Explainer: मिडिल ईस्ट क्यों बन गया है युद्ध का मैदान? सीरिया, यमन, लेबनान समेत जंग की आग में जल चुके हैं ये देश
Explainer: Explainer: प्राकृतिक रूप से तेल संपन्न मिडिल ईस्ट एक बार फिर से जंग की आग में जलने लगा है. रविवार देर रात ईरान और लेबनान स्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. दोनों ने एक साथ मिलकर इजरायल पर मिसाइलें और ड्रोन से हमला कर दिया. ये सब ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम लागू है. ऐसे में पिछले करीब 60 दिनों से जारी युद्धविराम के टूटने का भी खतरा बढ़ गया. क्योंकि ईरान-हिजबुल्लाह की ओर से रविवार (7 जून, 2026) की रात किए गए हमले के बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की और ईरान के चार शहरों पर मिसाइल हमला किया.
ऐसे में सवाल आता है कि आखिर वर्तमान में मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व के देशों में ही आए दिन युद्ध क्यों होते हैं. क्योंकि ईरान-इजरायल की जंग से पहले भी मध्य पूर्व के कई देश इसी तरह के युद्ध की भयावहता देख चुके हैं और जंग में तबाह हो चुके हैं. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जैसे कुछ देशों को छोड़ दें तो मिडिल ईस्ट के लगभग सभी देश पिछले दो तीन दशकों में जंग का मैदान बन चुके हैं. चलिए जानते हैं मिडिल ईस्ट में ऐसा क्या है जिससे इसी क्षेत्र में लगातार युद्ध क्यों होते रहते हैं.
जंग की मार झेल चुके हैं मिडिल ईस्ट के ये देश
मिडिल ईस्ट भले ही प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न हो लेकिन इस क्षेत्र में आए दिन कोई ना कोई युद्ध में घिरा रहता है. हाल कुछ सालों में इराक, सीरिया, यमन, लेबनान, गाजा और इजरायल युद्ध की मार झेल चुके हैं. इसके अलावा अरब जगत और अफ्रीकी महाद्वीप का एक महत्वपूर्ण देश लीबिया भी युद्ध की आग में जल चुका है. बीते कुछ सालों में मध्य पूर्व (Middle East) में इजरायल, ईरान, सीरिया, यमन और लेबनान मुख्य रूप से युद्ध और भारी संघर्ष की चपेट में रहे हैं
इजरायल और ईरान के बीच जंग
बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच इसी साल फरवरी में जंग की शुरूआत हुई. जो अभी भी जारी है. इससे पहले पिछले साल यानी 2025 में जून के महीने में भी इजरायल और ईरान के बीच ताबड़तोड़ हमले हुए थे. ये जंग ज्यादा दिनों तक नहीं चली लेकिन 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हवाई हमलों ने इस जंग को हवा दी.
उसके बाद ईरान ने भी पलटवार किया. करीब 40 दिनों तक चली जंग के बाद सीजफायल हो गया. अब करीब दो महीने बाद मिडिल ईस्ट फिर से सुलगने लगा. इजरायल और ईरान जंग के चलते दुनियाभर में ऊर्जा संकट पैदा हो गया. क्योंकि जंग के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया. जहां से दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का 20 फीसदी से ज्यादा क्रूड गुजरता है.
प्रथम लीबियाई गृहयुद्ध (2011)
अब से करीब 15 साल पहले 'अरब स्प्रिंग' (Arab Spring) आंदोलन के तहत फरवरी 2011 में लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. नागरिकों की रक्षा के नाम पर नाटो (NATO) ने इसमें हस्तक्षेप किया और अक्टूबर 2011 में गद्दाफी के सत्ता से बेदखकर कर दिया इस जंग में गद्दाफी मारा गया.
द्वितीय लीबियाई गृहयुद्ध (2014-2020)
गद्दाफी के पतन के बाद भी लीबिया के हालातों में कोई सुधार नहीं आया. 2014 से 2020 तक देश में अस्थिरता बनी रही. देश में तमाम कोशिशों के बाद भी एक स्थिर लोकतांत्रिक सरकार बनाने के प्रयास विफल रहे. 2014 में देश में प्रतिद्वंद्वी गुटों इनमें मुख्य रूप से पश्चिमी सरकार और पूर्वी विद्रोही सेना शामिल है के बीच एक नया और भीषण गृहयुद्ध छिड़ गया. ये संघर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्ष विराम के बाद काफी हद तक थम गया.
जंग की आग में जल चुका है इराक
इसके अलावा इराक भी जंग की आग में जल चुका है. यहां 2003-2011 के बीच भीषण जंग हुई. जिसमें लाखों लोग मारे गए. इसके अलावा 2014 से 2017 तक चले आईएसआईएस (ISIS) के खिलाफ संघर्ष ने भी इराक को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इन सभी जंगों के चलते इराक में दशकों तक आंतरिक अस्थिरता रही है.
इजरायल, गाजा और लेबनान
वहीं 2023 से इजरा.ल और हमास (गाजा) के बीच भीषण युद्ध अभी भी जारी है. 7 अक्टूबर 2023 को गाजा स्थित हमास ने इजरायल पर ताबड़तोड़ 5000 हजार मिसाइलें दागी थी. इसके साथ ही करीब 300 इजरायल नागरिकों को अगवा कर कर लिया. इनमें से ज्यादातर की मौत हो गई. इस हमले के बाद इजरायल ने भी गाजी में भारी तबाही मचाई. आंकड़ों के मुताबिक, गाजा में अब तक करीब 70 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. इस जंग की आग उत्तरी सीमा पर लेबनान तक पहुंच गईं. जहां हिजबुल्लाह ने भी इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
लंबे समय तक अस्थिर रह चुका है सीरिया
आंतरिक गृहयुद्ध के कारण सीरिया लंबे समय से अस्थिर रहा है और वर्ष 2024 में असद शासन (Assad regime) के पतन के बाद से देश में संघर्ष और उथल-पुथल की स्थिति बनी हुई है.
