Tulsi Puja: क्या आप भी करते हैं तुलसी की पूजा? जानें वे 5 नियम जो बढ़ाते हैं घर में सुख-समृद्धि
Tulsi Puja Niyam: भारतीय संस्कृति में तुलसी का स्थान सर्वोपरि है। इसे केवल एक औषधीय पौधा ही नहीं, बल्कि 'हरि वल्लभा' यानी भगवान विष्णु की प्रिय और साक्षात माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का वास होता है, वहाँ नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती और परिवार में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।
तुलसी पूजा के 5 अनिवार्य नियम
ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार, तुलसी की पूजा में छोटी-छोटी भूलें भी दोष का कारण बन सकती हैं। घर में सुख-समृद्धि के लिए इन 5 नियमों का पालन अवश्य करें:
- रविवार और एकादशी का परहेज: शास्त्रों के अनुसार, रविवार और एकादशी के दिन तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही उनके पत्ते तोड़ने चाहिए। इन दिनों माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
- अशुद्ध अवस्था में स्पर्श न करें: तुलसी को अत्यंत पवित्र माना गया है। स्नान के बाद ही तुलसी को जल अर्पित करें और बिना स्नान किए या अशुद्ध हाथों से उन्हें स्पर्श करना वर्जित है।
- दीपक जलाने की सही दिशा: तुलसी के पास शाम के समय गाय के घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दीपक को तुलसी के पौधे के पास उत्तर या पूर्व दिशा में रखना सबसे अच्छा होता है।
- पत्ते तोड़ने का सही तरीका: यदि पूजा के लिए तुलसी के पत्ते चाहिए, तो ध्यान रखें कि उन्हें तोड़ें नहीं, बल्कि स्वयं गिरे हुए पत्तों का ही उपयोग करें। यदि बहुत आवश्यक हो, तो 'ॐ सुभद्राय नमः' का जाप करके ही कोमल मंजरी तोड़ें।
- सही स्थान का चयन: तुलसी का पौधा हमेशा घर के आंगन, बालकनी या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में लगाना चाहिए। ध्यान रहे कि तुलसी के पास कोई भी कांटेदार पौधा या गंदगी न हो।
तुलसी और सकारात्मक ऊर्जा का विज्ञान
तुलसी के प्रति श्रद्धा केवल एक धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि विज्ञान सम्मत भी है। तुलसी का पौधा वातावरण को शुद्ध करने में सक्षम है और इसकी सकारात्मक ऊर्जा घर के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है। नियमित रूप से तुलसी की सेवा करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि घर का वातावरण भी आध्यात्मिक रूप से उन्नत होता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिषीय धारणाओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी साझा करना है। पाठक इसे अंतिम सत्य न मानें और किसी भी विशिष्ट धार्मिक या ज्योतिषीय निर्णय के लिए अपने स्थानीय विद्वान या विशेषज्ञ से परामर्श लें।
पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट में पहुंचे बॉलीवुड सेलेब्स:हेमा मालिनी, अनिल कपूर और गोविंदा समेत कई कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि
