Khan Sir Education: मशहूर टीचर खान सर खुद कितना पढ़े-लिखे हैं, कौन-कौन सी डिग्रियां हैं इनके पास? सब जानिए
Khan Sir Education : खान सर चर्चाओं में रहने की असली वजह यह है कि वे देश-दुनिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय लोकल भाषा और उदाहरणों के द्वारा रखते हैं। खान सर राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। खान सर पहले सिर्फ ऑफलाइन पढ़ाते थे, लेकिन कोरोना आने के बाद कोचिंग सेंटर बंद हो गए
Rajasthan Jobs News: रिडको द्वारा विकसित IT पार्क को मिली मंजूरी, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार!
Rajasthan Jobs News: राजस्थान इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड की भूमि आवंटन एवं भूमि मूल्य निर्धारण नीति को स्वीकृति मिल चुकी है. जोधपुर और पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया में RIDCO द्वारा विकसित औद्योगिक टाउनशिप में अब भूखंड आवंटन, प्रबंधन और निस्तारण हो पाएगा. इस नीति के अंतगर्त प्रत्यक्ष आवंटन योजना और अन्य निवेशों को लिए भूखंड आवंटन की प्रक्रिया और ऑनलाइन नीलमाी की व्यवस्था आदि का भी प्रावधान है. NICDC द्वारा पेश किया गया मॉडल फ्रेमवर्क पर आधारित यह नीति राजस्थान की स्थानीय जरूरतों एवं निवेश को आकर्षित करता है.
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत हो रहा विकास
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत विकसित किए जा रहे 5 नोड में से एक नोड जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया भी है. यह जोधपुर से 22 किमी एवं पाली से 40 किमी की दूरी पर स्थित तहसील रोहट की भूमि पर रिडको द्वारा तैयार किया जा रहा है. यह क्षेत्र National Highway No. 62 एवं राज्य राजमार्ग 64 पर स्थित है. राष्ट्रीय राजमार्ग से इस क्षेत्र में गाड़ियों के आने-जाने के लिए NHAI ने अंडरपास का विकास किया है. लगभग 823 रुपए करोड़ की राशि से रोहट और मारवाड़ जंक्शन को जोड़ने वाली रेलवे लाइन की दोहरीकरण की योजना को रेलवे बोर्ड की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है.
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राज्य में रोजगार के नए अवसर
जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया के पहले चरण में विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्रों में जल्द ही भूखंड आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इस परियोजना के माध्यम से राजस्थान में निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए नए रोजगार अवसरों के सृजित होने की उम्मीद लगाई जा रही है.
370 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी हुआ था
JPMIA के पहले चरण में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए रिडको ने दिसंबर 2025 में 370 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी किया था, जिसके तहत विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं. इलाके में बिजली और जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए Vidyut Vitran Nigam Limited और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के माध्यम से डिपॉजिट के काम भी करवाएं जा रहे हैं. हालांकि, दोनों विभागों ने संबंधित परियोजनाओं पर भी काम करना शुरू कर दिया है.
निवेशकों को लुभाने का फुल प्लान
इस परियोजना के पहले चरण में लगभग 1186 एकड़ बिक्री योग्य औद्योगिक जमीन उपलब्ध कराई जाएगी. निवेशकों का ध्यान खींचने के लिए भूमि आवंटन नीति में कई खास प्रावधानों को शामिल किया गया है. शुरुआती निवेशकों को अग्रिम भुगतान पर रियायती दरों का लाभ मिलेगा, जबकि आगामी सालों में भूमि दरों में भी इंक्रीज होगा. इसके अलावा, निवेशकों को 11 त्रैमासिक ब्याजयुक्त किस्तों में भुगतान की सुविधा भी दी जाएगी.
Lease के नियम
नई नीति के तहत अधिकांश औद्योगिक भूखंड 99 सालों की lease पर आवंटित किए जाएंगे. वहीं, फ्लैटेड फैक्ट्री, प्लग-एंड-प्ले इकाइयों, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स जैसी विशेष परियोजनाओं के लिए भी 33 से 66 वर्षों तक की फ्लेक्सिबल लीज टर्म का प्रावधान है. साथ ही, लीज के रेनोवेशन की सुविधा भी दी जाएगी.
लॉजिस्टिक्स पार्क-वेयरहाउसिंग की सुविधा
प्रस्तावित नीति में आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, पूर्व-निर्मित औद्योगिक ढांचे, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग की सुविधा और आवासीय एवं सामाजिक अवसंरचना विकास से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजनाओं के तहत विभिन्न परियोजनाओं को विकसित करने की योजना बनाई गई है.
RIDCO, भारत सरकार के नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इम्प्लीमेंटेशन ट्रस्ट और रीको के संयुक्त उपक्रम कंपनी के रूप में कार्य कर रही है. इसका उद्देश्य राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम (NICDP) के तहत विश्वस्तरीय औद्योगिक टाउनशिप और आधारभूत बुनियादी ढांचे का विकास करना है. रीको के प्रबंध निदेशक एवं रिडको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश ओला के अनुसार, औद्योगिक भूखंडों का सीमांकन कार्य पूरा होते ही उनके आवंटन प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी. विकास के क्षेत्र में यह सेक्टर-विशेष जोन भी विकसित करेगा, जिससे उद्योगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र का समग्र विकास संभव होगा.
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