक सिर्फ राष्ट्रगान को हासिल था. यानी अब अगर कोई जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालता है या इसका अपमान करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकेगी.
इस साल के समारोह की थीम क्या रहेगी?
सरकार ने इस बार के आयोजन के लिए दो प्रमुख विषय तय किए हैं. पहला वंदे मातरम् के 150 वर्ष और दूसरा 'विकसित भारत @2047' के सपने को साकार करने में युवा शक्ति की भूमिका. यानी समारोह की झलक में देश की विरासत और भविष्य, दोनों को साथ लाने की कोशिश दिखेगी.
समारोह में और क्या खास होगा?
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
- ध्वजारोहण के साथ परंपरा के अनुसार 21 तोपों की सलामी दी जाएगी.
- समारोह स्थल पर फूलों की बारिश की जाएगी.
- 150वीं वर्षगांठ के मौके पर वायुसेना का एक हेलीकॉप्टर विशेष ध्वज लेकर आसमान में उड़ान भरेगा.
- संभावित बारिश को ध्यान में रखते हुए लाल किले परिसर की नालियों और सीवेज व्यवस्था की भी विशेष सफाई करवाई जा रही है ताकि किसी तरह की परेशानी न हो.
खबर अपडेट की जा रही है
अशोकनगर में रानी अवंतीबाई की प्रतिमा हटाने पर विवाद, उमंग सिंघार ने सरकार से की निष्पक्ष जांच की मांग
अशोकनगर जिले के महोली गांव में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा हटाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि महोली गांव से वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा हटाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले में लोधी समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं और समाज के सम्मान व अधिकारों की लड़ाई में हर कदम पर साथ रहेंगे। उन्होंने मांग की कि प्रतिमा हटाने के निर्णय की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और इसमें शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
क्या है पूरा मामला
महोली गांव में प्रशासन द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा हटाए जाने के बाद ग्रामीणों और लोधी समाज के लोगों में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रानी अवंतीबाई लोधी उनके लिए सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि गौरव, स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक हैं। इसलिए प्रतिमा हटाए जाने को समाज ने गंभीरता से लिया है। वहीं, प्रशासन की ओर से बताया गया कि प्रतिमा अवैध रूप से स्थापित किए जाने के कारण हटाने की कार्रवाई की गई। हालांकि, प्रदर्शनकारी प्रशासन के इस तर्क से सहमत नहीं हैं और प्रतिमा को उसी स्थान पर पुनः स्थापित करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
इस मामले पर मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रशासन का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई लोधी गौरव और स्वाभिमान की प्रतीक हैं, इसलिए उनकी प्रतिमा को उसी स्थान पर सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिमा हटाने के निर्णय की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और इसमें शामिल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इतिहास और वीरांगनाओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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