रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई शहरों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इसमें 15 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। हमले में कई रिहायशी इमारतें तबाह हो गई और लोग मलबे में दब गए। मध्य यूक्रेन के दूनीप्रो शहर में राहतकर्मियों ने मलबे से 3 साल के एक बच्चे, उनकी मां और 8 साल के भाई के शव निकाले। नीप्रो में 12 और कीव में 6 लोगों की मौत हुई है। यूक्रेन ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पर हमला किया है। तस्वीरें इसकी जारी कर दी गई हैं और बताया गया है कि हम चुप नहीं बैठने वाले। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तनाव बढ़ता चला जा रहा है। अब यूक्रेन ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की ने पुष्टि भी की है कि यूक्रेनी ड्रोन ने सेंट पीटर्सबर्ग के स्थित क्रोशियन टाट के एक नौसेसिक अड्डे और तेल टर्मिनल को निशाना बनाया। इसकी तस्वीरें जारी कर दी गई और जेलस्की ने अपने संदेश में कहा है कि हमलों का लक्ष्य पूरी तरह से सैन्य प्रतिष्ठान थे। उन्होंने बताया कि क्रोनस्टार्ट द्वीप पर स्थित उन ससैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया जहां रूस के बाल्टिक बेड़े के तत्व तैनात थे। जहाज निर्माण और मरम्मत से जुड़ी प्रमुख सुविधाएं मौजूद थी। इसके अलावा यूक्रेनी सेना ने रूस के तांबोश क्षेत्र में स्थित एक औद्योगिक प्रतिष्ठान पर भी हमला किया है जो कथित रूप से हथियारों के उत्पादन में शामिल था।
यह क्षेत्र यूक्रेन से लगभग 600 कि.मी. दूर है। यूक्रेन ने जिस तरीके से इस हमले को अंजाम दिया, इससे रूस भड़का हुआ है। रूस ने साफ तौर पर यह कह दिया है कि जिस तरह से यह हमला हुआ है, उसे लेकर अब रूस की तरफ से तीव्र कारवाई जारी रहेगी। सिस्टम सिस्टम इनको मिनिस्टर खुदा यह हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के प्रमुख आर्थिक कार्यक्रम सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम की शुरुआत होने वाली थी। ऐसे में सेंट पीटर्सबर्ग पर हुआ ड्रोन हमला ना केवल सैन्य बल्कि प्रतीकात्मक रूप से और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यह इकोनॉमिक फोरम रूस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन द्वारा रूस के भीतर इतने अंदर जाकर हमला करना और तमाम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना बताता है कि अब युद्ध किस तरीके से बदलता चला जा रहा है और खतरा इस बात का भी बढ़ गया है कि यूक्रेन पर होने वाले हमले अब और भी ज्यादा भीषण होंगे।
रूस ने रातभर में 656 ड्रोन और 73 मिसाइलें दागीं। यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, एयर डिफेंस सिस्टम ने 602 ड्रोन और 40 मिसाइलों को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया, लेकिन कई मिसाइलें और ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। कीव, नीप्रो, पोल्टावा, खार्किव और जापोरिज्जिया प्रमुख निशाने रहे। कई इलाकों में रिहायशी भवनों, वाहनों और अन्य नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। राजधानी की रहने वाली इरीना सालिकोवा ने बताया कि वह अपनी तीन साल की बेटी के साथ पूरी रात बाथटब में छिपकर बैठी रहीं। विस्फोट की वजह से उनके घर की खिड़कियां टूट गईं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों से सैन्य सहायता की अपील की।
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जापान में एक सरकारी पैनल ने मंगलवार को नाबालिग सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित उपायों की सूची में सोशल मीडिया संचालकों की जिम्मेदारियों को मजबूत करने का आह्वान किया, जिसमें उन्हें सख्त आयु सत्यापन लागू करने और कुछ सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता शामिल है। क्योटो न्यूज़ के मुताबिक, संचार मंत्रालय के पैनल ने कहा कि अन्य देशों में देखे जाने वाले आयु-आधारित पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं हो सकते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण संचार उपकरण है। रिपोर्ट के मसौदे में युवाओं की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसी सेवाओं पर उनकी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उठाए गए उपायों पर प्रकाश डाला गया है। यह घटनाक्रम स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के व्यापक उपयोग के बीच आया है, जिससे इनके हानिकारक प्रभावों, जिनमें नाबालिगों का आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना भी शामिल है, को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
क्योटो न्यूज़ के अनुसार, मौजूदा उपाय ज्यादातर मोबाइल कंपनियों द्वारा हानिकारक वेबसाइटों तक पहुंच को रोकने के लिए फ़िल्टरिंग सेवाओं और घर पर माता-पिता की निगरानी तक ही सीमित रहे हैं। पिछले साल से, जापान का आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदाताओं की भूमिका बढ़ाने पर चर्चा कर रहा है। क्योटो न्यूज़ ने बताया कि देश की बाल एवं परिवार एजेंसी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर विशिष्ट उपायों का निर्धारण करेगी और यह भी देखेगी कि क्या कानूनी संशोधनों की आवश्यकता है। अंतिम रिपोर्ट गर्मियों तक प्रस्तुत होने की उम्मीद है। जापान उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने हाल ही में नाबालिगों के बीच सोशल मीडिया के उपयोग से संबंधित कानूनों का प्रस्ताव रखा है और उनमें से कई ने उन्हें लागू भी किया है।
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