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Explainer: INDIA गठबंधन की महाबैठक आज, 23 दलों की क्या होगी रणनीति; जानिए बैठक से जुड़ी सारी बातें

INDI Alliance Meeting: केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ बने विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ की बहुप्रतीक्षित बैठक आज यानी 8 जून को नई दिल्ली में होने जा रही है. इस बैठक को विपक्षी राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस बैठक में 23 विपक्षी दलों के नेता शामिल होंगे, जहां संसद के आगामी सत्र, केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति और राज्यों में चुनावी तालमेल जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. हालांकि इस बार गठबंधन के कई दलों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं, इसलिए बैठक का स्वरूप पहले की बैठकों से कुछ अलग हो सकता है. हाल के चुनावी नतीजों और कुछ राज्यों में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद कई विपक्षी दल एक-दूसरे के खिलाफ भी नजर आ रहे हैं. ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि बैठक में विपक्षी एकता कितनी मजबूत दिखाई देती है. तो आइए जानते हैं इस महाबैठक से जुड़ी सारी बातें.

कहां होगी बैठक?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, इंडिया गठबंधन की यह बैठक नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित की जाएगी. बैठक आज दोपहर 12 बजे शुरू होगी. इसे ‘इंडिया जनबंधन’ बैठक का नाम दिया गया है.

कौन-कौन से दल हो सकते हैं शामिल?

कांग्रेस का दावा है कि करीब 23 राजनीतिक दलों ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है. इनमें कई बड़े क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल शामिल हैं. बैठक में तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), पीडीपी, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) जैसे दल शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा भाकपा-माले, आरएसपी, वीसीके, एमडीएमके, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, असम जातीय परिषद और अन्य छोटे दलों के प्रतिनिधियों के भी शामिल होने की संभावना है.

किन नेताओं के पहुंचने की उम्मीद?

गौरतलब है कि बैठक में कई बड़े विपक्षी नेता शामिल हो सकते हैं. इनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी प्रमुख हैं. इसके अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेता भी बैठक में शामिल हो सकते हैं.

किन दलों ने बनाई दूरी?

आपको बता दें कि इस बैठक से सबसे बड़ी दूरी द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) ने बनाई है. पार्टी ने आधिकारिक तौर पर बैठक का बहिष्कार करने का ऐलान किया है. डीएमके की नाराजगी की वजह तमिलनाडु की राजनीति है. पार्टी का आरोप है कि हालिया विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देकर पुराने सहयोगी डीएमके के साथ विश्वासघात किया है. इसी कारण डीएमके ने बैठक में शामिल न होने का फैसला लिया है.

वहीं आम आदमी पार्टी भी इस बैठक से दूर रहेगी. पार्टी पहले ही यह कह चुकी है कि इंडिया गठबंधन केवल 2024 लोकसभा चुनाव के लिए बनाया गया था और अब उसका हिस्सा बने रहने का कोई मतलब नहीं है. हालांकि माकपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कांग्रेस की कुछ नीतियों और फैसलों पर नाराजगी जताई है, लेकिन उन्होंने बैठक का बहिष्कार नहीं किया है.

किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी माना जा रहा है. विपक्षी दल भाजपा और एनडीए के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा नीट परीक्षा विवाद, सीबीएसई से जुड़े मुद्दे, बेरोजगारी, महंगाई और अन्य जनहित के सवालों पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति भी बनाई जा सकती है. बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों पर भी चर्चा होने की संभावना है. खासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों के बीच तालमेल और सीटों के बंटवारे पर बातचीत हो सकती है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच भविष्य के गठबंधन और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.

इंडिया गठबंधन की अब तक की प्रमुख बैठकें

पहली बैठक - पटना (23 जून 2023):- बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मेजबानी में हुई इस बैठक में करीब 15 विपक्षी दल शामिल हुए थे. इसका उद्देश्य भाजपा के खिलाफ एक साझा मंच तैयार करना था.

दूसरी बैठक - बेंगलुरु (17-18 जुलाई 2023):- इस बैठक में 26 दल शामिल हुए. यहीं विपक्षी गठबंधन का नाम ‘इंडिया’ यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस रखा गया.

