देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग बढ़ी
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में इस साल मई में बढ़ोतरी देखी गई है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में इजाफा होने के चलते लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट होना है। यह जानकारी नोमुरा और एचएसबीसी की ओर से जारी रिपोर्ट्स में दी गई।
नोमुरा के अनुसार, मई में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री यात्री वाहनों की कुल बिक्री का 6.4 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 4 प्रतिशत थी। वहीं, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री 8.9 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष के लगभग 6.5 प्रतिशत से अधिक है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा, यह दिखाता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है।
इसी तरह, एचएसबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया, ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों की इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की ओर रुझान बढ़ा है।
ब्रोकरेज फर्म ने मई में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 9.3 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की कुल हिस्सेदारी 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
कार निर्माताओं में, इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग के कारण टाटा मोटर्स को सबसे अधिक लाभ हुआ है। कंपनी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में सालाना आधार पर 85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जबकि पिछले दो महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बुकिंग में 2.5 गुना वृद्धि हुई है।
नोमुरा के अनुसार, टाटा मोटर्स को 15 लाख रुपए से कम कीमत वाले सेगमेंट में विशेष रूप से मजबूत मांग दिख रही है और कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों की उत्पादन क्षमता को 10,000 यूनिट प्रति माह से बढ़ाकर 15,000 यूनिट करने की योजना बना रही है।
दोपहिया वाहन सेगमेंट में यह बदलाव और भी अधिक स्पष्ट था। मई में लगभग 42,000 इलेक्ट्रिक स्कूटरों के पंजीकरण के साथ टीवीएस मोटर बाजार में अग्रणी बनी रही, उसके बाद बजाज ऑटो और एथर एनर्जी का स्थान रहा।
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, एथर की बिक्री में साल-दर-साल दोगुनी से अधिक वृद्धि हुई, जिससे कंपनी को 16.5 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिली।
दोनों ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में तेजी आ रही है। हालांकि बढ़ती कमोडिटी लागत निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
नोमुरा का मानना है कि अनुकूल नीतिगत उपायों और बढ़ती उपभोक्ता स्वीकृति के कारण भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं।
तेल विपणन कंपनियों ने अप्रैल में दो सप्ताह की अवधि में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 8 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की। घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण करने वाली भारतीय क्रूड बास्केट मई में लगातार तीन महीनों तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही, जिसका कारण मध्य पूर्व संकट का लंबा चलना था, जिसके कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होना था, जिससे होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का पारगमन होता है।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और युद्धविराम के बार-बार उल्लंघन के कारण अनिश्चितता और बढ़ गई है और तेल की कीमतों में और वृद्धि की आशंका है।
सरकार द्वारा उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए कीमतों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के कारण भारतीय तेल कंपनियां अभी भी पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर प्रतिदिन 550 करोड़ रुपए का नुकसान झेल रही हैं।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
देश में इबोला का कोई मामला नहीं, प्रभावित देशों से लौटे यात्रियों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी
नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इबोला वायरस बीमारी को लेकर एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 2 जून 2026 तक भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को सतर्क रहने और निर्धारित स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि यदि कोई व्यक्ति पिछले 21 दिनों के भीतर इबोला प्रभावित किसी देश की यात्रा करके आया है या वहां से होकर गुजरा है और उसे बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त या बिना किसी स्पष्ट कारण के रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत खुद को दूसरों से अलग कर लेना चाहिए। साथ ही स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक जांच और उपचार की व्यवस्था की जा सके।
मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करें। शुरुआती स्तर पर बीमारी की जानकारी देने से मरीज का इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है और संक्रमण के संभावित फैलाव को भी रोका जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय पर रिपोर्टिंग कई लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकती है। लोगों की सहायता के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी 24 घंटे और सातों दिन उपलब्ध हेल्पलाइन सेवा का भी उल्लेख किया है। मंत्रालय ने कहा कि इबोला से जुड़ी जानकारी, सलाह या किसी प्रकार की सहायता के लिए नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1075 पर संपर्क कर सकते हैं।
इबोला एक गंभीर और कई मामलों में जानलेवा संक्रामक बीमारी है। यह मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों, जैसे खून, पसीना, लार या अन्य शारीरिक स्राव के संपर्क में आने से फैलती है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे हो सकते हैं, लेकिन बाद में यह गंभीर रूप ले सकती है। कई मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के बढ़ते दायरे को देखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी है। हालांकि, भारत में फिलहाल इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और यदि किसी व्यक्ति में संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें। जागरूकता, सतर्कता और समय पर रिपोर्टिंग ही इस तरह की संक्रामक बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
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