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सावन में कभी 4 तो कभी 5 सोमवार क्यों? जानिए इसके पीछे का वैज्ञानिक और धार्मिक कारण
सावन का महीना आते ही शिव भक्तों के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है कि आखिर किसी साल सावन में 4 सोमवार होते हैं तो किसी साल 5। कई बार तो सोमवारों की संख्या और भी ज्यादा हो जाती है। साल 2026 में सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक रहेगा और इस दौरान कुल 4 सावन सोमवार पड़ेंगे। इसके पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि पंचांग और खगोलीय गणना का भी बड़ा योगदान है।
भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कांवड़ यात्रा से लेकर जलाभिषेक और सोमवार व्रत तक, पूरे महीने शिव भक्ति का माहौल बना रहता है। हालांकि हर साल सावन में सोमवारों की संख्या एक जैसी नहीं होती। इसका कारण अंग्रेजी कैलेंडर और हिंदू पंचांग के बीच का अंतर है, जो महीने की अवधि और उसमें आने वाले वारों को प्रभावित करता है।
सावन में सोमवार की संख्या क्यों बदलती है?
सावन में सोमवारों की संख्या बदलने का सबसे बड़ा कारण हिंदू पंचांग की गणना पद्धति है। जहां अंग्रेजी कैलेंडर सूर्य की गति पर आधारित होता है, वहीं हिंदू पंचांग चंद्रमा की चाल के अनुसार चलता है। इसी वजह से दोनों कैलेंडरों के महीनों की अवधि अलग-अलग होती है।
एक चंद्र मास औसतन 29.5 दिनों का माना जाता है, जबकि ग्रेगोरियन कैलेंडर में महीने 30 या 31 दिनों के होते हैं। चंद्रमा की गति में होने वाले बदलाव के कारण तिथियां कभी घटती हैं तो कभी बढ़ जाती हैं। कई बार कोई तिथि बहुत कम समय के लिए रहती है और उसका क्षय हो जाता है। इससे पूरे महीने की अवधि कम हो सकती है।
यदि सावन लगभग 29 से 30 दिनों के भीतर समाप्त हो जाता है, तो उसमें केवल 4 सोमवार पड़ते हैं। वहीं जब तिथियों की स्थिति ऐसी बनती है कि महीना थोड़ा लंबा हो जाता है, तब 5 सोमवार आने की संभावना बन जाती है। यही कारण है कि हर साल सावन सोमवारों की संख्या अलग-अलग दिखाई देती है।
खगोल विज्ञान के जानकारों के अनुसार चंद्रमा और सूर्य की गति में मौजूद अंतर को संतुलित करने के लिए समय-समय पर पंचांग में विशेष समायोजन भी किए जाते हैं। इसी वजह से हिंदू कैलेंडर की तिथियां हर साल कुछ अलग दिखाई देती हैं।
अधिकमास का सावन पर क्या असर पड़ता है?
कभी-कभी सावन के दौरान अधिकमास यानी अतिरिक्त महीना भी जुड़ जाता है। यह स्थिति तब बनती है जब सूर्य और चंद्र कैलेंडर के बीच का अंतर काफी बढ़ जाता है। उस अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है।
जब अधिकमास सावन के आसपास पड़ता है, तब सावन की अवधि सामान्य से काफी लंबी हो जाती है। ऐसे समय में सावन लगभग 59 से 60 दिनों तक चल सकता है। इस कारण सोमवारों की संख्या भी बढ़ जाती है। कुछ वर्षों में भक्तों ने 8 सावन सोमवार तक का दुर्लभ संयोग देखा है।
धार्मिक दृष्टि से अधिकमास को भी पूजा-पाठ, दान और भगवान की भक्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। यही वजह है कि जब सावन और अधिकमास का मेल होता है, तब शिव भक्तों के लिए पूजा-अर्चना का समय और लंबा हो जाता है।
सावन सोमवार 2026 की तारीखें
पहला सावन सोमवार – 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार – 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार – 17 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार – 24 अगस्त 2026
सावन सोमवार व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। सावन में इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किया गया पूजन जीवन में सकारात्मकता लाता है और मन को शांति प्रदान करता है।
कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से सावन सोमवार का व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए यह व्रत करती हैं। वहीं बड़ी संख्या में पुरुष भी भगवान शिव की कृपा पाने के लिए पूरे सावन में नियमित पूजा-अर्चना करते हैं।
चाहे सावन में 4 सोमवार पड़ें या 5, भक्तों के लिए इस पूरे महीने का हर दिन विशेष माना जाता है। यही कारण है कि सावन का इंतजार पूरे साल किया जाता है और शिव भक्त पूरी श्रद्धा के साथ महादेव की आराधना में जुट जाते हैं।
Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।
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