Explainer: ममता बनर्जी के सामने टीएमसी को टूट से बचाने के लिए क्या हैं विकल्प, आगे क्या करेंगी?
पश्चिम बंगाल में पूर्व सीएम ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए पार्टी को बचाने की बड़ी चुनौती है. खासतौर पर एकजुटता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया है. कुछ बागी नेताओं और विधायकों के समर्थन में पार्टी में संभावित टूट की अटकलें तेज हो चुकी हैं.
टीएमसी के सामने संकट?
पार्टी के कुछ असंतुष्ट नेताओं की अगुवाई शैली, संगठनात्मक फैसलों और चुनावी हार के लिए जवाबदेही पर सवाल खड़े हो चुके हैं. "फर्जी हस्ताक्षर" विवाद और बागी विधायकों के दावों ने संकट को गहरा दिया है. बागी विधायकों के दावों ने संकट को और गहरा दिया है. बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है. इससे महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक टूट की तुलना होने लगी है.
1. संगठन का व्यापक पुनर्गठन
टीएमसी ने पहले ही कई समितियों और फ्रंटल संगठनों को भंग करने जैसा बड़ा कदम उठाया है. इसका लक्ष्य गुटों की शक्ति कम करना और संगठन को नए सिरे से खड़ा करना माना गया है.
2. बागियों से समझौता
ममता बनर्जी कुछ नेताओं को वापस साथ जाने की जिम्मेदारियां बांटने और नेतृत्व में अधिक भागीदारी देने का प्रयास किया है. इससे तुरंत टूट को टाला जा सकता है.
3. नेतृत्व संरचना में बदलाव
हार के बाद पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी और रणनीतिक टीम की भूमिका सवाल खड़े हुए हैं. ममता संगठन में नई शक्ति-संतुलन व्यवस्था बना सकती हैं. इस तरह से वरिष्ठ नेताओं का भरोसा लौटा है.
4. विपक्षी राजनीति पर फोकस
टीएमसी अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का भाग रहा है. पार्टी की अगुवाई आंतरिक संकट से ध्यान हटाकर भाजपा विरोधी राजनीति और विपक्ष की एकता पर जोर दिया जा सकता है.
5. कानूनी और संवैधानिक रणनीति
अगर कोई बड़ा गुट अलग होने का प्रयास करता है तो दल-बदल कानून, विधानसभा में संख्या बल और संगठनात्मक वैधता जैसे मामले सामने आएंगे. पार्टी की अगुवाई में इन मोर्चों पर काफी तैयारी हो सकती है.
ममता बनर्जी क्या कर सकती हैं?
राजनीतिक संकेत बताते हैं कि उनका पहला लक्ष्य पार्टी में तुरंत टूट को रोकना होगा. इसमें संगठनात्मक फेरबदल, असंतुष्ट नेताओं से संवाद, अभिषेक बनर्जी की सक्रिय भूमिका और विपक्षी एकता की राजनीति
इन चार मोर्चों पर एक साथ काम
सबसे अहम बात यह है कि टीएमसी का भविष्य इस पर तय करेगा कि ममता बनर्जी असंतोष को "व्यक्तिगत बगावत" तक तय रख पाती हैं. वह एक संगठित राजनीतिक गुट बदल जाता है. फिलहाल पार्टी नेतृत्व टूट को रोकने को लेकर सक्रिय कदम उठाता दिखाई दे रहा है. आने वाले कुछ सप्ताह निर्णायक हो सकते हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सरकार बदलने के बाद पार्टी के बिखराव और अधिकतर मामलों में में गिरफ्तारी के डर से पार्षदों के इस्तीफे का सिलसिला जारी है. कई नेताओं पर नगरपालिकाओं में कर्मचारियों की नियुक्ति कथित घोटाले में शामिल होने के आरोप लग रहे हैं. ऐसी पुरानी फाइलें अब निकाली जा रही हैं. बड़े पैमाने पर इस्तीफे का दौर जारी है.
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सरकार ने यह भी कहा कि संकट के दौरान देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई। अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था की गई।



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