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RBI की 3 दिवसीय एमपीसी बैठक आज से शुरू, महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर रहेगी नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे.

वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक परिदृश्य

जून की मौद्रिक नीति समीक्षा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इससे आर्थिक परिदृश्य और अधिक जटिल हो गया है.

हालांकि, अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई इस बार ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है, लेकिन वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए उसके बयान का रुख पहले की तुलना में अधिक सतर्क या सख्त हो सकता है.

ब्याज दरें स्थिर रखने की नीति और भविष्य के अनुमान

एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, निकट भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखने की नीति अपना सकता है, लेकिन समय के साथ कुछ सख्ती की संभावना भी बन सकती है.

उन्होंने कहा कि बाजार फिलहाल 2026 की चौथी तिमाही से लगभग दो बार ब्याज दरों में कटौती की संभावना देख रहा है, न कि किसी बड़े स्तर की सख्ती की.

भंडारी के मुताबिक, आरबीआई के संशोधित आर्थिक अनुमानों पर विशेष ध्यान रहेगा, खासकर इस बात पर कि वह ऊर्जा क्षेत्र में जारी झटकों का आकलन कैसे करता है और क्या वह कच्चे तेल की औसत कीमत का अपना अनुमान पहले के लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाता है या नहीं.

उन्होंने कहा कि यदि तेल की कीमतों का आधारभूत अनुमान बढ़ता है, तो महंगाई का अनुमान भी पहले के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर करीब 5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

मानसून, ईंधन की कीमतें और महंगाई का दबाव

वहीं, केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कम मानसून की आशंका और हाल में ईंधन की खुदरा कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि थोक महंगाई में वृद्धि का असर खुदरा महंगाई पर अपेक्षा से अधिक तेजी से पड़ सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल महंगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की वजह से हो रही है, न कि मांग बढ़ने के कारण.

कच्चे तेल की कीमतें और जीडीपी वृद्धि दर का आकलन

केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, बशर्ते कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहे.

हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच जाती हैं, तो आर्थिक वृद्धि दर घटकर लगभग 6 प्रतिशत रह सकती है.

रेपो दर में बदलाव नहीं और महंगाई जोखिम

एसबीआई रिसर्च का भी मानना है कि लगातार बने महंगाई जोखिम और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए आरबीआई रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करेगा.

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है. साथ ही, ईंधन कीमतों और वैश्विक झटकों के कारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई कई तिमाहियों तक 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है.

ये भी पढ़ें: 12 अरब डॉलर का सोना बेचने की अफवाहों पर आया RBI का जवाब, जानें क्या है पूरी सच्चाई

ब्रेंट क्रूड में नरमी और रुपए को मजबूती की उम्मीद

इसके आलावा, एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखने का अनुमान जताया है. ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई नरमी और बाहरी आर्थिक स्थिति में सुधार से आरबीआई को राहत मिली है.

ब्रोकरेज के अनुसार, यदि तेल की कीमतें और कम होती हैं तथा भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो इससे रुपए को मजबूती मिलेगी और आरबीआई को लंबे समय तक ब्याज दरें स्थिर रखने में मदद मिल सकती है.

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्कलेमर- हेडिंग, सबहेड और समरी को छोड़कर पूरी स्टोरी न्यूज एजेंसी IANS की है.

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'SBI फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड का 2027 में आ सकता है आईपीओ', सिटी इंडिया 2026 कॉन्फ्रेंस में बोले सीएस सेट्टी

SBI Funds Management Limited: देश के सबसे बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की फंड मैनेजमेंट कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एसबीआईएफएमएल) 2027 में एक्सचेंज में लिस्ट हो सकती है. यह जानकारी एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु (सीएस) सेट्टी ने बुधवार को सिटी इंडिया 2026 कॉन्फ्रेंस में दी.

कार्यक्रम के साइडलाइन में एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत करते हुए सेट्टी ने कहा कि एसबीआई अपनी एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसबीआईएफएमएल का आईपीओ लाने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए सेबी के पास पहले से ही ड्राफ्ट पेपर जमा कर दिए गए हैं.

सेट्टी ने आगे बताया, "एसबीआई एएमसी की लिस्टिंग कैलेंडर वर्ष 2027 में होने की उम्मीद है."

आईपीओ का अनुमानित आकार और रिकॉर्ड

एसबीआईएफएमएल का प्रस्तावित आईपीओ 13,000 करोड़ रुपए का होने की उम्मीद है. अगर यह इस साइज के साथ आता है तो भारत की एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा.

शेयर होल्डिंग और हिस्सेदारी बिक्री का ढांचा

यह पूरा प्रस्तावित आईपीओ ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) होने की उम्मीद है. इसमें करीब 20.37 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी, जो कि कुल शेयर होल्डिंग का करीब 10 प्रतिशत होने की उम्मीद है.

प्रस्तावित संरचना के तहत, एसबीआई कंपनी में लगभग 6.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहा है, जबकि ज्वाइंट वेंचर पार्टनर अमुंडी एसेट मैनेजमेंट लगभग 3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी.

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में वर्तमान में एसबीआई की 63 प्रतिशत और अमुंडी की 37 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

वैश्विक चुनौतियाँ और भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा

भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में अस्थिरता बढ़ने के बावजूद, सेट्टी ने भारत के दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टिकोण पर आशावादी रुख अपनाया.

उन्होंने कहा, "पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रही है," और साथ ही यह भी कहा कि हर साल व्यवसायों और निवेशकों के लिए नई चुनौतियां लेकर आता है.

हालांकि, उन्होंने निवेशकों से अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव के बजाय भारत की संरचनात्मक विकास गाथा पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया.

सेट्टी ने कहा, “सेंसेक्स को मत देखिए, भारत को एक दीर्घकालिक विकास की कहानी के रूप में देखिए.”

उन्होंने आगे कहा कि भारत अब पिछड़ी अर्थव्यवस्था नहीं रह गई है और तेजी से 21वीं सदी की एक निर्णायक विकास गाथा के रूप में उभर रहा है.

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एसबीआई की तीसरी सूचीबद्ध सहायक कंपनी

अगर प्रस्तावित लिस्टिंग सफल होती है, तो एसबीआईएफएमएल, एसबीआई कार्ड्स और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के बाद एसबीआई की तीसरी सूचीबद्ध सहायक कंपनी बन जाएगी.

--आईएएनएस

एबीएस

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Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी अब रनों के लिए तरसेंगे, ये है बड़ी वजह

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