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Ranveer Singh: 'डॉन 3' विवाद में रणवीर सिंह को बड़ी राहत, FWICE ने हटाया बैन

FWICE Withdraws Ban Against Ranveer Singh: बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और FWICE के बीच चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। रणवीर सिंह को बड़ी राहत देते हुए FWICE ने उनके खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव वापस ले लिया है। यह फैसला अभिनेता द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस और फिल्म इंडस्ट्री की कई संस्थाओं के हस्तक्षेप के बाद लिया गया।

FWICE ने वापस लिया फैसला
FWICE के अध्यक्ष ने बताया कि भारतीय मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA), प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (PGI) और सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को बैठकर बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे निर्माता, निर्देशक और अभिनेता किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करें।

'कोई जीता या हारा नहीं'
FWICE के अध्यक्ष ने साफ किया कि इस पूरे मामले में किसी की जीत या हार नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि FWICE का कानूनी विभाग रणवीर सिंह द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब देगा, लेकिन फिलहाल संगठन ने अपना नॉन-कोऑपरेशन निर्देश वापस लेने का फैसला किया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद मई में तब शुरू हुआ जब 'डॉन 3' के निर्माता-निर्देशक फरहान अख्तर और निर्माता रितेश सिधवानी ने रणवीर सिंह के फिल्म से अलग होने की शिकायत की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर सिंह ने कथित तौर पर फिल्म की शूटिंग शुरू होने से कुछ समय पहले प्रोजेक्ट छोड़ दिया था। इसके बाद मामला इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) तक पहुंचा और फिर FWICE ने इसमें हस्तक्षेप किया।

45 करोड़ के नुकसान का दावा
मेकर्स का दावा था कि 'डॉन 3' की प्री-प्रोडक्शन तैयारियों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। उनका कहना था कि अभिनेता के अचानक हटने से फिल्म को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। इसी शिकायत के आधार पर FWICE ने 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन निर्देश जारी किया था।

रणवीर ने भेजा लीगल नोटिस
FWICE के फैसले के बाद रणवीर सिंह ने संगठन को कानूनी नोटिस भेजा। हालांकि नोटिस में क्या मांग की गई है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई। रणवीर की कानूनी कार्रवाई के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया और अब FWICE ने अपना फैसला वापस ले लिया है।

अब क्या होगा आगे?
FWICE द्वारा नॉन-कोऑपरेशन निर्देश वापस लेने के बाद फिलहाल माहौल पहले से शांत नजर आ रहा है। हालांकि कानूनी नोटिस का मामला अभी भी जारी है और संगठन ने कहा है कि वह अपने कानूनी विभाग के जरिए इसका जवाब देगा। 

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Controversy: 'घूसखोर पंडत' विवाद पर मनोज बाजपेयी को मिली मौत की धमकी, बोले- 'मेरी 15 साल की बेटी तक को नहीं छोड़ा'

Manoj Bajpayee Controversy: बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडत' को लेकर हुए विवाद पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। फिल्म के टाइटल को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर विरोध देखने को मिला था, तो वहीं मनोज बाजपेयी को आलोचनाओं का सामना करा पड़ा। इस विवाद पर अभिनेता ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा दुख उन अभद्र टिप्पणियों और धमकियों से पहुंचा, जिनका सामना उनके परिवार को करना पड़ा।

मौत की धमकियां मिलीं
एक मीडिया से बातचीत में अभिनेता ने कहा कि आलोचना और असहमति लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा हैं, लेकिन किसी कलाकार या उसके परिवार को निशाना बनाना गलत है।

उन्होंने कहा, "मुझे जान से मारने की धमकी देना कैसे जायज है? मेरे परिवार को इस पूरे मामले में घसीटना और हर तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना कैसे जायज है? मेरे परिवार की क्या गलती है? मेरे परिवार में महिलाएं हैं जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं। आप क्या सोचते हैं कि उस महिला को नीचा दिखाना कितना जायज है जिसका फिल्म का नाम रखने में कोई हाथ नहीं है?" अभिनेता ने आगे सवाल किया, "एक अभिनेता के तौर पर इस फिल्म का हिस्सा होने के बावजूद आप मुझे जान से मारने की धमकी भेज रहे हैं? जान से मारने की धमकी? सिर्फ नाम के लिए? मतलब, सिर्फ नाम के लिए?"

