तरबूज खरीदने से पहले जान लें ये 5 संकेत! एक थपकी बताएगी मीठा है या केमिकल वाला
गर्मी बढ़ते ही बाजारों में तरबूज की मांग तेज हो जाती है. तेज धूप और लू के बीच यह फल शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ पानी की कमी भी पूरी करता है. लेकिन हर लाल दिखने वाला तरबूज मीठा और सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है. कई बार लोग दिखने में अच्छे तरबूज खरीद लेते हैं, लेकिन घर पहुंचने पर उसका स्वाद फीका निकलता है या फिर उसमें केमिकल से पकाने की आशंका सामने आती है.फल विक्रेताओं और किसानों के अनुसार मीठे तरबूज की पहचान कुछ आसान तरीकों से की जा सकती है. तरबूज के नीचे बना क्रीमी पीला धब्बा इस बात का संकेत माना जाता है कि फल खेत में अच्छी तरह पक चुका है. वहीं हल्के से थपथपाने पर यदि गहरी और खोखली आवाज सुनाई दे तो वह रसदार और मीठा हो सकता है. इसके अलावा आकार के मुकाबले अधिक भारी महसूस होने वाला तरबूज आमतौर पर ज्यादा पानी और मिठास वाला माना जाता है.विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मिठास ही नहीं, बल्कि फल की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. कई बार अधिक वजन और ज्यादा मिठास दिखाने के लिए कुछ लोग केमिकल, सैक्रीन या इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इसलिए तरबूज खरीदते समय उसके बाहरी हिस्से पर किसी संदिग्ध निशान या छेद की जांच जरूर करनी चाहिए. साथ ही काटने के बाद यदि उसमें असामान्य या केमिकल जैसी गंध महसूस हो तो उसका सेवन करने से बचना चाहिए. गर्मियों में सही तरबूज चुनने के ये आसान तरीके आपकी सेहत और स्वाद दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं.
48°C की तपिश, बंद पंखे और पसीने से भरे डिब्बे... बीकानेर से नापासर तक ट्रेन का 40 मिनट का सफर बना अग्निपरीक्षा
राजस्थान की भीषण गर्मी का असर सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, अब रेल यात्राओं में भी साफ दिखाई देने लगा है. बीकानेर से नापासर तक करीब 30 किलोमीटर का सफर इन दिनों यात्रियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. दोपहर की झुलसा देने वाली गर्मी में जब ट्रेन बीकानेर स्टेशन से रवाना हुई, तब बाहर तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के करीब था और गर्म हवाएं लोगों का जीना मुश्किल कर रही थीं.सिर्फ 40 मिनट की इस यात्रा में जनरल डिब्बों का हाल ऐसा था कि यात्री पसीने से पूरी तरह तरबतर नजर आए. कई पंखे बंद पड़े थे और जो चल रहे थे, वे भी राहत देने के बजाय गर्म हवा फेंक रहे थे. कोई अखबार से हवा करता दिखा, कोई गमछे से चेहरा ढककर बैठा रहा, तो कई यात्री बार-बार पानी पीकर खुद को संभालने की कोशिश करते नजर आए. छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह सफर सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण दिखाई दिया.बीकानेर रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की मुश्किलें कम नहीं थीं. ट्रेन प्लेटफॉर्म के टीन शेड से काफी आगे जाकर रुकी, जिससे लोगों को तपती धूप में लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ी. सफर के दौरान हर स्टेशन पर लोग पानी भरते, कोल्ड ड्रिंक खरीदते और गर्मी से राहत पाने के लिए हर संभव जतन करते दिखाई दिए. यह यात्रा सिर्फ एक रेल सफर नहीं, बल्कि राजस्थान की भीषण गर्मी के बीच आम लोगों के संघर्ष की एक सच्ची तस्वीर बनकर सामने आई है.
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