Heat Rash: घमौरियों से हो गए हैं परेशान? गर्मी से होने वाली रैशेज में इन 5 घरेलू उपायों से मिलेगी राहत
Heat Rash Remedies: तेज धूप, बढ़ता तापमान और लगातार आने वाला पसीना गर्मियों में कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है। इनमें घमौरियां सबसे आम लेकिन बेहद परेशान करने वाली समस्या है। त्वचा पर लाल दाने, जलन, खुजली और चुभन जैसी दिक्कतें दिनभर की आरामदायक दिनचर्या को भी मुश्किल बना देती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक जब पसीने की ग्रंथियां ब्लॉक हो जाती हैं और पसीना त्वचा के अंदर फंस जाता है, तब घमौरियां विकसित होती हैं। हालांकि कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 असरदार घरेलू तरीके, जो गर्मियों में घमौरियों से जल्द राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।
घमौरियां दूर करने के घरेलू तरीके
ठंडे पानी की सिकाई करें
घमौरियों में त्वचा को ठंडक पहुंचाना सबसे जरूरी होता है। साफ कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर प्रभावित हिस्से पर 10 से 15 मिनट तक रखें। इससे जलन और खुजली कम हो सकती है। दिन में दो से तीन बार ऐसा करने से आराम महसूस हो सकता है।
एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करें
एलोवेरा में प्राकृतिक रूप से ठंडक और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। ताजा एलोवेरा जेल को प्रभावित जगह पर लगाने से त्वचा को राहत मिल सकती है। यह लालिमा और जलन को कम करने में भी मदद करता है।
चंदन का लेप लगाएं
चंदन को लंबे समय से त्वचा को ठंडक देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। चंदन पाउडर में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट तैयार करें और घमौरियों वाली जगह पर लगाएं। सूखने के बाद सामान्य पानी से धो लें। इससे त्वचा को ठंडक मिलने के साथ खुजली भी कम हो सकती है।
नीम के पानी से नहाएं
नीम में एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। कुछ नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर ठंडा कर लें और इसी पानी से स्नान करें। यह त्वचा को साफ रखने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
कॉर्नस्टार्च या मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करें
कॉर्नस्टार्च अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है, जबकि मुल्तानी मिट्टी त्वचा को ठंडक पहुंचाती है। मुल्तानी मिट्टी का पतला पेस्ट बनाकर प्रभावित हिस्से पर लगाया जा सकता है। इससे त्वचा को आराम महसूस हो सकता है।
घमौरियों से बचने के लिए रखें इन बातों का ध्यान
- हल्के और सूती कपड़े पहनें।
- शरीर को अधिक देर तक पसीने में भीगा न रहने दें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- धूप में लंबे समय तक रहने से बचें।
- त्वचा को साफ और सूखा रखें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)
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भारत में तेजी से बढ़ रहा इनोवेशन इकोसिस्टम, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 400 हुई : डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। भारत का अंतरिक्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम कुछ साल पहले एकल अंकों की संख्या से बढ़कर आज लगभग 400 हो गया है, जिसमें से एक स्टार्टअप ने हाल ही में यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया है। यह बयान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को दिया।
इसके साथ ही, कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य अब लगभग 9 अरब डॉलर है और अगले सात से आठ वर्षों के अंत तक इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
सिंह के मुताबिक, देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2014 में लगभग 350-400 स्टार्टअप से बढ़कर वर्तमान में 23 लाख से अधिक हो गया है, जिससे लगभग 24-25 लाख रोजगार सृजित हुए हैं। इनमें से लगभग आधे स्टार्टअप द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों में स्थित हैं, जबकि 35-39 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के 12 सालों ने भारत को अवसरों, इनोवेशन और आत्मविश्वास से प्रेरित एक आकांक्षी देश में बदल दिया है। गवर्नेंस में सुधार, टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण और नागरिकों पर केंद्रित नीतियों ने भारतीयों के अपने भविष्य को देखने के नजरिए को बुनियादी तौर पर बदल दिया है।
सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रक्रियात्मक के साथ-साथ सबसे गहरा परिवर्तन मनोवैज्ञानिक भी रहा है, और भारत में एक नई महत्वाकांक्षी संस्कृति का उदय हुआ है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में मानसिकता में जो बदलाव आया है, वह सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। मैं भी यह कर सकता हूँ जैसी जो महत्वाकांक्षी भावना जागृत हुई है, वह पहले नहीं थी।”
यह बदलाव छोटे शहरों और गैर-महानगरीय पृष्ठभूमि से उभरने वाले सिविल सेवा परीक्षा के शीर्ष विजेताओं की बढ़ती संख्या में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जो प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के माध्यम से अवसरों के लोकतंत्रीकरण को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को इस व्यापक परिवर्तन से जोड़ा।
चंद्रयान मिशनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा दिया है जिसमें नागरिक राष्ट्रीय वैज्ञानिक उपलब्धियों से अधिकाधिक जुड़ाव महसूस करते हैं और इनोवेशन को एक साझा राष्ट्रीय प्रयास के रूप में देखते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने असफलताओं के बाद वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया और उनकी सफलताओं का जश्न मनाया, जिससे यह धारणा सामान्य हो गई कि विफलता इनोवेशन और प्रगति का एक हिस्सा है।
इसके अतिरिक्त,केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का दीर्घकालिक उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं है, बल्कि एक सशक्त और महत्वाकांक्षी समाज का निर्माण करना है जो 2047 तक एक विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान दे सके।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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