दिवंगत फिल्म निर्माता और पूर्व सीबीएफसी चीफ पहलाज निहलानी की प्रेयर मीट शनिवार को मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित की गई। शाम 5 बजे से 7 बजे तक हुई इस प्रार्थना सभा में बॉलीवुड की कई हस्तियां शामिल हुईं और उन्हें श्रद्धांजलि दी। पहलाज निहलानी का 4 जून को 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वे लंबे समय से लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। प्रेयर मीट में हेमा मालिनी अनिल कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, गोविंदा, चंकी पांडे, जैकी श्रॉफ और फरहान अख्तर समेत फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई कलाकार पहुंचे। सभी ने निहलानी परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत निर्माता को याद किया। देखें प्रेयर मीट की तस्वीरें … पहलाज निहलानी ने ‘आंखें’, ‘शोला और शबनम’, ‘इल्जाम’ और ‘अंदाज’ जैसी कई सफल फिल्मों का निर्माण किया था। गोविंदा और डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने 90 के दशक में कई हिट फिल्में दीं। फिल्म निर्माण के अलावा वे 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष भी रहे थे। पहलाज निहलानी का करियर पहलाज निहलानी ने 1982 में बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म हथकड़ी बनाई और यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद 1985 में उनकी दूसरी फिल्म आंधी-तूफान रिलीज हुई, जिसने उन्हें बॉलीवुड में एक निर्माता के रूप में पहचान दिलाई। साल 1986 में उन्होंने फिल्म इल्जाम बनाई, जिससे गोविंदा को पहला बड़ा ब्रेक मिला। फिल्म हिट रही और गोविंदा को देशभर में पहचान मिली। 1987 में आई आग ही आग के जरिए चंकी पांडे ने बॉलीवुड में कदम रखा। इसी साल निहलानी ने फिल्म गुनाहों का फैसला भी बनाई। 1990 के दशक में पहलाज निहलानी ने शोला और शबनम और आंखें जैसी सुपरहिट फिल्मों का निर्माण किया। आंखें उस दौर की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक साबित हुई। गोविंदा को दिया था करियर का पहला बड़ा ब्रेक गोविंदा ने पहलाज निहलानी के साथ आंखें, शोला और शबनम जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। कुछ समय पहले ही उन्होंने लर्न फ्रॉम द लीजेंड के पॉडकास्ट में गोविंदा पर कहा था, ‘फिल्म आंधी तूफान के बाद मैं मिथुन चक्रवर्ती और शत्रुघ्न के साथ एक फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन उस समय मिथुन और शत्रुघ्न 4-4 शिफ्ट करते थे। इस वजह से हमारी नहीं बनी। फिर रीक्कू राकेश, गोविंदा को मेरे पास लेकर आए। फोटोग्राफ भी लेकर आए, लेकिन मुझे पसंद नहीं आए। उसका लुक पसंद नहीं आया।’ चंकी पांडे, पहलाज निहलानी, गोविंदा और डेविड धवन की पुरानी तस्वीर 'अगले दिन वो मेरे पास वीडियो कैसेट लेकर आया, जिसमें उसके डांस थे। उस समय ब्रेक डांस माइकल जैक्सन की वजह से पॉपुलर थे। उसने मुझे कैसेट दिखाया, तो मैंने पूछा क्या-क्या आता है। मुझे उसका चेहरा पसंद नहीं था, लेकिन उसका डांस और एक्शन पसंद आया। मेरी स्टोरी पूरी एक्शन थी। मैं लंदन जा रहा था, तो मैं उससे कहकर गया कि तुम अपनी तैयारी करो। लंदन में छुट्टियों के समय मैंने कहानी पूरी की। फिर मैंने उसमें डांस डाला। आज की डेट में उसके जितना टैलेंटेड कोई एक्टर नहीं है। उस समय वो एडवोकेट के रोल में, इंसपेक्टर के रोल में फिट नहीं होता था, हाइट की वजह से। लेकिन अब वो स्टार हो