भारत और जर्मनी की वायु सेनाओं के बीच पहली एयर स्टाफ वार्ता, रक्षा सहयोग को नई गति
भारत और जर्मनी की वायु सेनाओं के बीच पहली एयर स्टाफ वार्ता नई दिल्ली में आयोजित की गई है. भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है.
सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर जोर
भारतीय वायुसेना के अनुसार, पहली बार आयोजित इस वार्ता ने दोनों पक्षों को आपसी सैन्य सहयोग को और गहरा करने तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाएं तलाशने के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया.
प्रशिक्षण और ऑपरेशनल सहयोग पर चर्चा
वार्ता के दौरान सैन्य प्रशिक्षण, ऑपरेशनल स्तर पर आपसी आदान-प्रदान और सैन्य क्षमताओं के विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष फोकस किया गया.
पेशेवर अनुभवों के आदान-प्रदान से बढ़ेगी समझ
दोनों वायु सेनाओं के बीच नियमित संवाद और पेशेवर अनुभवों के आदान-प्रदान से आपसी समझ तथा परिचालन सहयोग को और मजबूत करने की संभावनाएं बनी हैं.
तरंग शक्ति अभ्यास में जर्मन वायुसेना की भागीदारी
गौरतलब है कि भारत और जर्मनी के बीच वायु क्षेत्र में सैन्य सहयोग पहले भी विभिन्न अभ्यासों और पेशेवर आदान-प्रदान के माध्यम से आगे बढ़ा है. वर्ष 2024 में जर्मन वायुसेना ने भारत में आयोजित तरंग शक्ति बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास में हिस्सा लिया था. इसमें जर्मन वायुसेना के यूरोफाइटर और ए400एम विमान शामिल हुए थे.
एयर स्टाफ वार्ता क्यों है अहम?
ऐसे सैन्य अभ्यासों के अलावा एयर स्टाफ वार्ता जैसे संस्थागत संवाद दोनों देशों को अपनी परिचालन जरूरतों, प्रशिक्षण अनुभवों और भविष्य की क्षमताओं पर नियमित रूप से चर्चा करने का अवसर देते हैं.
भारतीय वायुसेना के मुताबिक 11 अगस्त से शुरू हुई यह चार दिवसीय पहली एयर स्टाफ वार्ता भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. आने वाले समय में प्रशिक्षण, परिचालन आदान-प्रदान और क्षमता विकास के क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशे जाने की उम्मीद है. वहीं भारत-इंडोनेशिया के बीच आर्मी टू-आर्मी स्टाफ वार्ता भी हुई है.
भारत व इंडोनेशिया के बीच इस सैन्य वार्ता का उद्देश्य रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है. यहां रक्षा सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने पर दोनों देशों ने सहमति दी है. द्विपक्षीय रक्षा सहयोग व संयुक्त प्रशिक्षण का दायरे बढ़ाने पर दोनों पक्ष राजी हुए हैं.
11 से प्रारंभ हुई दोनों देशों की यह सैन्य वार्ता 13 अगस्त तक जारी रही. वार्ता में दोनों देशों की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को बढ़ाने और आपसी संबंधों को और गहरा करने पर विस्तार से चर्चा हुई.
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(DISCLAIMER: समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
पीपलकोटी टनल हादसा: घायलों से मिले CM धामी, बोले- ‘हर श्रमिक को सुरक्षित निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता’
पीपलकोटी टनल हादसा: मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने मौके पर चल रहे रेस्क्यू अभियान की स्थिति की जानकारी ली और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए. इसके बाद मुख्यमंत्री जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे, जहां उन्होंने रेस्क्यू कर बाहर निकाले गए घायल श्रमिकों से मुलाकात की.
घायल श्रमिकों से जाना हाल
मुख्यमंत्री धामी ने अस्पताल में भर्ती श्रमिकों से उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और बातचीत कर उनका हालचाल जाना. उन्होंने डॉक्टरों से भी घायलों को दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं और उपचार की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की. मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि सभी घायल श्रमिकों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और उपचार में किसी भी तरह की लापरवाही न हो. उन्होंने कहा कि घायलों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाए. जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रशासन से भी इलाज की व्यवस्थाओं को लेकर पूरी जानकारी ली.
पीपलकोटी, चमोली में प्रभावित टनल क्षेत्र के स्थलीय निरीक्षण के उपरांत जिला अस्पताल, गोपेश्वर पहुंचकर रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों से भेंट की और उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान उनके स्वास्थ्य एवं उपचार के संबंध में चिकित्सकों से भी जानकारी ली।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 14, 2026
प्रत्येक श्रमिक का जीवन अमूल्य है।… pic.twitter.com/tFxqBc846G
फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की जान सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. टनल में फंसे हर श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि रेस्क्यू अभियान में उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और किसी भी स्तर पर कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि हादसे से प्रभावित श्रमिकों के परिजनों को समय पर जानकारी देने के लिए उन्होंने संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से स्वयं बातचीत की है. इससे परिजनों को श्रमिकों की स्थिति की सही जानकारी मिल सकेगी.
LIVE: गोपेश्वर, चमोली में आपदा प्रभावित टनल क्षेत्र के घायलों की कुशल क्षेम एवं उपचार व्यवस्थाओं का निरीक्षण https://t.co/vkPIYGnJW8
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 14, 2026
हादसे की होगी मजिस्ट्रियल जांच
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि टनल हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच के जरिए हादसे की वजह और इसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जानकारी सामने आएगी. इस दौरान बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. राजीव पाल समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
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