Transfer 2026: ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल, 6 IAS और 2 IPS अफसरों का हुआ तबादला, यहाँ देखें लिस्ट
कर्नाटक में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल (IAS IPS Transfer 2026) देखने को मिला है। राज्य सरकार ने एक साथ 6 आईएएस और दो आईपीएस अफसरों को नया पदभार सौंपा है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में नए सचिव की नियुक्ति की गई है। डीजीपी और आईजीपी पदों के प्रभार में भी बदलाव हुआ है। स्थानांतरण और नियुक्ति से संबंधित आदेश 7 जून रविवार को जारी किया गया है।
आईएएस अधिकारी अंजुम प्रवेश जो पोस्टिंग की प्रतीक्षा कर रहे थे, उन्हें फॉरेस्ट, इकोलॉजी एंड एनवायरमेंटल डिपार्टमेंट में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। मनीष मौदगिल, विशेष आयुक्त (एडमिन, रिवेन्यू एंड आईटी) ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण को मुख्यमंत्री (प्रोग्राम और प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन) के प्रधान सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन आईएएस अफसरों का भी तबादला हुआ
दीपा चोलन, सचिव शहरी विकास विभाग को स्थानांतरित करके अगले आदेश तक सचिव, परिवहन विभाग बेंगलुरु पद पर नियुक्त किया गया है। वह डॉ प्रसाद एनवी का स्थान ग्रहण करेंगे। कावेरी बीबी को शहरी विकास विभाग के सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ वेंकटेश एम. वी सचिव, योजना, कार्यक्रम निगरानी एवं सांख्यिकी विभाग को तत्काल प्रभाव से सहकारी समितियां के रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया गया है। डॉक्टर सेल्वमणि आर को मैनेजिंग डायरेक्टर, कर्नाटक अर्बन वॉटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड को स्थानांतरित करके आयुक्त, ट्रांसपोर्ट एंड रोड सेफ्टी बेंगलुरु पद पर नियुक्त किया गया है।
कर्नाटक सरकार ने इन आईपीएस अफसरों को सौंपा नया पदभार
बैच 1994 के आईपीएस अधिकारी डॉ प्रणब मोहंती, पुलिस महानिदेशक (DGP) आंतरिक सुरक्षा प्रभाग को पुलिस महानिदेशक आपराधिक जांच विभाग, विशेष इकाइयां और आर्थिक अपराध पद पर तैनात किया गया है। साथ ही वह पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध), आपराधिक जांच विभाग का समवर्ती प्रभार भी संभालेंगे। बैच 2006 के आईपीएस आधिकारिक डॉ चंद्रगुप्त इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (IGP), सिक्योरिटी इंटेलिजेंस को स्थानांतरित करके इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, इंटेलिजेंस बेंगलुरु के पद पर नियुक्त किया गया है।
“यह बेहद शर्मनाक..” राम मंदिर दान में करोड़ों की गड़बड़ी का दावा, अखिलेश यादव ने ट्रस्ट और सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल, पढ़ें खबर
राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से आए दान में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी का दावा सामने आया है। यह दावा किसी और ने नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया है, जिसने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। यादव ने साफ शब्दों में कहा है कि राम मंदिर के पवित्र दान से करोड़ों रुपये गायब होने की खबरें सामने आई हैं, जो अपने आप में बेहद गंभीर हैं। उन्होंने इस पूरे मामले पर अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है, क्योंकि यह आस्था का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला प्रतीत होता है।
यह स्थिति वाकई ‘बेहद शर्मनाक’ है, और इस पर उठ रही चुप्पी भी कम सवालिया निशान नहीं लगा रही। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस संवेदनशील मुद्दे को उठाया। उन्होंने अपने पोस्ट में इस कथित गड़बड़ी को दुनिया भर के राम भक्तों के लिए ‘बेहद संवेदनशील’ बताया है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि राम भक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा मंदिर निर्माण के लिए दिया था, और ऐसे में करोड़ों रुपये गायब होने की खबर उनके विश्वास पर सीधा कुठाराघात है। यादव ने मंदिर ट्रस्ट की चुप्पी को ‘बेहद शर्मनाक’ स्थिति करार दिया है। उन्होंने लिखा कि राम मंदिर को दिए गए दान से करोड़ों रुपये का गायब होना अपने आप में एक बहुत ही संवेदनशील खबर है, जिस पर तुरंत स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।
सपा प्रमुख ने मंदिर ट्रस्ट और सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने इस पूरे प्रकरण में मंदिर ट्रस्ट और सरकार की रहस्यमयी चुप्पी पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर कहा है कि सरकार की यह चुप्पी ‘संदिग्ध’ प्रतीत होती है। जब इतने बड़े पैमाने पर धन की हेराफेरी का आरोप लग रहा हो और सत्ता में बैठे लोग या मंदिर ट्रस्ट कोई जवाब न दे, तो यह अपने आप में कई शंकाओं को जन्म देता है। पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने इस कथित विसंगति को सार्वजनिक चिंता का विषय बताया है। उन्होंने इस पर जोर दिया कि यह मंदिर ट्रस्ट के लिए तो ‘शर्म’ की सारी हदें पार करने जैसी स्थिति है। कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति आगे आकर इस गंभीर आरोप पर स्पष्टीकरण देने को तैयार नहीं है, जो इस संदेह को और पुख्ता करता है कि दाल में कुछ काला जरूर है।
अखिलेश यादव की कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर दुनिया भर के सनातनी समुदाय की भगवान राम में गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है। यह सिर्फ पैसे की हेराफेरी का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और उनके विश्वास का भी अपमान है। यादव ने दृढ़ता से कहा कि अदालत को इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा सीधे तौर पर सनातनी समुदाय की गहरी आस्था और उनके धार्मिक विश्वास से संबंधित है। यदि इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं होती, तो करोड़ों भक्तों का भरोसा टूट सकता है।
सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी उलझा रही है। अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि इस गंभीर आरोप पर अभी तक कोई भी तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जो बेहद चिंताजनक है। सरकार की यह चुप्पी वाकई संदिग्ध प्रतीत होती है। जब आरोपों की गंभीरता इतनी अधिक हो, तब भी कोई भी इस मामले पर स्पष्टीकरण देने को तैयार न हो, यह अपने आप में कई सवालों को जन्म देता है। यह स्थिति बताती है कि कहीं न कहीं पारदर्शिता की कमी है और इस पर जल्द से जल्द जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि राम भक्तों का विश्वास बना रहे और धर्म के नाम पर किसी भी तरह की हेराफेरी न हो सके।
समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है।
ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है।
न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की माँग है…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 7, 2026
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