भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन का कांग्रेस पर तीखा हमला, तेलंगाना को बताया पार्टी का ATM, पेश किए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के आंकड़े
तेलंगाना स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के शासन में तेलंगाना राज्य पार्टी का एटीएम बन गया है, जहां से पार्टी का खजाना भरा जा रहा है। नबीन ने स्पष्ट रूप से कहा कि तेलंगाना के लोगों ने एक लंबे संघर्ष के बाद अलग राज्य हासिल किया था, लेकिन उनके सपने और उम्मीदें आज भी पूरी नहीं हुई हैं। भाजपा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में तेलंगाना की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
नितिन नबीन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग तेलंगाना को एटीएम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मानना है कि तेलंगाना के लोगों के खून-पसीने की कमाई से सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी का खजाना भरा जा रहा है। उन्होंने इस दौरान पिछली बीआरएस सरकार और वर्तमान कांग्रेस सरकार दोनों पर निशाना साधा। नबीन ने कहा कि एक भ्रष्ट शासन के जाते ही दूसरे ने उसकी जगह ले ली है, जिससे राज्य की जनता को कोई खास राहत नहीं मिली है। भाजपा अध्यक्ष ने इस अवसर पर संकल्प लिया कि भाजपा तेलंगाना की प्रगति और वहां के लोगों के हक के लिए अपना संघर्ष लगातार जारी रखेगी।
जून 2014 में आंध्र प्रदेश से होकर नया राज्य बना तेलंगाना
गौरतलब है कि जून 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना एक नया राज्य बना था। उस समय केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार सत्ता में थी। के चंद्रशेखर राव राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे। वर्तमान में मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में वहां कांग्रेस की सरकार सत्तासीन है। नितिन नबीन ने अलग राज्य के संघर्ष में शामिल सभी लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने शुरू से ही अलग तेलंगाना की मांग का समर्थन किया था। नबीन ने उन सभी शहीदों को नमन किया जिन्होंने इस उद्देश्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहीदों के संघर्ष के सम्मान में तेलंगाना को उनके सपनों का राज्य बनाना ही होगा। नबीन ने स्वीकार किया कि शायद हम अभी उस विजन को पूरी तरह हासिल करने में पीछे हैं, लेकिन भाजपा इसके विकास के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी और जनहित के मुद्दों को उठाती रहेगी।
नितिन नबीन ने पेश किए केंद्र की विभिन्न योजनाओं के आंकड़े
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने केंद्र सरकार द्वारा तेलंगाना के विकास के लिए किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों से तेलंगाना के विकास के लिए लगातार काम हो रहा है। नबीन ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने जानकारी दी कि पीएम-किसान योजना से राज्य के 3.1 लाख से ज्यादा किसानों को सीधा फायदा मिला है। इसके अतिरिक्त, 7.5 लाख से ज्यादा लोगों को मुद्रा लोन के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 12.7 लाख जन धन खाते तेलंगाना में खोले गए हैं, जिससे वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा रेलवे, सड़क और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ती रहेगी ताकि तेलंगाना के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके। उन्होंने तेलंगाना के उज्ज्वल भविष्य के लिए भाजपा की कटिबद्धता दोहराई।
दमोह: संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल का दिखा असर, अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, मरीज बेहाल
मध्य प्रदेश में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने पहले ही दिन से स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों की तरह दमोह में भी आज सुबह से स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर हैं, जिसका सीधा खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। चंद घंटों के भीतर ही अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं, और आम जनमानस की परेशानी बढ़ गई है।
दमोह जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और यहां तक कि पोषण आहार केंद्रों के कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल हैं। रोजाना मरीजों को मिलने वाली आवश्यक सेवाओं को प्रदान करने वाले इन कर्मचारियों की कमी अब अस्पतालों में स्पष्ट रूप से अखरने लगी है। जिला अस्पताल दमोह के साथ-साथ विभिन्न विकासखंडों में संचालित सिविल अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिक्स में भी डॉक्टरों व स्टाफ का भारी टोटा देखा जा रहा है। जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
अस्पताल में स्टाफ की संख्या में कमी
स्थिति यह है कि ग्रामीण अंचलों में बने संजीवनी क्लीनिक्स तो पूरी तरह से स्टाफ विहीन हो गए हैं। यहां कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं होने के कारण मरीजों को मजबूरन जिला अस्पताल की ओर रुख करना पड़ रहा है। लेकिन जिला अस्पताल में भी संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल की वजह से स्टाफ की संख्या कम हो गई है। नतीजतन, दिनभर मरीज अपनी बीमारियों का इलाज कराने के लिए यहां-वहां भटकते नजर आए, उन्हें पर्याप्त और समय पर चिकित्सा सेवा नहीं मिल पाई। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक में मरीजों की भीड़ और अव्यवस्था का आलम देखा गया।
हालांकि, इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने कुछ कदम उठाए हैं। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन की मानें तो मरीजों की परेशानी कम करने के उद्देश्य से नियमित स्टाफ की ड्यूटी का समय बढ़ा दिया गया है। डॉक्टरों के साथ-साथ अन्य नियमित स्टाफ भी अतिरिक्त ड्यूटी कर रहा है, ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। लेकिन यह एक अस्थायी समाधान ही प्रतीत होता है।
हड़ताल के पहले दिन ही अस्पतालों पर बढ़ा काम का दबाव
जिला अस्पताल के आरएमओ का कहना है कि आज हड़ताल का पहला दिन है, और पहले ही दिन से कार्यभार काफी बढ़ गया है। यदि यह हड़ताल लंबी खिंचती है, तो मौजूदा व्यवस्थाओं के दम पर स्थिति को बनाए रख पाना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने भविष्य में और अधिक गंभीर चुनौतियों की आशंका व्यक्त की है।
दूसरी ओर, हड़ताल पर बैठे संविदा कर्मियों का अपना दर्द है। उनका कहना है कि वे स्वेच्छा से काम बंद नहीं करना चाहते हैं। बल्कि, अपने भविष्य को सुरक्षित करने और अपनी मांगों को मनवाने के लिए उन्हें मजबूरन यह रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उनकी यह हड़ताल कब तक चलेगी और इसका अंत कैसे होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसका असर आने वाले दिनों में और गहराने की आशंका है। स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला यह प्रतिकूल प्रभाव आम जनता के लिए चिंता का विषय बन गया है।
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