Stock Market Today: खुलते ही धड़ाम हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 550 अंक टूटा, निफ्टी में भारी गिरावट
Stock Market Today: शेयर बाजार में आज (बुधवार) को लगातार छठवें दिन जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है. बुधवार को शेयर बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया. इस दौरान सेंसेक्स 550 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा. जबकि निफ्टी50 भी 250 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया.
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'वो आज भी पीछा नहीं छोड़ता...’, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के कई सालों बाद रिया चक्रवर्ती ने बयां किया दर्द
Rhea Chakraborty on Sushant Singh Rajput Death: एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती ने दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के कई सालों बाद पहली बार खुलकर उस कठिन दौर के बारे में बात की है, जिसने उनकी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी को गहराई से प्रभावित किया. हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में रिया ने जेल में बिताए गए दिनों, मानसिक आघात, समाज के नजरिए और भविष्य में न्याय से वंचित लोगों की मदद करने की अपनी इच्छा पर डिटेल में चर्चा की.
गौरतलब है कि 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई स्थित बांद्रा फ्लैट में मृत पाए गए थे. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. मामले की जांच के दौरान रिया चक्रवर्ती का नाम भी चर्चा में आया और उन्हें गिरफ्तार किया गया. रिया को करीब 27 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन उस घटना का असर आज भी उनके जीवन में महसूस किया जा सकता है.
‘जेल में होना ही सबसे कठिन अनुभव था’
Variety India को दिए गए इंटरव्यू में रिया चक्रवर्ती ने जेल में बिताए गए समय को याद करते हुए कहा कि वो उनकी जिंदगी के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण दिनों में से एक था. रिया ने कहा कि जेल में रहने का सबसे मुश्किल हिस्सा सिर्फ जेल की चारदीवारी नहीं थी, बल्कि वो एहसास था कि समाज अब उन्हें एक इंसान के रूप में नहीं देख रहा था.
उन्होंने कहा, “जेल में होने का सबसे मुश्किल हिस्सा जेल में होना ही है. आप समाज का हिस्सा नहीं रह जाते. आप सिर्फ एक नंबर बनकर रह जाते हैं. आप कोई इंसान नहीं होते. आपको ऐसा महसूस कराया जाता है कि आप समाज के लिए उपयुक्त नहीं हैं. आपको इतना बुरा या दयनीय समझा जाता है कि आपको बाकी लोगों से अलग कर दिया जाता है. ये अनुभव आपके अहंकार और आत्मसम्मान को पूरी तरह तोड़ देता है. इसके बाद आप खुद से और अपनी जिंदगी से जुड़े कई सवाल पूछने लगते हैं.” रिया के मुताबिक, जेल का अनुभव सिर्फ शारीरिक कैद तक सीमित नहीं होता, बल्कि ये मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी व्यक्ति को गहराई से प्रभावित करता है.
आज भी पीछा नहीं छोड़ता ट्रॉमा
इंटरव्यू के दौरान रिया ने बताया कि उस दौर का मानसिक आघात आज भी उनके साथ मौजूद है. उन्होंने कहा कि समय के साथ इंसान दर्द के साथ जीना सीख जाता है, लेकिन वो पूरी तरह खत्म नहीं होता. रिया ने कहा, “ट्रॉमा आपका पीछा नहीं छोड़ता. आप बस उसके साथ जीना सीख जाते हैं. कई बार मैं उस दर्द को फिर से महसूस नहीं करना चाहती. अगर मैं उस अनुभव को दोबारा याद करती हूं तो सिर्फ इसलिए कि शायद उससे किसी और को मदद मिल सके.” उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि उस घटना के बाद समाज और लोगों की सोच पर उनका भरोसा काफी हद तक प्रभावित हुआ है. उनके अनुसार, कठिन समय में जिस तरह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया और आलोचना का सामना उन्हें करना पड़ा, उसने उनके नजरिए को बदल दिया.
2020 के बाद लगभग छोड़ दी डायरी लिखना
रिया चक्रवर्ती ने अपनी एक पुरानी आदत का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि वो हमेशा अपने साथ एक डायरी रखती थीं और नियमित रूप से अपने विचार, भावनाएं और अनुभव उसमें लिखती थीं. हालांकि, 2020 के बाद ये आदत लगभग खत्म हो गई. रिया ने कहा, “मैं 2020 के बाद से बहुत कम लिख पाई हूं. मुझे लगता है कि मुझे लिखने से डर लगने लगा है. पता नहीं लिखते समय मेरे भीतर से क्या बाहर आ जाएगा. शायद मैं अभी भी उन भावनाओं का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हूं.” उनके मुताबिक, लिखना हमेशा उनके लिए खुद को समझने और भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वो इससे दूर हो गई हैं क्योंकि कई यादें अब भी दर्द देती हैं.
जेल में देखीं कई बेगुनाह महिलाओं की परेशानियां
रिया ने इंटरव्यू में जेल के दौरान मिले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां उन्होंने कई ऐसी महिलाओं को देखा, जो लंबे समय से कानूनी प्रक्रियाओं में फंसी हुई थीं. इनमें से कई महिलाएं ऐसी थीं, जिन्हें पर्याप्त कानूनी सहायता नहीं मिल पा रही थी क्योंकि उनके पास आर्थिक संसाधनों की कमी थी. रिया ने कहा कि इन अनुभवों ने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया और उन्हें महसूस कराया कि न्याय व्यवस्था तक पहुंच हर व्यक्ति के लिए समान नहीं है.
उन्होंने कहा, “पिछले पांच सालों में मैंने सबसे पहले खुद को संभालने और ठीक करने की कोशिश की है. जब तक मैं अपनी मदद नहीं कर लेती, तब तक किसी और की मदद नहीं कर सकती थी. लेकिन अब मैं उम्मीद करती हूं कि भविष्य में मैं उन लोगों की आवाज बन सकूं, जो कानूनी सहायता का खर्च नहीं उठा सकते और जिन्हें न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.” रिया का कहना है कि वह विशेष रूप से अंडरट्रायल कैदियों और उन महिलाओं की मदद करना चाहती हैं, जिन्हें कानूनी सहायता की जरूरत है लेकिन संसाधनों के अभाव में वे संघर्ष कर रही हैं.
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