19 मई 1987 को फिजी के नादी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयर न्यूजीलैंड की फ्लाइट 24 हाईजैक कर ली गई थी. टोक्यो से ऑकलैंड जा रहे इस बोइंग 747 प्लेन में फ्यूलिंग के दौरान एयरपोर्ट स्टाफ अमजद अली डायनामाइट लेकर कॉकपिट में घुस गया. उसने फिजी के अपदस्थ प्रधानमंत्री डॉक्टर टिमोसी बावाद्रा और उनके 27 मंत्रियों की रिहाई की मांग की थी करीब छह घंटे तक चले इस ड्रामे में 105 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
Aaj Ka Mesh Rashifal 8 June 2026 : अगले पल क्या होगा, अगर इसका पता पहले ही चल जाए तो हर कोई फूंक-फूंककर कदम उठाने लगेगा. राशिफल यही काम करता है. इसकी मदद से अगले 24 घंटे में क्या होगा, उसका अंदाजा लगा सकते हैं. मेष राशि के स्वामी मंगल आज आपको आपको ऊर्जा, साहस और शक्ति देंगे. विंध्यधाम के ज्योतिषाचार्य अखिलेश अग्रहरि लोकल 18 से बताते हैं कि चंद्रमा लग्न के दूसरे भाव में गोचर करेंगे. प्यार और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी. समस्याएं खत्म होंगी. सूर्य पराक्रम और संचार को मजबूत करेंगे.
French Open 2026: रोलां गैरोस की लाल मिट्टी पर जैसे ही आखिरी अंक अलेक्जेंडर ज्वेरेव के नाम हुआ, वर्षों का इंतजार और संघर्ष भावनाओं के सैलाब में बदल गया। फ्लेवियो कोबोली को हराकर पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले जर्मन स्टार कोर्ट पर ही घुटनों के बल बैठ गए। कुछ ही क्षण बाद वे पीठ के बल लेट गए और दोनों हाथों से अपना चेहरा ढंक लिया। उनकी आंखों से खुशी के आंसू लगातार बह रहे थे।
यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उन तमाम दर्दनाक हारों और अधूरे सपनों का अंत था, जिनका सामना ज्वेरेव ने पिछले कई वर्षों में किया था। तीन ग्रैंड स्लैम फाइनल हारने के बाद चौथे प्रयास में आखिरकार उन्होंने इतिहास रच दिया। दुनिया के नंबर-3 खिलाड़ी के इस भावुक जश्न की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। टेनिस प्रशंसक इसे फ्रेंच ओपन 2026 के सबसे यादगार पलों में से एक बता रहे हैं।
मैच के बाद ट्रॉफी समारोह के दौरान भी अलेक्जेंडर ज्वेरेव अपनी भावनाएं नहीं छिपा सके। उन्होंने कहा कि यह जीत उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना थी और कई बार फाइनल में हारने के बाद उन्हें लगने लगा था कि शायद ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी उनके नसीब में नहीं है। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। रोलां गैरोस में मिली यह जीत उनके धैर्य और संघर्ष का सबसे बड़ा पुरस्कार साबित हुई।
फाइनल में फ्लेवियो कोबोली ने भी शानदार खेल दिखाया। 24 वर्षीय इटैलियन खिलाड़ी ने पहला सेट 1-6 से गंवाने के बावजूद जबरदस्त वापसी की और मुकाबले को पांचवें सेट तक पहुंचाया। चौथे सेट का टाई-ब्रेकर जीतकर उन्होंने ज्वेरेव पर दबाव बढ़ा दिया था, लेकिन निर्णायक सेट में अनुभव और फिटनेस के मामले में जर्मन खिलाड़ी भारी पड़े।
इस जीत के साथ ज्वेरेव ने न सिर्फ अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता, बल्कि टेनिस जगत के उन चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में भी जगह बना ली जिन्होंने लंबे इंतजार के बाद मेजर ट्रॉफी उठाई। सोशल मीडिया पर दुनिया भर के खिलाड़ियों, पूर्व चैंपियनों और प्रशंसकों ने उन्हें बधाई दी। कई दिग्गजों ने इसे हाल के वर्षों की सबसे प्रेरणादायक ग्रैंड स्लैम जीतों में से एक बताया।
दूसरी ओर, कोबोली की हार के बावजूद उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचे इटैलियन स्टार ने साबित कर दिया कि आने वाले वर्षों में वह टेनिस की दुनिया के बड़े नामों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ट्रॉफी उनके हाथ नहीं लगी, लेकिन रोलां गैरोस 2026 ने उन्हें वैश्विक मंच पर नई पहचान जरूर दिला दी।
फ्रेंच ओपन 2026 का यह फाइनल लंबे समय तक याद रखा जाएगा। एक तरफ वर्षों का इंतजार खत्म कर इतिहास रचने वाले ज्वेरेव थे, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी के उभरते सितारे कोबोली। अंत में जीत जर्मनी के नाम रही, लेकिन इस मुकाबले ने टेनिस प्रशंसकों को पांच सेट तक रोमांच, संघर्ष और भावनाओं से भरपूर यादगार कहानी दी।