यमन ने भी झेली है संघर्ष की मार
इसके अलावा मिडिल ईस्ट के देश यमन में भी लंबे समय तक गहरा गृहयुद्ध चला. जहां हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर (Red Sea) और पड़ोसी देशों में हमलों के कारण यह लगातार संघर्ष का मुख्य केंद्र बना हुआ है.
आखिर क्यों जंग का मैदान बन गया है मिडिल ईस्ट
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में तनाव का मुख्य कारण तेल और गैस संसाधनों पर नियंत्रण, क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई (विशेषकर ईरान और सऊदी अरब के बीच), यहूदी और अरब (फिलिस्तीनी) के बीच भूमि विवाद, और पश्चिमी देशों (जैसे अमेरिका) का हस्तक्षेप है. प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा इसका सबसे अहम कारण रहा है. फारस की खाड़ी में दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडार मौजूद हैं.
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इन संसाधनों पर आर्थिक वर्चस्व जमाने की चाहत और वैश्विक शक्तियों द्वारा इनमें हस्तक्षेप करने की नीति इस क्षेत्र को युद्ध का अखाड़ा बना दिया है. इसके अलावा इस क्षेत्र में सऊदी अरब (सुन्नी बहुल) और ईरान (शिया बहुल) के बीच अपना प्रभाव बढ़ाने की होड़ मची रहती है. ये दोनों देश कई स्थानों (जैसे यमन, सीरिया, इराक) पर प्रॉक्सी वॉर लड़ते रहे हैं.
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मुल्लांपुर टेस्ट में अफगानिस्तान को मिली करारी हार, भारत ने पारी और 300 रनों से दर्ज की जीत
IND VS AFG: मुल्लांपुर में खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में भारतीय क्रिकेट टीम ने अफगानिस्तान को बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज कर ली है. इस मैच में टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को फॉलोऑन खेलने के लिए बुलाया था और फिर एक पारी और 300 रन के अंतर से जीत दर्ज कर ली. इस जीत में टीम इंडिया के हीरो रहे मानव सुथार को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जो अपना डेब्यू मैच खेलने मैदान पर उतरे थे. तो आइए इस आर्टिकल में आपको मैच के बारे में विस्तार से बताते हैं कि क्या-क्या हुआ...
टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को पारी और 300 रन से हराया
Leaving New Chandigarh with a massive win under the belt ????????
— BCCI (@BCCI) June 8, 2026
A complete team performance from #TeamIndia ????
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इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया ने 8 विकेट के नुकसान पर 564 रन बोर्ड पर लगाए. वहीं, पहली पारी में अफगानिस्तान की टीम 152 के स्कोर पर ही ऑलआउट हो गई. ऐसे में टीम इंडिया ने 412 रनों की बड़ी बढ़त के साथ इस टेस्ट मैच में अफगानिस्तान को फॉलोऑन खेलने के लिए बुलाया. दूसरी पारी में भी अफगानिस्तान की टीम की ओर से कुछ खास बल्लेबाजी नहीं हुई और पूरी की पूरी टीम महज 35.5 ओवर में 112 के स्कोर पर ही ऑलआउट हो गई. इस तरह भारतीय टीम ने अफगानिस्तान करो पारी और 300 रन से धूल चटा दी.
Clinical from start to finish ????
— BCCI (@BCCI) June 8, 2026
An unforgettable Test match in New Chandigarh ends with #TeamIndia securing their biggest ever win by an innings and 300 runs ????
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भारत ने पहली पारी में बनाए थे 564 रन
मुल्लांपुर टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था. अफगानिस्तान के गेंदबाजों की पिटाई करते हुए टीम इंडिया ने पहली पारी में 127 ओवर बल्लेबाजी की, जिसमें 8 विकेट गंवाकर 564 रन बनाए और पारी घोषित कर दी. भारत की ओर से पहली पारी में केएल राहुल (100) और कप्तान शुभमन गिल (126) ने शतकीय पारी खेली थी. साईं सुदर्शन ने 81, ऋषभ पंत 81 और वॉशिंगटन सुंदर ने 52 रनों की पारी खेली थी. इस तरह टीम इंडिया ने पहली पारी में 564 रन बनाए थे.
मानव सुथार ने जीता प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड
The first of many to come ✨
— BCCI (@BCCI) June 8, 2026
Manav Suthar caps off a dream debut with the Player of the Match award ????
Relive his spell ▶️ https://t.co/UXQVUy1QqX#TeamIndia | #INDvAFG | @IDFCFIRSTBank pic.twitter.com/1VzsrkJiY4
अफगानिस्तान के साथ खेले मुल्लांपुर टेस्ट मैच में मानव सुथार को टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला. 23 साल के मानव ने अपनी कमाल की गेंदबाजी से अफगान टीम को खूब परेशान किया और भारत को बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. पहली पारी में मानव ने 22 ओवर फेंके, जिसमें 33 रन देकर 6 विकेट चटका लिए. इस दौरान उन्होंने 10 मेडेन ओवर फेंके. दूसरी पारी में मानव ने 10 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें 29 रन देकर एक विकेट चटकाया. इस तरह मुल्लांपुर टेस्ट में 7 विकेट लेकर किफायती गेंदबाजी करने के लिए मानव सुथार को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.
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