Malviya Nagar Fire पर Mayor सख्त! तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
इसे भी पढ़ें: Malviya Nagar Hotel Fire: दिल्ली अग्निकांड में 17 विदेशियों समेत 21 की मौत, 8 की हालत नाजुक
इसे भी पढ़ें: Delhi Fire Tragedy: मौत का 'होटल', 6 कमरों की आड़ में चल रहा था 25 का खेल, 21 जिंदगियां खत्म
Explainer: दोस्ती में दरार या बदलती रणनीति? ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्तों पर क्यों उठ रहे सवाल
Explainer: मध्य पूर्व की राजनीति में अमेरिका और इजरायल की साझेदारी दशकों से सबसे मजबूत मानी जाती रही है. लेकिन हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बढ़ते तनाव ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई एक फोन बातचीत में ट्रंप ने नेतन्याहू पर तीखी नाराजगी जाहिर की. बताया जा रहा है कि ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री की नीतियों को लेकर कड़ा असंतोष व्यक्त किया और क्षेत्रीय हालात बिगाड़ने का आरोप लगाया.
यह घटना सिर्फ दो नेताओं की व्यक्तिगत असहमति नहीं है, बल्कि इसके पीछे मध्य पूर्व की बदलती भू-राजनीति, ईरान के साथ बातचीत, गाजा संकट और अमेरिका की नई रणनीतिक प्राथमिकताएं भी जुड़ी हुई हैं.
आखिर विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
तनाव की सबसे बड़ी वजह लेबनान और गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है. इजरायल लंबे समय से हिजबुल्लाह और अन्य ईरान समर्थित समूहों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है. हाल के महीनों में लेबनान सीमा पर हमलों की तीव्रता बढ़ी है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया.
दूसरी ओर, अमेरिका ईरान के साथ एक नए समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहा है. वाशिंगटन चाहता है कि क्षेत्र में युद्ध का विस्तार न हो और तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, सामान्य रूप से संचालित होता रहे. ऐसे में इजरायल की आक्रामक सैन्य कार्रवाई अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासों के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है.
क्या ट्रंप को लग रहा है कि नेतन्याहू अलग राह पर चल रहे हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच अब प्राथमिकताओं का अंतर साफ दिखाई देने लगा है. ट्रंप मध्य पूर्व में एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जिसमें युद्ध कम हो, आर्थिक स्थिरता बढ़े और अमेरिका की प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका सीमित रहे.
इसके विपरीत नेतन्याहू का मानना है कि ईरान और उसके समर्थित संगठनों पर लगातार दबाव बनाए रखना ही इजरायल की सुरक्षा की गारंटी है. यही रणनीतिक अंतर दोनों नेताओं के बीच तनाव का कारण बन रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप अब कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय समझौतों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि नेतन्याहू सैन्य दबाव को अधिक प्रभावी मानते हैं.
गाजा संकट ने क्यों बढ़ाई मुश्किलें?
गाजा में जारी संघर्ष भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की बड़ी वजह बन गया है. अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और कई पश्चिमी देश लगातार मानवीय संकट पर चिंता जता रहे हैं. खाद्य सामग्री, दवाइयों और राहत सहायता की कमी को लेकर इजरायल की आलोचना हो रही है.
अमेरिका पर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है कि वह अपने सबसे करीबी सहयोगी पर मानवीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाए. ट्रंप प्रशासन समझता है कि गाजा संकट की लंबी अवधि अमेरिका की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकती है.
क्या यह पहली बार है जब दोनों नेताओं में मतभेद हुआ है?
बिल्कुल नहीं। ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्ते हमेशा पूरी तरह सहज नहीं रहे हैं. ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान दोनों नेताओं के बीच घनिष्ठ संबंध दिखाई देते थे, लेकिन समय-समय पर मतभेद भी सामने आए.
विशेष रूप से क्षेत्रीय समझौतों, अरब देशों के साथ संबंधों और ईरान नीति को लेकर कई बार दृष्टिकोण अलग दिखाई दिया. हालांकि सार्वजनिक रूप से दोनों नेताओं ने अक्सर एक-दूसरे का समर्थन किया, लेकिन बंद कमरों में कई मुद्दों पर असहमति की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं.
इजरायल के भीतर नेतन्याहू पर कितना दबाव है?
इजरायल के अंदर भी प्रधानमंत्री नेतन्याहू को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है. न्यायिक सुधारों, युद्ध नीति और सुरक्षा रणनीति को लेकर विपक्ष तथा नागरिक समूहों ने कई बार बड़े प्रदर्शन किए हैं. आलोचकों का आरोप है कि सरकार युद्ध को लंबा खींच रही है, जबकि समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कठोर कदम आवश्यक हैं. इस राजनीतिक विभाजन ने नेतन्याहू की स्थिति को पहले से अधिक जटिल बना दिया है.
यदि अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में सार्वजनिक तौर पर तनाव दिखाई देता है तो इसका घरेलू राजनीतिक असर भी नेतन्याहू पर पड़ सकता है.
अमेरिका-इजरायल रिश्तों पर क्या पड़ेगा असर?
हालांकि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, रक्षा और खुफिया सहयोग बेहद मजबूत है, लेकिन वर्तमान घटनाक्रम यह संकेत देता है कि रिश्तों में नई चुनौतियां उभर रही हैं. अमेरिका अब मध्य पूर्व में अपने हितों को व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता के नजरिए से देख रहा है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के संबंध इतने गहरे हैं कि किसी एक विवाद से टूटने वाले नहीं हैं. लेकिन यह भी सच है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बढ़ती तल्खी भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकती है.
क्या भविष्य में बदलेंगे हालात?
आने वाले महीनों में अमेरिका-ईरान वार्ता, गाजा की स्थिति और लेबनान सीमा पर हालात इस रिश्ते की दिशा तय करेंगे. यदि क्षेत्रीय तनाव कम होता है तो दोनों नेताओं के बीच मतभेद भी कम हो सकते हैं. लेकिन अगर सैन्य कार्रवाई बढ़ती है और कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक दूरी और बढ़ सकती है.
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मध्य पूर्व की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां पुराने सहयोगी भी नई परिस्थितियों के अनुसार अपने हितों और रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं.
यह भी पढ़ें - Explainer: ममता के खिलाफ कौन बना 'शिंदे', क्या बंगाल में दोहराया जा रहा शिवसेना मॉडल? क्या करेगी दीदी



prabhasakshi
News Nation



