तीसरी बैठक - मुंबई (31 अगस्त-1 सितंबर 2023):- मुंबई बैठक में 28 दल शामिल हुए. यहां समन्वय समिति और मीडिया प्रबंधन के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया गया.

चौथी बैठक - नई दिल्ली (19 दिसंबर 2023):- इस बैठक में सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई. इसी दौरान मल्लिकार्जुन खरगे के नाम को संभावित प्रधानमंत्री चेहरे के रूप में भी आगे बढ़ाया गया.

पांचवीं बैठक - ऑनलाइन (13 जनवरी 2024):- वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई इस बैठक में गठबंधन के संयोजन और सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर चर्चा की गई. इसी बैठक में खरगे को गठबंधन का मुख्य संयोजक बनाया गया.

छठी बैठक - नई दिल्ली (1 जून 2024):- लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान के दिन हुई इस बैठक में चुनावी माहौल, संभावित नतीजों और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई थी.

बैठक पर सबकी नजर

दिल्ली में होने वाली यह बैठक विपक्षी राजनीति की दिशा तय करने वाली मानी जा रही है. एक तरफ कई दल भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ गठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेद भी चुनौती बने हुए हैं. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इंडिया गठबंधन आने वाले चुनावों के लिए कितनी मजबूती और एकजुटता दिखा पाता है.

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Adhik Maas में आया Padmini Ekadashi का दुर्लभ संयोग, भगवान विष्णु की कृपा से मिलेगा विशेष फल

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। प्रत्येक माह में दो एकादशियाँ आती हैं और सभी एकादशियाँ भगवान विष्णु को समर्पित होती हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ एकादशी है पद्मिनी एकादशी। यह एकादशी केवल अधिक मास में आती है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत का पालन करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

पद्मिनी एकादशी का वर्णन पुराणों में विस्तार से मिलता है। कहा जाता है कि अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है और इस मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी विशेष फल प्रदान करती है। ‘पद्मिनी’ शब्द का अर्थ होता है ‘कमल के समान पवित्र और सुंदर’। यह एकादशी मनुष्य के जीवन को भी कमल की तरह निर्मल और उज्ज्वल बनाने का संदेश देती है।

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पौराणिक कथा के अनुसार त्रेता युग में कृतवीर्य नामक एक राजा थे। उनकी पत्नी का नाम पद्मिनी था। राजा के पास सब कुछ होते हुए भी उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था। संतान प्राप्ति की इच्छा से राजा और रानी वन में जाकर तपस्या करने लगे। वर्षों तक कठिन तपस्या के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिली। तब एक दिन माता अनुसूया ने रानी पद्मिनी को अधिक मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। रानी ने पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत किया। इसके प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। यही कारण है कि इस एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाने लगा।

पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। घर और मंदिर को स्वच्छ कर दीप, धूप, पुष्प, तुलसी और फल अर्पित किए जाते हैं। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सात्विक जीवन अपनाने और मन, वचन तथा कर्म की पवित्रता बनाए रखने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ भक्त फलाहार करके व्रत का पालन करते हैं। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण किया जाता है।

इस व्रत का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है। एकादशी का दिन आत्मसंयम, साधना और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। पद्मिनी एकादशी मनुष्य को यह शिक्षा देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और श्रद्धा बनाए रखनी चाहिए। जब मनुष्य सच्चे मन से ईश्वर की आराधना करता है, तब उसके जीवन की बाधाएँ दूर होने लगती हैं।

धार्मिक दृष्टि से यह माना जाता है कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनेक यज्ञों और तीर्थों के समान पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही यह व्रत मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

वर्तमान समय में जब मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए मानसिक तनाव और असंतोष का अनुभव करता है, तब पद्मिनी एकादशी जैसे पर्व हमें आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मबल को बढ़ाने का अवसर भी है। इस दिन किया गया उपवास शरीर को संयम सिखाता है और पूजा-पाठ मन को शुद्ध करता है।

अंततः कहा जा सकता है कि पद्मिनी एकादशी श्रद्धा, तप, भक्ति और संयम का पावन पर्व है। यह मनुष्य को धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए यह एक अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस व्रत का पालन करना चाहिए तथा अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए।

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  Sports

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