'लोगों ने मेरी बेटी, पत्नी को बनाया निशाना'
उन्होंने आगे कहा, "हर जगह बॉट्स और ट्रोल्स हैं, और यह जानना बहुत मुश्किल है कि किसे गंभीरता से लिया जाए और किसे नहीं। इसलिए, मैं निराश था। मुझे सच में नहीं पता। मुझे अपने परिवार के सदस्यों के लिए बुरा लग रहा था, जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे मेरी 15 साल की बेटी के बारे में बात कर रहे थे। वे मेरी पत्नी के बारे में बात कर रहे थे।"

एक मीडिया से बातचीत के दौरान मनोज ने बताया कि फिल्म के नामकरण में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से टाइटल में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं पाया था।

'फिल्म का नाम तय करना अभिनेता का काम नहीं'
मनोज बाजपेयी ने कहा कि आमतौर पर किसी फिल्म का नाम तय करने की प्रक्रिया में कलाकारों को शामिल नहीं किया जाता। उनके मुताबिक, यदि निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म ने किसी नाम पर सहमति बनाई थी, तो उन्हें उसमें कोई समस्या नजर नहीं आई।

हालांकि, जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने टाइटल को लेकर आपत्ति जताई, तो निर्माताओं ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए नाम बदलने का फैसला किया। अभिनेता ने बताया कि अदालत में भी फिल्म की टीम टाइटल बदलने के लिए तैयार थी और कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह मामला सुलझ गया।

'यह किसी समुदाय नहीं, एक किरदार की कहानी है'
फिल्म के शीर्षक को लेकर फैली गलतफहमियों पर भी मनोज ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाया गया किरदार किसी पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म का मुख्य पात्र 'पंडित' नहीं बल्कि 'पंडत' नाम से जाना जाता है। यह उसका निकनेम है, जो उसे पुलिस विभाग में मिला है। कहानी में वह दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी है और शीर्षक उसी विशेष किरदार से जुड़ा हुआ है, न कि किसी जाति या समाज से।

विवाद सुलझा, जल्द रिलीज होगी फिल्म
फिल्म के नाम को लेकर उठा विवाद अब कानूनी प्रक्रिया के बाद सुलझ चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म जल्द ही नेटफ्लिक्स पर रिलीज की जाएगी।

कहानी एक दिल्ली पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपराध और भ्रष्टाचार से भरी व्यवस्था के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक दमदार और अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं।

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  Sports

Bengal सरकार के Security ऑडिट का असर, Sourav Ganguly की Z कैटेगरी सुरक्षा Y में डाउनग्रेड

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की प्रमुख हस्तियों को दी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की सुरक्षा में कमी कर दी है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। राज्य प्रशासन द्वारा सुरक्षा तैनाती का पुनर्मूल्यांकन करने और मौजूदा खतरे की आशंकाओं के अनुरूप सुरक्षा उपायों को समायोजित करने के व्यापक अभियान के तहत यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि समीक्षा में राजनेता, सार्वजनिक हस्तियां और अन्य व्यक्ति शामिल हैं जिन्हें पहले से ही उच्च सुरक्षा प्रदान की जा रही थी।
 

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गांगुली, जिन्हें पहले जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, अब वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त करेंगे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान में बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (सीएबी) के अध्यक्ष ने इस घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। यह ताजा कदम पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में सरकार परिवर्तन के मद्देनजर शुरू किए गए व्यापक सुरक्षा ऑडिट का हिस्सा है। अधिकारियों ने बताया कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जोखिम के आकलन के आधार पर की जाए, न कि आवधिक मूल्यांकन के बिना मौजूदा व्यवस्थाओं को जारी रखा जाए।

अधिकारियों के अनुसार, जेड श्रेणी की सुरक्षा में शामिल व्यक्तियों को आमतौर पर लगभग 35 कर्मी सुरक्षा प्रदान करते हैं और उन्हें एक पायलट वाहन भी उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही राज्य पुलिस कमान द्वारा समन्वित निगरानी भी की जाती है। इसके विपरीत, वाई श्रेणी की सुरक्षा में काफी कम कर्मी तैनात किए जाते हैं, जिनमें तीन से चार कर्मी और निकट सुरक्षा के लिए तैनात दो सशस्त्र अधिकारी शामिल होते हैं।
 

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अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया था कि सुरक्षा संसाधनों का आवंटन पूरी तरह से खतरे के आकलन के आधार पर ही होना चाहिए। इन निर्देशों के बाद, अधिकारियों ने विभिन्न श्रेणियों के कई व्यक्तियों को दी गई सुरक्षा की समीक्षा शुरू कर दी। सबसे पहले जांच के दायरे में आने वाले हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी का मामला था। सरकार ने तब संकेत दिया था कि सांसद के रूप में उन्हें मिलने वाली सुरक्षा के अतिरिक्त कोई भी सुरक्षा वापस ले ली जाएगी।
 
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Wed, 03 Jun 2026 15:28:18 +0530

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