पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद के जवाब में भारत ने साफ कर दिया है कि सिंधु जल संधि (IWT) तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं कर देता। 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत के दृढ़ रुख को दोहराते हुए कहा कि देश को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य नीति का हथियार रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित करने जैसा कड़ा रणनीतिक कदम उठाया था। विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई यह ऐतिहासिक जल-बंटवारा संधि अब पाकिस्तान के आतंकवादी रवैये के कारण पूरी तरह गतिरोध की स्थिति में है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने दोहराया है कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के जवाब में सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी। परेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को सीमा पार से समर्थित आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। सवाल ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख की पुष्टि करते हुए कहा, "दुनिया जानती है कि सीमा पार आतंकवाद लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य नीति का एक हथियार रहा है। देश मंत्रालय ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि तब तक लागू रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को अपना समर्थन विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं कर देता। प्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को निलंबित कर दिया था, जिसमें कई नागरिक मारे गए थे और जिसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई राजनयिक और रणनीतिक कदम उठाए गए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में हुई यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है।
भारत और पाकिस्तान के बीच जल-बंटवारे के समझौते सिंधु जल संधि (IWT) पर 19 सितंबर, 1960 को हस्ताक्षर किए गए थे। सिंधु नदी प्रणाली में तीन पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास और सतलुज और उनकी सहायक नदियाँ) और तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम और चिनाब और उनकी सहायक नदियाँ) शामिल हैं। संधि के अनुसार, भारत सिंधु प्रणाली के कुल जल का लगभग 20% नियंत्रित करता है, जबकि पाकिस्तान को लगभग 80% मिलता रहा था। 23 अप्रैल को विदेश मंत्रालय (एमईए) ने प्रतिक्रिया में कई सख्त उपायों की घोषणा की, जिसमें सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करना भी शामिल है। दरअसल, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में सिंधु जल संधि हुई थी। इस संधि के तहत पाकिस्तान को 6 बेसिन नदियों में से 3 का पानी मिला। सिंधु, झेलम और चिनाब जबकि भारत को रावी, व्यास और सतलुज का पानी मिला। लेकिन अब जब भारत ने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने का फैसला किया तो सबसे पहला कदम सिंधु जल संधि को सस्पेंड करना। पाकिस्तान की 80 प्रतिशत खेती और 30 प्रतिशत पावर प्रोजेक्ट सिंधु जल पर टिके हैं। पानी रुकने पर पाकिस्तान की कमर टूट गई।
Continue reading on the app
रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने इस बड़े हॉल में बैठकर भारत और पीएम मोदी को लेकर जो बयान दिया है वो अपने आप में बहुत कुछ कहता है। यह बयान भले ही इस हॉल में दिया गया हो लेकिन इसकी आवाज अब पूरी दुनिया में गूंज रही है। भारत में कांग्रेस पार्टी और विपक्षी दल ये बयान सुनकर बेचैन हो जाएंगे। कुछ घंटों पहले ही राहुल गांधी ने कहा था कि भारत में एक बड़ी आर्थिक सुनामी आने वाली है। अब आप इसे संयोग ही कहिए कि रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने ही राहुल गांधी के दावों को मिट्टी में मिला दिया है। हॉल में बैठी दुनिया की बड़ी-बड़ी न्यूज़ एजेंसियां जिनमें भारत की पीटीआई भी शामिल थी। इन सभी को जवाब देते हुए पुतिन ने कहा कि यहां आए सभी लोगों को एक बात पता होनी चाहिए। वो बात यह है कि भारत इस वक्त दुनिया की लीडिंग इकॉनमीज में से एक है।
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा इकोनॉमिक ग्रोथ रेट दिखा रहा है। यह कोई अचानक से होने वाली बात नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की कड़ी मेहनत का नतीजा है। पुतिन ने आगे कहा कि इस वक्त दुनिया में सिर्फ चार टॉप देश हैं। इनमें चीन, अमेरिका, भारत और रूस शामिल हैं। पुतिन ने कहा कि हम चारों ने सभी यूरोपीय देशों और जापान तक को पीछे छोड़ दिया है। इसके बाद पुतिन ने कहा कि अमेरिका कुछ मामलों में भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। खासतौर पर रूस के मामले में। लेकिन अब सब यह समझ चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यानी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी पर दबाव बनाना दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है। पुतिन ने कहा कि पीएम मोदी पर दबाव डालने का कोई फायदा नहीं होगा। भारत हमारा एक रिलायबल पार्टनर है।
भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस समय प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि दर प्रदर्शित कर रहा है।’’ उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि रूस को भारत पर पश्चिमी देशों के उस दबाव का कोई नकारात्मक प्रभाव दिखाई नहीं दिया है, जिसके तहत नयी दिल्ली से रूस के साथ अपने संबंध सीमित करने को कहा जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसी रणनीतियां अंततः उल्टा असर डालेंगी। पुतिन ने कहा कि सभी को समझ आ गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक है। यह दबाव कहीं से भी आए, इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि हमें इसका कोई नकारात्मक परिणाम नहीं दिखा।’’ रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ पश्चिमी देशों में भारत-रूस संबंधों को लेकर असहजता बढ़ी है। अमेरिका लगातार भारत से रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने का आग्रह करता रहा है।
Continue reading on the app