पंजाब में सियासी हलचल तेज, अमित शाह से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने की मुलाकात
पूर्व पंजाब सीएम और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की. वहीं दूसरी ओर उनकी कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज हो चुकी हैं. ऐसे में पंजाब में सियासी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं. सभी के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर पंजाब में कैप्टन का अगला कदम क्या होने वाला है?
इस बीच पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष वड़िंग का दावा है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच खास बातचीत हुई है. उनका कहन है कि दोनों पुराने मित्र रहे है और लंबे समय तक काम किया है. मगर अचालक दिल्ली में कैप्टन की शाह से मुलाकात ने लोगों को चौंका दिया है.
Had a meeting with Union Home Minister Shri Amit Shah Ji today in New Delhi and discussed various issues concerning Punjab.@AmitShah pic.twitter.com/ryzH7XJyLa
— Capt.Amarinder Singh (@capt_amarinder) June 6, 2026
ढिल्लों पर निशाना साधा
आपको बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की ताजपोशी से खासे नाराज हैं. कैप्टन ने केवल सिंह ढिल्लों पर निशाना साधा कि उन्हें इन-कैपेबल भी करार दिया था. इसके साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी के आचरण और कांग्रेस की संस्कृति की तारीफ भी की थी. इसके बाद कहा जाने लगा था कि कैप्टन अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापस लौट जाएंगे. मगर इस बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह और अमित शाह की मुलाकात ने शायद इस पर रोक लगा दी है.
कैप्टन ने भाजपा की गतिविधियों से बना रखी है दूरी
पिछले कुछ दिनों से कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में भाजपा की गतिविधियों से दूरी बना रखी है पंजाब बीजेपी संगठन के इसके पीछे कैप्टन अमरिंदर सिंह की तबीयत खराब होने का हवाल दिया. मगर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लगातार पंजाब भाजपा संगठन से दूरी बना रखी है. बीते कुछ दिनों में कांग्रेस नेतृत्व की तारीफ करते हुए दिए गए बयानों को लेकर लगातार उनके कांग्रेस में वापसी की अटकलें लगाई जा रहीं थीं.
Tulsi Puja: क्या आप भी करते हैं तुलसी की पूजा? जानें वे 5 नियम जो बढ़ाते हैं घर में सुख-समृद्धि
Tulsi Puja Niyam: भारतीय संस्कृति में तुलसी का स्थान सर्वोपरि है। इसे केवल एक औषधीय पौधा ही नहीं, बल्कि 'हरि वल्लभा' यानी भगवान विष्णु की प्रिय और साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का वास होता है, वहाँ नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती और परिवार में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।
तुलसी पूजा के 5 अनिवार्य नियम
ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार, तुलसी की पूजा में छोटी-छोटी भूलें भी दोष का कारण बन सकती हैं। घर में सुख-समृद्धि के लिए इन 5 नियमों का पालन अवश्य करें:
- रविवार और एकादशी का परहेज: शास्त्रों के अनुसार, रविवार और एकादशी के दिन तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही उनके पत्ते तोड़ने चाहिए। इन दिनों माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
- अशुद्ध अवस्था में स्पर्श न करें: तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। स्नान के बाद ही तुलसी को जल अर्पित करें और बिना स्नान किए या अशुद्ध हाथों से उन्हें स्पर्श करना वर्जित है।
- दीपक जलाने की सही दिशा: तुलसी के पास शाम के समय गाय के घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दीपक को तुलसी के पौधे के पास उत्तर या पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा होता है।
- पत्ते तोड़ने का सही तरीका: यदि पूजा के लिए तुलसी के पत्ते चाहिए, तो ध्यान रखें कि उन्हें तोड़ें नहीं, बल्कि स्वयं गिरे हुए पत्तों का ही उपयोग करें। यदि बहुत आवश्यक हो, तो 'ॐ सुभद्राय नमः' का जाप करके ही कोमल मंजरी तोड़ें।
- सही स्थान का चयन: तुलसी का पौधा हमेशा घर के आंगन, बालकनी या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में लगाना चाहिए। ध्यान रहे कि तुलसी के पास कोई भी कांटेदार पौधा या गंदगी न हो।
तुलसी और सकारात्मक ऊर्जा का विज्ञान
तुलसी के प्रति श्रद्धा केवल एक धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि विज्ञान सम्मत भी है। तुलसी का पौधा वातावरण को शुद्ध करने में सक्षम है और इसकी सकारात्मक ऊर्जा घर के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है। नियमित रूप से तुलसी की सेवा करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर का वातावरण भी आध्यात्मिक रूप से उन्नत होता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिषीय धारणाओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है। पाठक इसे अंतिम सत्य न मानें और किसी भी विशिष्ट धार्मिक या ज्योतिषीय निर्णय के लिए अपने स्थानीय विद्वान या विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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