Portable AC या 1 Ton Split AC? जानें किराए के घर के लिए कौन सा रहेगा सही
Portable AC और 1 टन Split AC दोनों छोटे कमरों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन कूलिंग, बिजली खपत, आवाज और कीमत के मामले में दोनों में बड़ा अंतर होता है. जानिए यहां दोनों में से कौन सा बेहतर है.
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रेलवे कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नौकरी बदली तो भी नहीं मिटेगी पुरानी सेवा का हक
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे कर्मचारियों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है, जिसे सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अदालत ने साफ कहा कि भारतीय रेलवे में काम करने वाले कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी माने जाएंगे. यह मामला एक ऐसे कर्मचारी से जुड़ा था, जिसने पहले रेलवे में नौकरी की और बाद में दूसरी सरकारी संस्था में काम शुरू किया, लेकिन उसकी पुरानी सेवा को लेकर विवाद खड़ा हो गया.
जानिए क्या है पूरा मामला
मामला केरल के रहने वाले एक कर्मचारी का था, जिन्होंने करीब दस साल तक भारतीय रेलवे में काम किया था. बाद में उन्होंने केरल राज्य बिजली विभाग में उप अभियंता के तौर पर नौकरी शुरू की. शुरुआत में विभाग ने रेलवे में की गई सेवा को मान्यता दी और उसी आधार पर वेतन तय किया गया. साथ ही कुछ सेवा लाभ भी दिए गए. लेकिन कुछ समय बाद विभाग ने अपना रुख बदल लिया और कहा कि रेलवे की नौकरी को केंद्र सरकार की सेवा की तरह नहीं माना जा सकता. इसके बाद कर्मचारी को पहले मिले लाभ वापस ले लिए गए. इस फैसले से कर्मचारी को परेशानी हुई और उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया. पहले मामला उच्च न्यायालय पहुंचा. वहां एक स्तर पर कर्मचारी को राहत मिली, लेकिन बाद में फैसला बदल गया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां पूरे विवाद पर विस्तार से सुनवाई हुई. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कर्मचारी के पक्ष में फैसला दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय रेलवे सीधे भारत सरकार के अधीन काम करता है और रेलवे कर्मचारी केंद्र सरकार की व्यवस्था का हिस्सा हैं. अदालत ने यह भी माना कि रेलवे के अपने अलग नियम हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ इसी वजह से कर्मचारियों की सेवा को कम नहीं आंका जा सकता. अगर कोई व्यक्ति रेलवे में काम कर चुका है, तो उसकी उस सेवा को उचित महत्व दिया जाना चाहिए.
कोर्ट ने दी ये दलील
अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि संबंधित विभाग पहले कर्मचारी की रेलवे सेवा को मान चुका था और उसी आधार पर लाभ भी दिए गए थे. ऐसे में कई साल बाद अचानक फैसला बदल देना और सुविधाएं वापस लेना उचित नहीं कहा जा सकता. अदालत का मानना था कि किसी कर्मचारी को पहले एक लाभ देना और फिर बाद में उसे वापस लेना उसके साथ असमान व्यवहार जैसा हो सकता है.
रेलवे कर्मचारियों के लिए राहत
इस फैसले को कई लोग एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं. खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो अलग-अलग सरकारी संस्थानों में काम कर चुके हैं या नौकरी बदल चुके हैं. ऐसे मामलों में पुरानी सेवा, अनुभव, वेतन और पेंशन जैसे मुद्दों पर अक्सर विवाद होते रहते हैं. अदालत के इस फैसले से ऐसे लोगों को कुछ स्पष्टता मिलने की उम्मीद मानी जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया कि रेलवे में दी गई सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. साथ ही यह भी कहा कि अगर किसी कर्मचारी को पहले नियमों के तहत लाभ दिए गए हैं, तो उन्हें बिना ठोस वजह के वापस लेना ठीक नहीं है. यही वजह है कि इस फैसले को सरकारी सेवा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है.
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