विश्व पर्यावरण दिवस: दिल्ली को 18 नमो ऑक्सीजन पार्क की सौगात, जनता से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का हिस्सा बनने की अपील
विश्व पर्यावरण दिवस पर आज पूरी दुनिया हरियाली को बचाने के सन्देश दे रही है, पर्यावरण को सुरक्षित रखने, पौधे लगाने की अपील कर रही है, पौधों से होने वाले लाभ की जानकारी शेयर कर रही है, भारत में भी ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, इसी क्रम में दिल्लीवासियों को आज 18 नमो ऑक्सीजन पार्क की सौगात मिली।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज दिल्ली में 18 नमो ऑक्सीजन पार्क का उद्घाटन किया, इसके साथ ही एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण की शुरुआत की। मुख्य कार्यक्रम का आयोजन शाहपुर गढ़ी में तैयार नमो ऑक्सीजन पार्क में किया गया, कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, दिल्ली सरकार के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वर्तमान समय में मानवता के सामने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी और भूमि क्षरण जैसी तीन बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है।
ऑक्सीजन पार्क बनेंगे शहर के ग्रीन लंग्स: यादव
केंद्रीय मंत्री ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को जनआंदोलन बताते हुए नागरिकों से केवल पौधे लगाने ही नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण का भी आह्वान किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में विकसित किए गए 18 नमो ऑक्सीजन पार्क शहर के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में कार्य करेंगे। ये पार्क वायु गुणवत्ता सुधारने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और नागरिकों को मनोरंजन एवं प्रकृति से जुड़ने का अवसर प्रदान करेंगे।
इस साल दिल्ली में 15 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा दिल्ली की हवा को साफ़ रखने वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे, उन्होंने कहा दिल्ली में 100 ऑक्सीजन पार्क बनाने की बात मैंने कही थी आज 18 पर काम शुरू हो गया है उन्होंने कहा 15 लाख पेड़ इस साल लगाने हैं इसके लिए पौध और जगह हम देंगे लेकिन पेड़ हम सब मिलकर लगायेंगे हर दिल्लीवासी पेड़ लगाएगा।
एक पेड़ मां के नाम अभियान से जुड़ने की अपील
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में जनता की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है और पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है। मैं सभी दिल्लीवासियों से आग्रह करती हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जुड़ें, एक पौधा लगाएं, उसकी देखभाल करें और ग्रीन दिल्ली मिशन का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा दिल्ली को डस्ट-फ्री रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
महू में फटी नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन, शहर में बाढ़ जैसे हालात, इंदौर की 50 टंकियों पर असर
महू में गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब जलूद से इंदौर को नर्मदा जल पहुंचाने वाली मुख्य पाइप लाइन अचानक फट गई। देखते ही देखते लाखों लीटर पानी तेज दबाव के साथ बाहर निकलने लगा और आसपास का पूरा इलाका जलमग्न हो गया। इस घटना का असर केवल महू तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंदौर शहर की जलापूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो गई। जानकारी के अनुसार इसी पाइप लाइन के माध्यम से इंदौर की करीब 80 पानी की टंकियों तक नर्मदा जल पहुंचाया जाता है, जिनमें से लगभग 50 टंकियों में पानी नहीं पहुंच सका।
सुबह के समय हुई इस तकनीकी खराबी ने नगर निगम और जल आपूर्ति विभाग की चिंता बढ़ा दी। अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू की। हालांकि पाइप लाइन से निकल रहे पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि कुछ ही मिनटों में कई इलाके पानी से भर गए और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
महू में पाइप लाइन फटने से सड़कें बनीं नदी, कई इलाकों में ठप हुआ आवागमन
घटना के बाद महू शहर के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। वन विभाग कार्यालय, छावनी परिषद क्षेत्र, सेंट्रल स्ट्रीट, ड्रीमलैंड, आरफियम और राज मोहल्ला सहित कई इलाकों में पानी भर गया। तेज बहाव के कारण सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं और लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। कुछ दोपहिया वाहन पानी के तेज बहाव में गिर गए, जबकि कई वाहन चालकों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने ड्रीमलैंड चौराहे से डीएसओआई चौराहे तक मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक टीमों को तैनात किया गया ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने पहली बार शहर के बीचों-बीच इतनी बड़ी मात्रा में पानी का बहाव देखा।
इस घटना ने एक बार फिर शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते दबाव और पुराने पाइप नेटवर्क की समय-समय पर तकनीकी जांच बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इंदौर जलापूर्ति पर बड़ा असर, करोड़ों का नुकसान और मरम्मत कार्य जारी
पाइप लाइन फटने का सीधा असर इंदौर की पेयजल व्यवस्था पर पड़ा है। करीब 50 पानी टंकियों तक नर्मदा जल नहीं पहुंच सका, जिससे कई इलाकों में जल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई। वहीं महू में निकले पानी ने गैरिसन मैदान को तालाब में बदल दिया। छावनी परिषद का गार्डन, एसबीआई बैंक परिसर और मालवा कॉम्प्लेक्स भी पानी में डूब गए।
बताया जा रहा है कि मालवा कॉम्प्लेक्स की 25 से 30 दुकानों को नुकसान पहुंचा है। इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में रखे उपकरण और कई कार्यालयों के कंप्यूटर भी पानी की चपेट में आ गए। स्थानीय व्यापारियों ने लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई है।
अधिकारियों के अनुसार करीब 10 साल पुरानी इस पाइप लाइन में वेल्डिंग की गई प्लेट निकलने के कारण यह हादसा हुआ। सूचना मिलते ही तकनीकी टीमों ने डी-वाटरिंग का काम शुरू किया और क्षतिग्रस्त हिस्से तक पहुंचने के बाद मरम्मत कार्य प्रारंभ किया गया। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सप्लाई को जल्द से जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है।
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