गया, स्टार से तो कुछ भी करवा लो।' गोविंदा और पहलाज निहलानी ने कुल चार फिल्मों में साथ काम किया। इनमें इल्जाम, शोला और शबनम, आंखें और रंगीला राजा शामिल हैं। काम नहीं था, तो गोविंदा को दी शोला और शबनम उसी पॉडकास्ट में पहलाज ने कहा, 'गोविंदा के पास काम नहीं था, तब शोला और शबनम हमने शुरू की तो उससे पहली बार कॉमेडी रोल करवाया। फिर जब काम नहीं था उसके बाद तब फिल्म आंखें करवाई। दोनों फिल्मों में एकदम अलग रोल था।’ पहलाज निहलानी ने कहा था- गोविंदा इनसिक्योर है जब पहलाज निहलानी से पूछा गया कि क्या गोविंदा के नेगेटिव एटीट्यूड की वजह से कई प्रोड्यूसर और डायरेक्टर उनके साथ काम नहीं करना चाहते थे, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘जब सक्सेस मिलती है, तो आदमी हर दर्द सह लेता है, लेकिन जब सक्सेस की सीढ़ी से नीचे उतरते हैं तो तकलीफ होती है। गोविंदा में वो प्रॉब्लम शुरू से थी, क्योंकि वो खुद को इनसिक्योर मानता था।' 'उसके पिता महबूब खान के बहुत बड़े हीरो रहे हैं। बड़ी-बड़ी पिक्चरें की, अच्छे प्रोड्यूसर भी रहे, नुकसान हुआ। इसके बाद उसने इतना दर्द सहा, बहुत सारी चीजें उसके हाथ से निकल गईं, स्ट्रगल करना पड़ा। वो सारी चीजें उसके अंदर थीं। वो इनसिक्योरिटी रहती है। उसे था कि कहीं से पैसे आ जाएं। उसके पास भाई-बहन की जिम्मेदारियां थीं। वो पैसे में उलझा रहता था, उसे करना भी सब था।’ 'इस वजह से उसका एटीट्यूड ऐसा हो गया था। जब काम और प्रेशर बहुत हो जाता है, तो आप छोड़ नहीं सके, तो चीजें बढ़ गईं। फिर आदत बन गई, वहमी हो गया। जब नहीं चलता आदमी तो सब उसे डैमेज करते हैं, वर्ना गोविंदा जैसा हीरो ढूंढने पर नहीं मिलेगा।' दिव्या भारती को चोट लगी, तो रोक दी थी शूटिंग पहलाज निहलानी ने दिव्या भारती के साथ फिल्म शोला और शबनम की थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने दिव्या भारती के डेडिकेशन से जुड़ा किस्सा शेयर किया और बताया कि कैसे उन्हें दिव्या भारती की चोट के चलते एक्ट्रेस के इनकार के बावजूद शूटिंग रोकनी पड़ी थी। पहलाज निहलानी ने कहा था, 'शोला और शबनम' के दौरान हम 20 घंटे शूटिंग करते थे। हम सुबह से शूटिंग शुरू करते थे और उसके बाद बैक टू बैक सीन, फिर डांस और फिर दूसरे सीन शूट होते थे। एक दिन मुझे याद है हम ऊटी में शूट कर रहे थे और दिव्या का पैर एक कील पर पड़ गया। उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया।' ‘मैं मॉनिटर के पास खड़ा था जब दिव्या शूट के लिए वापस आईं। उन्होंने किसी को पता नहीं चलने दिया कि उन्हें चोट लगी है। मैं भी नहीं समझ पाया फिर उन्होंने मुझसे रुमाल मांगा और अपने पैर में हुए जख्म पर बांध लिया। मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ तो वो कुछ नहीं बोलीं लेकिन मैंने उनके पैर से खून बहता देखा तो फिर तुरंत पैक अप करवा दिया।’ पहलाज निहलानी ने दिव्या भारती को फिल्म 'शोला और शबनम' (1992) में गोविंदा के साथ मुख्य अभिनेत्री के रूप में कास्ट किया था। इनकार के बावजूद जबरदस्ती सेट पर पहुंची थीं दिव्या भारती आगे उन्होंने कहा था, 'पैकअप के बावजूद वो शूटिंग करने पर अड़ी रहीं, उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। मैंने फाइनल पैक अप किया और प्रोडक्शन वालों को इन्फॉर्म कर दिया कि अगले दिन शूटिंग नहीं होगी लेकिन दिव्या नहीं मानीं। मैंने उनकी मां को कह दिया था कि अगले दिन दिव्या को शूटिंग पर ना भेजें ताकि वो रेस्ट कर सकें। लेकिन सुबह छह बजे, दिव्या सेट पर आ गईं और हाउस-कीपिंग से चाबी लेकर मेरे पास पहुंचीं और कहा, 'चलो उठो, आप अब तक सो क्यों रहे हो'? वो अपनी वजह से शूट कैंसिल नहीं करना चाहती थीं और फिर वो शूटिंग करके ही मानीं। उनके साथ मेरी कई बेहतरीन यादें हैं।' रीटेक से झल्ला उठे धर्मेंद्र, पहलाज से कहा था- क्या मैं न्यूकमर हूं 1987 की धर्मेंद्र स्टारर फिल्म आग ही आग को पहलाज निहलानी ने प्रोड्यूस किया था, जबकि इसके डायरेक्टर शिबू मित्रा थे। शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र को एक सीन के लिए 15 रीटेक देने पड़े, जिससे वो चिढ़ गए और डायरेक्टर को खूब खरी खोटी सुनाई। इस फिल्म में उनके साथ शत्रुघ्न सिन्हा, नीलम कोठारी, चंकी पांडे और गुलशन ग्रोवर समेत कई एक्टर नजर आए थे। डायरेक्टर को सुनाने के बाद धर्मेंद्र ने सेट पर सबके सामने गुस्से में पहलाज निहलानी से कहा था- ‘पहलाज, क्या मैं कोई न्यूकमर हूं, जो मुझसे टेक पर टेक करवा रहे हो।’ पहलाज निहलानी और धर्मेंद्र की पुरानी तस्वीर। 2015-17 तक CBFC के चीफ रहे, कई आरोप लगे पहलाज निहलानी 2015 से 2017 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के चीफ रहे हैं। कई लोगों ने उन पर फिल्मों से हिंसक और इंटिमेट सीन बेवजह छोटे करने के आरोप लगाए थे और इसके चलते उनका कार्यकाल विवादित रहा था। जेम्स बॉन्ड सीरीज की फिल्म 'स्पेक्टर' से किसिंग सीन को छोटा कराने पर उनकी आलोचना हुई थी। निहलानी ने शाहिद कपूर स्टार 'उड़ता पंजाब' में कथित तौर पर 69 कट लगाने के लिए कहा था, जो काफी चर्चा में रहा था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBFC के फैसले को गलत बताया और फिल्म सिर्फ एक कट के साथ रिलीज हुई थी। 2017 में सरकार ने उन्हें हटाकर गीतकार प्रसून जोशी को CBFC का नया चेयरमैन बनाया था। मूवी टिकट पर GST लगने पर कहा- इंडस्ट्री बुरे दौर से गुजर रही है वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2 साल पहले मूवी टिकट पर 12-18 प्रतिशत GST लगाया था। इस पर दैनिक भास्कर से बातचीत में पहलाज निहलानी ने कहा था, बहुत से देशों में एंटरटेनमेंट पर टैक्स नहीं है इसलिए GST को इंडिया में भी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से पूरी तरह हटाना चाहिए। सरकार को ये सोचना चाहिए कि अपने कल्चर और भाषा को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा फिल्में बनाने की कोशिशों को बढ़ावा दिया जाए। मौजूदा समय में जिस तरह का बिजनेस आ रहा है, उसकी वजह से अच्छे विषयों पर फिल्में नहीं बन पा रही हैं और पैसे कमाने के लिए हल्के विषयों और वल्गर कंटेंट पर फिल्में बनने की मजबूरी हो गई है। निहलानी ने आगे कहा था, फिल्में कॉमन मैन के लिए बनती हैं। छोटे से छोटा मजदूर भी जो है पिक्चर देखता है अगर जो फिल्म टिकट सस्ती हो जाए और इस पर टैक्स न लगे तो इससे सिंगल स्क्रीन सिनेमा को बूस्ट अप मिलेगा।
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