भारत में तेजी से बढ़ रहा इनोवेशन इकोसिस्टम, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 400 हुई : डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। भारत का अंतरिक्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम कुछ साल पहले एकल अंकों की संख्या से बढ़कर आज लगभग 400 हो गया है, जिसमें से एक स्टार्टअप ने हाल ही में यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया है। यह बयान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को दिया।
इसके साथ ही, कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य अब लगभग 9 अरब डॉलर है और अगले सात से आठ वर्षों के अंत तक इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
सिंह के मुताबिक, देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम 2014 में लगभग 350-400 स्टार्टअप से बढ़कर वर्तमान में 23 लाख से अधिक हो गया है, जिससे लगभग 24-25 लाख रोजगार सृजित हुए हैं। इनमें से लगभग आधे स्टार्टअप द्वितीय और तृतीय स्तर के शहरों में स्थित हैं, जबकि 35-39 प्रतिशत स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के 12 सालों ने भारत को अवसरों, इनोवेशन और आत्मविश्वास से प्रेरित एक आकांक्षी देश में बदल दिया है। गवर्नेंस में सुधार, टेक्नोलॉजी के लोकतंत्रीकरण और नागरिकों पर केंद्रित नीतियों ने भारतीयों के अपने भविष्य को देखने के नजरिए को बुनियादी तौर पर बदल दिया है।
सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रक्रियात्मक के साथ-साथ सबसे गहरा परिवर्तन मनोवैज्ञानिक भी रहा है, और भारत में एक नई महत्वाकांक्षी संस्कृति का उदय हुआ है।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में मानसिकता में जो बदलाव आया है, वह सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। मैं भी यह कर सकता हूँ जैसी जो महत्वाकांक्षी भावना जागृत हुई है, वह पहले नहीं थी।”
यह बदलाव छोटे शहरों और गैर-महानगरीय पृष्ठभूमि से उभरने वाले सिविल सेवा परीक्षा के शीर्ष विजेताओं की बढ़ती संख्या में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जो प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के माध्यम से अवसरों के लोकतंत्रीकरण को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को इस व्यापक परिवर्तन से जोड़ा।
चंद्रयान मिशनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा दिया है जिसमें नागरिक राष्ट्रीय वैज्ञानिक उपलब्धियों से अधिकाधिक जुड़ाव महसूस करते हैं और इनोवेशन को एक साझा राष्ट्रीय प्रयास के रूप में देखते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने असफलताओं के बाद वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित किया और उनकी सफलताओं का जश्न मनाया, जिससे यह धारणा सामान्य हो गई कि विफलता इनोवेशन और प्रगति का एक हिस्सा है।
इसके अतिरिक्त,केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का दीर्घकालिक उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं है, बल्कि एक सशक्त और महत्वाकांक्षी समाज का निर्माण करना है जो 2047 तक एक विकसित भारत के सपने को साकार करने में योगदान दे सके।
--आईएएनएस
एबीएस
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कॉलेज हॉस्टल से रात 2 बजे उठा ले गए थे लोग, इम्तियाज अली ने सुनाया अपनी किडनैपिंग का खौफनाक किस्सा
Imtiaz Ali: बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर इम्तियाज अली (Imtiaz Ali) अपनी फिल्मों में लव-रिलेशन और लाइफ से जुड़ी स्टोरी को बड़ी खूबसूरती से दिखाने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी लाइफ का एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया. इम्तियाज अली ने बताया कि दिल्ली में कॉलेज के दिनों में एक पॉलिटिकल विवाद के चलते उन्हें आधी रात को हॉस्टल से उठा लिया गया था. आइए जानते हैं कि उन्होंने इस बारे में क्या-क्या बताया-
हिंदू कॉलेज के दिनों का है मामला
इम्तियाज अली ने एक इंटरव्यू में अपने दिल्ली के हिंदू कॉलेज के दिनों को याद करते हुए बताया कि यह उस समय की बात है जब वह दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे. आपको बता दें कि इम्तियाज ने 1993 में यहां से ग्रेजुएशन पूरी की थी.
उनके मुताबिक उस दौर में कॉलेज पॉलिटिक्स काफी एक्टिव थी. कैंपस में अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच कॉम्पिटिशन और टकराव आम बात थी. इसी दौरान एक मामूली विवाद के चलते उन्हें किडनैप कर लिया गया था.
इम्तियाज अली को क्यों किया गया किडनैप
इम्तियाज अली ने बताया कि उनके हॉस्टल की सामने वाली दीवार पर एक पॉलिटिकल पोस्टर चिपका हुआ था. उन्हें लगा कि हॉस्टल की मैन दीवार पर पोस्टर लगाने की बजाय उसे साइड की दीवार पर लगाया जाना चाहिए. उन्होंने उस दौरान पोस्टर लगाने वालों से इस बारे में भी यही बात कही, लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया. इसके बाद इम्तियाज ने खुद पोस्टर को वहां से हटा दिया था और उसे सामने वाली दीवार से पर चिपका दिया था.
रात 2 बजे हॉस्टल पहुंचे लोग
इम्तियाज अली ने आगे बताया कि इस इंसिडेंट के कुछ दिन बाद रात करीब 2 बजे उनके एक रूममेट ने बताया कि कुछ लोग उन्हें ढूंढते हुए हॉस्टल में घुस गए हैं. इसके कुछ देर बाद हॉस्टल में कुछ लोग पहुंचे और उनसे अपने साथ चलने के लिए कहा गया. हालांकि, जब उन्होंने पूछा कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है, तो इस बारे में कुछ नहीं बताया गया. इम्तियाज के मुताबिक उन्हें साइकिल रिक्शा में बैठाकर वहां से ले गए.उस समय उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या होने वाला है. जिससे वह बहुत डर गए थे.
गैंग लीडर के सामने हुई पूछताछ
डायरेक्टर ने बताया कि उन्हें एक ऐसी जगह ले जाया गया जो सरकारी क्वार्टर की तरह लग रही थी. वहां एक लोकल गैंग लीडर मौजूद था, जो कथित तौर पर एक पॉलिटिकल संगठन से जुड़ा हुआ था.
उसने इम्तियाज से पोस्टर फाड़ने को लेकर सवाल पूछना शुरू किया. इम्तियाज ने साफ कहा कि उन्होंने पोस्टर नहीं फाड़ा था. उन्होंने सिर्फ उसे हॉस्टल की मैन दीवार से हटाकर दूसरी जगह चिपकाया था.
कैसे बची जान
गैंग ने लीडर ने वहां पर मौजूद लोगों से पूछा क्या इम्तियाज में सच में पोस्टर फाड़ा है. इस पर वहां मौजूद एक शख्स ने मना कर दिया. उसने आगे बताया कि इम्तियाज ने पोस्टर की जगह बदली थी, तो गैंग लीडर नाराज हो गया. उसे एहसास हुआ कि उसे गलत जानकारी दी गई थी. इसके बाद गैंग लीडर की उस शख्स की उन लोगों के साथ बहस हो गई और उसने गुस्से में अपने ही साथी को थप्पड़ मार दिया. जिसके बाद विवाद यहीं पर खत्म हो गया और उन्हें सुरक्षित वहां से जाने दिया.
वर्कफ्रंट की बात करें तो इम्तियाज अली इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' को लेकर चर्चा में हैं. इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी और नसीरुद्दीन शाह अहम रोल में नजर आएंगे. यह फिल्म 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.
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