Controversy: 'घूसखोर पंडत' विवाद पर मनोज बाजपेयी को मिली मौत की धमकी, बोले- 'मेरी 15 साल की बेटी तक को नहीं छोड़ा'
Manoj Bajpayee Controversy: बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडत' को लेकर हुए विवाद पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। फिल्म के टाइटल को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर विरोध देखने को मिला था, तो वहीं मनोज बाजपेयी को आलोचनाओं का सामना करा पड़ा। इस विवाद पर अभिनेता ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा दुख उन अभद्र टिप्पणियों और धमकियों से पहुंचा, जिनका सामना उनके परिवार को करना पड़ा।
मौत की धमकियां मिलीं
एक मीडिया से बातचीत में अभिनेता ने कहा कि आलोचना और असहमति लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा हैं, लेकिन किसी कलाकार या उसके परिवार को निशाना बनाना गलत है।
उन्होंने कहा, "मुझे जान से मारने की धमकी देना कैसे जायज है? मेरे परिवार को इस पूरे मामले में घसीटना और हर तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना कैसे जायज है? मेरे परिवार की क्या गलती है? मेरे परिवार में महिलाएं हैं जिनके बारे में आप बात कर रहे हैं। आप क्या सोचते हैं कि उस महिला को नीचा दिखाना कितना जायज है जिसका फिल्म का नाम रखने में कोई हाथ नहीं है?" अभिनेता ने आगे सवाल किया, "एक अभिनेता के तौर पर इस फिल्म का हिस्सा होने के बावजूद आप मुझे जान से मारने की धमकी भेज रहे हैं? जान से मारने की धमकी? सिर्फ नाम के लिए? मतलब, सिर्फ नाम के लिए?"
'लोगों ने मेरी बेटी, पत्नी को बनाया निशाना'
उन्होंने आगे कहा, "हर जगह बॉट्स और ट्रोल्स हैं, और यह जानना बहुत मुश्किल है कि किसे गंभीरता से लिया जाए और किसे नहीं। इसलिए, मैं निराश था। मुझे सच में नहीं पता। मुझे अपने परिवार के सदस्यों के लिए बुरा लग रहा था, जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे मेरी 15 साल की बेटी के बारे में बात कर रहे थे। वे मेरी पत्नी के बारे में बात कर रहे थे।"
एक मीडिया से बातचीत के दौरान मनोज ने बताया कि फिल्म के नामकरण में उनकी कोई भूमिका नहीं थी और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से टाइटल में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं पाया था।
'फिल्म का नाम तय करना अभिनेता का काम नहीं'
मनोज बाजपेयी ने कहा कि आमतौर पर किसी फिल्म का नाम तय करने की प्रक्रिया में कलाकारों को शामिल नहीं किया जाता। उनके मुताबिक, यदि निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म ने किसी नाम पर सहमति बनाई थी, तो उन्हें उसमें कोई समस्या नजर नहीं आई।
हालांकि, जब सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने टाइटल को लेकर आपत्ति जताई, तो निर्माताओं ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए नाम बदलने का फैसला किया। अभिनेता ने बताया कि अदालत में भी फिल्म की टीम टाइटल बदलने के लिए तैयार थी और कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह मामला सुलझ गया।
'यह किसी समुदाय नहीं, एक किरदार की कहानी है'
फिल्म के शीर्षक को लेकर फैली गलतफहमियों पर भी मनोज ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि फिल्म में दिखाया गया किरदार किसी पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म का मुख्य पात्र 'पंडित' नहीं बल्कि 'पंडत' नाम से जाना जाता है। यह उसका निकनेम है, जो उसे पुलिस विभाग में मिला है। कहानी में वह दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी है और शीर्षक उसी विशेष किरदार से जुड़ा हुआ है, न कि किसी जाति या समाज से।
विवाद सुलझा, जल्द रिलीज होगी फिल्म
फिल्म के नाम को लेकर उठा विवाद अब कानूनी प्रक्रिया के बाद सुलझ चुका है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म जल्द ही नेटफ्लिक्स पर रिलीज की जाएगी।
कहानी एक दिल्ली पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपराध और भ्रष्टाचार से भरी व्यवस्था के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक दमदार और अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं।
Ranveer Singh: करोड़ों की फीस छोड़ रणवीर सिंह ने खेला बड़ा दांव, 'धुरंधर' की 3000 करोड़ कमाई में ऐसे बने हिस्सेदार!
Ranveer Singh: रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ सफलता हासिल करते हुए 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया। फिल्म की इस कामयाबी के बीच को-प्रोड्यूसर ज्योति देशपांडे ने खुलासा किया है कि रणवीर ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारी फीस लेने के बजाय एक अलग रणनीति अपनाई थी।
कम फीस पर किया काम
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में ज्योति देशपांडे ने बताया कि रणवीर सिंह ने फिल्म के लिए कम फिक्स्ड फीस ली थी। इसके बजाय उन्होंने प्रॉफिट शेयरिंग यानी बैकएंड डील का विकल्प चुना। इस मॉडल में कलाकार को शुरुआत में बड़ी रकम नहीं दी जाती, बल्कि फिल्म की सफलता के बाद होने वाले मुनाफे में हिस्सा मिलता है।
क्या होती है बैकएंड डील?
बैकएंड डील या प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल में अभिनेता और निर्देशक कम एडवांस फीस लेते हैं। बदले में उन्हें फिल्म के मुनाफे का तय हिस्सा मिलता है। अगर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करती है तो कलाकारों की कमाई भी बढ़ जाती है। कई बड़े सितारे इसी मॉडल को अपनाते नजर आए हैं।
आदित्य धर ने भी अपनाया यही तरीका
ज्योति देशपांडे के मुताबिक, सिर्फ रणवीर सिंह ही नहीं बल्कि फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने भी इसी मॉडल पर काम किया था। दोनों ने फिल्म के साथ जुड़े जोखिम को साझा किया और बाद में फिल्म की सफलता का फायदा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आखिरकार फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया और इससे जुड़े सभी लोगों को अच्छा लाभ मिला।
बजट से दोगुना हुआ खर्च
प्रोड्यूसर ने बताया कि शुरुआत में 'धुरंधर' को एक ही फिल्म के रूप में बनाया जा रहा था। लेकिन शूटिंग के दौरान कहानी और फुटेज को देखते हुए इसे दो भागों में रिलीज करने का फैसला लिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म पर तय बजट से लगभग दोगुना खर्च हो गया था। हालांकि बाद में दो फिल्मों के रूप में रिलीज होने का फैसला सही साबित हुआ।
बॉक्स ऑफिस पर छाई 'धुरंधर'
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली फिल्म ने दुनियाभर में 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जबकि दूसरे भाग ने करीब 1800 करोड़ रुपये की कमाई की। दोनों फिल्मों का कुल कलेक्शन 3000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
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