2026 में अब तक टेक सेक्टर में गईं 1 लाख से ज्यादा नौकरियां, सिर्फ मई में करीब 29,000 कर्मचारियों की हुई छंटनी: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में प्रौद्योगिकी (टेक) सेक्टर में 1 लाख से अधिक नौकरियां खत्म हो चुकी हैं। इनमें से केवल मई महीने में ही करीब 28,900 कर्मचारियों की छंटनी की गई है।
लेऑफ डॉट एफवाईआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्ष अब तक कुल 1,16,739 टेक कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है। रिपोर्ट में बताया गया कि मई 2025 में केवल 10,577 नौकरियों में कटौती की घोषणा हुई थी, जबकि इस साल मई में यह संख्या बढ़कर 28,889 हो गई, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
हालांकि, इस साल अब तक छंटनी के लिहाज से मार्च सबसे खराब महीना रहा। मार्च में 46,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया।
रिपोर्ट के अनुसार, उबर, मेटा, क्लाउडफ्लेयर, इंट्यूट, पेपाल, सिस्को, क्वोरा और कॉइनबेस जैसी बड़ी कंपनियों ने बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की।
उबर ने खुलासा किया कि उसकी पीपल एंड प्लेसेस डिवीजन में 23 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती की गई। हालांकि, यह कंपनी के लगभग 34,000 कर्मचारियों वाले वैश्विक कार्यबल का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है।
उबर की पीपल एंड प्लेसेस डिवीजन मानव संसाधन, भर्ती, कार्यस्थल सुविधाओं और कंपनी संस्कृति से जुड़े कार्यों का प्रबंधन करती है।
इसके अलावा, मेटा ने घोषणा की कि वह अपने वैश्विक कर्मचारियों की संख्या में 10 प्रतिशत कटौती कर रही है। साथ ही करीब 7,000 कर्मचारियों को एआई-आधारित भूमिकाओं में स्थानांतरित किया जा रहा है।
वहीं, कई रिपोर्टों के अनुसार, पेपाल ने मई में अगले दो से तीन वर्षों के दौरान अपने लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों यानी करीब 4,760 पदों को समाप्त करने की योजना की घोषणा की। कंपनी का उद्देश्य लागत कम करना और एआई को तेजी से अपनाना है।
अमेरिका की प्रौद्योगिकी कंपनी सिस्को ने मई की शुरुआत में अपने वैश्विक कार्यबल के लगभग 5 प्रतिशत यानी 4,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की। कंपनी यह निवेश एआई, साइबर सुरक्षा और अन्य उभरते क्षेत्रों में करना चाहती है।
वहीं, अमेरिका की सॉफ्टवेयर कंपनी क्लिकअप ने भी परिचालन पुनर्गठन के तहत मई में अपने कर्मचारियों की संख्या में 22 प्रतिशत की कटौती की। कंपनी का लक्ष्य एआई-आधारित भूमिकाओं के जरिए उत्पादकता को 100 गुना तक बढ़ाना है।
तकनीकी उद्योग के कई विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर-आधारित अधिकांश श्वेतपोश (व्हाइट-कॉलर) नौकरियां अगले 12 से 18 महीनों में स्वचालित हो सकती हैं।
हालांकि, एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म नहीं कर रहा है, बल्कि काम करने के तरीके को बदल रहा है। इससे उत्पादकता बढ़ रही है और ऐसे कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है जिनके पास तकनीकी और व्यावसायिक दोनों तरह के कौशल मौजूद हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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फर्जी यौन उत्पीड़न केस में बढ़ीं शिल्पा शिंदे की मुश्किलें, AICWA ने CM देवेंद्र फडणवीस से की सख्त कार्रवाई की मांग
Shilpa Shinde Controversy: टेलीविजन के फेमस शो 'भाभी जी घर पर हैं' (Bhabiji Ghar Par Hai) से घर-घर में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे (Shilpa Shinde) बड़ी मुश्किलों में फंस गई हैं. हाल ही में एक्ट्रेस ने एक बड़ा खुलासा किया था, उनके इस बयान के बाद पूरी टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बहस छिड़ गई. एक्ट्रेस ने खुलासा किया था कि उन्होंने सालों पहले शो के प्रोड्यूसर संजय कोहली (Sanjay Kohli) के खिलाफ दर्ज कराया गया झूठा हैरेसमेंट का केस कराया था. इस बयान के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया. अब फिल्म और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े संगठन ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन यानी (AICWA ) ने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है.
शिल्पा शिंदे के बयान के बाद मचा बवाल
दरअसल, शिल्पा शिंदे ने हाल ही में एक पॉडकास्ट किया था. जिसमें उन्होंने कहा खुलासा किया था कि उन्होंने 'भाभी जी घर पर हैं' के प्रोड्यूसर संजय कोहली के खिलाफ झूठा हैरेसमेंट का केस दर्ज कराया था. उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस शुरू हो गई.
शिल्पा के इस कथित कुबूलनामे के बाद लोगों ने उन पर कई सवाल उठाए कि अगर आरोप झूठे थे, तो इससे न सिर्फ एक व्यक्ति की इमेज प्रभावित हुई, बल्कि ऐसे मामलों की गंभीरता पर भी असर पड़ सकता है. यही वजह है कि अब यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है.
AICWA ने जारी किया बयान
इस मामले को लेकर AICWA ने सोशल मीडिया पर एक लंबा बयान जारी किया. एसोसिएशन ने कहा कि किसी भी इंसान पर झूठा हैरेसमेंट का आरोप लगाना बेहद गंभीर मामला है और इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं.
संगठन ने अपने बयान में कहा कि ऐसे आरोप किसी व्यक्ति की इमेज, करियर, फैमिली लाइफ और मेंटल हेल्थ को गहरा नुकसान पहुंचा सकते हैं. AICWA का मानना है कि यदि कोई आरोप झूठा साबित होता है, तो उसका प्रभाव सिर्फ आरोप लगाने वाले इंसान तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसकी फैमिली और करीबी लोगों को पर भी इसका असर पड़ता है.
संगठन ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से सच्चे मामलों पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि लोगों के मन में असली शिकायतों को लेकर भी शक पैदा होने लगता है.
सीएम देवेंद्र फडणवीस से की कार्रवाई की मांग
AICWA ने अपने बयान में महाराष्ट्र के सीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. संगठन का कहना है कि अगर जांच में यह साबित होता है कि आरोप जानबूझकर झूठे लगाए गए थे, तो इस संबंध में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए.
एसोसिएशन ने कहा कि जस्टिस सिस्टम का मकसद केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि इनोसेंट लोगों को झूठे आरोपों से बचाना भी है. इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच होना बहुत जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और कानून के मुताबिक फैसला लिया जा सके.
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टीवी के कई सितारों ने दिया रिएक्शन
शिल्पा शिंदे के इस बयान पर कई टीवी इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने रिएक्शन दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिना खान (Hina Khan) और पूजा बेदी (Pooja Bedi) समेत कई चर्चित लोगों ने इस मुद्दे अपनी राय रखी है. उन्होंने शिल्पा के बयान की आलोचना की है. उनका कहना है कि इस तरह कानून का फायदा नहीं उठाना चाहिए और इसके लिए कड़ी सजा होनी चाहिए.
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