सीएम विजय सरकार के खिलाफ वीडियो बनाने वाला यूट्यूबर मारिदास गिरफ्तार, महिला मंत्री पर की थी अश्लील टिप्पणी
CM Joseph Vijay Youtuber Maridhas: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (Joseph Vijay) की सरकार की आलोचना करने वाले यू्ट्यूबर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. जिसका नाम मारिदास है. जानकारी के अनुसार, यूट्यूबर पिछले कुछ समय से सरकार की जमकर आलोचना कर रहा था. इतना ही नहीं उसने एक महिला मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी की थी. जब मामला ज्यादा बढ़ गया तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. जिसके बाद उसे चेन्नई ले जाया गया. पुलिस का आरोप है कि मारिदास ने सोशल मीडिया पर तमिलनाडु सरकार, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, महिला मंत्री के खिलाफ कई आपत्तिनजक वीडियो पोस्ट किए थे.
पुलिस ने घर से की गिरफ्तारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार सुबह चेन्नई पुलिस की स्पेशल टीम मदुरै पहुंची. जहां लोकल पुलिस के सहयोग से यूट्यूबर मारिदास को उसके सूर्य नगर गिरफ्तार किया. इस दौरान पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले आसपास सुरक्षा बढ़ाई और फिर कार्रवाई की.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यूट्यूबर के खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम विंग में मामला दर्ज किया गया था. जांच के दौरान उनके सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की जांच की गई थी.
महिला मंत्री के खिलाफ की थी अश्लील टिप्पणी
पुलिस के अनुसार, मारिदास पर आरोप है कि उन्होंने तमिलनाडु सरकार की एक महिला मंत्री को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक और अश्लील टिप्पणियां की थीं. इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार और कई मंत्रियों के खिलाफ भी वीडियो अपलोड किए थे.
जांच में सामने आया कि इन पोस्ट्स और वीडियो में गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया था. जिसको लेकर शिकायत मिली थी. इसी आधार पर साइबर क्राइम विंग ने मामला दर्ज किया और आगे की कार्रवाई शुरू की.
यूट्यूबर के खिलाफ किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
सरकार और महिला मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणी करने मामले में मारिदास के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया है. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई धाराएं शामिल हैं.
पुलिस ने बताया कि उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 के तहत महिला की मर्यादा का अपमान करने और धारा 352(2) के वैमन्य फैलाना के तहत कार्रवाई की गई है. इतना ही नहीं उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की जुड़ी धाराएं भी लगाई गई हैं. फिलहाल पुलिस मामले की विस्तार से जांच कर रही है और सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कंटेंट की पड़ताल कर रही है.
#WATCH | Madurai, Tamil Nadu: YouTuber Maridhas was detained by a special team of the Chennai City Police over allegations that he had uploaded a series of videos criticising the TVK government, Chief Minister C Joseph Vijay and several members of the state cabinet pic.twitter.com/wc5dqlCb5r
— ANI (@ANI) June 8, 2026
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
मारिदास की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर बहस छिड़ गई है. पिछले कुछ सालों में कई राज्यों में सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और ऑनलाइन टिप्पणियों को लेकर कई मामलों में पुलिस ने एक्शन लिया है. कई लोगों का मानना है कि राजनीतिक आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन अगर किसी शख्स, विशेषकर महिला रिप्रेजेंटेटिव के खिलाफ अपमानजनक या अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तो कानून के तहत एक्शन लिया जा सकता है. फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में अदालत में पेशी के दौरान आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
पॉलिटिक्स के साथ पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में विजय
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी विजय अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. हाल के महीनों में उनका नाम एक्ट्रेस तृषा कृष्णन संग जोड़ा जा रहा है. इसको लेकर सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में काफी चर्चा हो रही है. हालांकि दोनों की ओर से इन चर्चाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई.फिल्मी करियर और पॉलिटिक्स के कारण विजय लगातार मीडिया की नजरों में बने रहते हैं. ऐसे में उनसे जुड़ी खबर अक्सर चर्चा में रहती हैं.
‘सहमति से बालिग और अविवाहितों का संबंध बनाना, खराब चरित्र का आधार नहीं’, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि दो अविवाहित बालिगों के बीच अगर सहमति से शारीरिक संबंध हैं तो उसे किसी व्यक्ति के चरित्र को खराब बताने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है, जो दो बालिग और अविवाहित लोगों को अपनी पसंद का संबंध बनाने से रोकता है. इसे नैतिक दोष नहीं कहा जा सकता है.
जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने ये टिप्पणी तेलंगाना स्टेट लेवल पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड के एक मामले की सुनवाई के दौरान की. इस केस में आरोपी की भर्ती को बोर्ड ने नैतिक दोषी मानते हुए रद्द कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कैंडिडेट को नियुक्ति देने का निर्देश दिया.
बोर्ड ने नियुक्ति के अयोग्य ठहरा दिया था
उम्मीदवार की नियुक्ति बोर्ड द्वारा इसलिए रद्द की गई थी कि क्योंकि उसके खिलाफ 2014 में शादी का वादा करके दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था. भर्ती बोर्ड ने इसे नैतिक अधमता का मामला माना और उसे अयोग्य ठहरा दिया था. पूरा केस एक असफल प्रेम संबंध से जुड़ा हुआ था. रिकॉर्ड की मानें तो उम्मीदवार और शिकायतकर्ता पड़ोसी थे. दोनों करीब चार साल तक रिश्ते में रहे थे. बाद में उम्मीदवार के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करवा दिया गया था. हालांकि, दोनों के बीच बाद में समझौता हो गया था. लोक अदालत ने 2015 में मामला खत्म कर दिया था.
आरोप साबित होने तक निर्दोष
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून में तब तक निर्दोष मानने का सिद्धांत लागू होता है, जब तक अदालत द्वारा उसे दोषी न मान लिया जाए. अदालत ने कहा कि ये आरोप धोखाधड़ी का था. धोखाधड़ी साबित करने के लिए ये दिखाना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति को झूठे बहाने से गुमराह किया गया था. शिकायतकर्ता ही बता सकती थी कि क्या उसे धोखा देकर संबंध में लाया गया था या फिर नहीं.
बेंच ने कहा कि जब शिकायतकर्ता ने खुद मुकदमा आगे नहीं बढ़ाया तो कोई सबूत पेश नहीं किया जा सकता है. समझौते पर सहमति जताई गई. उस वक्त बोर्ड के पास भर्ती बोर्ड के उम्मीदवार के चरित्र के बारे में नकारात्मक निष्कर्म निकालने का कोई आधार नहीं था.
कॉन्स्टेबल के पद पर उसकी नियुक्ति का रास्ता साफ
तेलंगाना हाईकोर्ट के सिंगल जज के उस आदेश को भी सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा, जिसमें उम्मीदवार की नियुक्ति पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया गया था. पुलिस कॉन्स्टेबल के पद पर उसकी नियुक्ति का रास्ता सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से साफ हो गया था.
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