किसी ने लिया संन्यास तो कोई डगआउट में पिला रहा पानी, आज कहां हैं वो 11 खिलाड़ी, जिन्होंने अफगानिस्तान को पहले टेस्ट में याद दिलाई थी नानी
IND vs AFG: भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ 6 जून से न्यू चंडीगढ़ में एकमात्र टेस्ट खेलने उतरेगी. दोनों देशों के बीच यह महज दूसरा टेस्ट है. दिलचस्प बात यह है कि 2018 के ऐतिहासिक टेस्ट मैच की भारतीय प्लेइंग इलेवन आज पूरी तरह बदल चुकी है. उस टीम के 11 खिलाड़ियों में से 6 दिग्गज संन्यास ले चुके हैं, जबकि कई अन्य खिलाड़ी टीम से बाहर हैं. अब इस नए दौर में केवल केएल राहुल ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी बचे हैं, जो उस मैच का भी हिस्सा थे और इस बार भी मैदान पर धमाल मचाएंगे.
RBI के बाद बाजार का मूड बदला: सेंसेक्स डे हाई से 650 अंक टूटा, निफ्टी भी 23300 के करीब; जानिए क्यों फिसला मार्केट
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआत शानदार रही, लेकिन दोपहर तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। सुबह तेजी के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी ने अपने सारे शुरुआती फायदे गंवा दिए और लाल निशान में फिसल गए। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी जबकि बढ़ती महंगाई और धीमी आर्थिक वृद्धि के संकेतों ने भी बाजार का जोश ठंडा कर दिया।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 357.56 अंक यानी 0.48 फीसदी की बढ़त के साथ 74717.57 पर पहुंच गया था। वहीं, निफ्टी भी 99.8 अंक चढ़कर 23516.35 के स्तर तक पहुंचा। हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। दोपहर करीब 1:50 बजे सेंसेक्स 270.33 अंक टूटकर 74,089.68 पर आ गया, जबकि निफ्टी 102.85 अंक गिरकर 23,313.70 पर कारोबार करता दिखा। यानी दिन के उच्चतम स्तर से सेंसेक्स 650 अंकों से ज्यादा टूट गया।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ऊंचे स्तरों पर हुई मुनाफावसूली रही। पिछले कुछ सत्रों में बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी, ऐसे में निवेशकों ने बढ़त का फायदा उठाकर अपने मुनाफे को सुरक्षित करना बेहतर समझा। यही कारण रहा कि शुरुआती खरीदारी के बाद बिकवाली हावी हो गई।
इस बीच आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया, जो पहले 4.6 फीसदी था। केंद्रीय बैंक के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है। मई से अब तक पेट्रोल 7.4 फीसदी और डीजल 8.4 फीसदी महंगा हो चुका है। रिजर्व बैंक का मानना है कि इसका असर आने वाले महीनों में उपभोक्ता महंगाई पर भी दिखाई देगा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह भी कहा कि कमजोर मानसून और एल-नीनो की आशंका खाद्य महंगाई को बढ़ा सकती है। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
महंगाई के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि को लेकर भी भारतीय रिजर्व बैंक का रुख बाजार को पसंद नहीं आया। केंद्रीय बैंक ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया। यह फाइनेंशियल ईयर 2026 के अनुमानित 7.6 फीसदी विकास दर से भी कम है। इससे यह संकेत मिला कि आने वाले समय में अर्थव्यवस्था की रफ्तार कुछ धीमी रह सकती है।
वैश्विक संकेत भी बाजार के पक्ष में नहीं रहे। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स भी 1.3 फीसदी तक नीचे थे, जिसने निवेशकों की धारणा को और कमजोर किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल आर्थिक वृद्धि की बजाय महंगाई और रुपये की स्थिरता पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। हालांकि यह रणनीति लंबी अवधि में बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है, लेकिन निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
(प्रियंका कुमारी)
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