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Government बदलने जा रही होलसेल प्राइस इंडेक्स का आधार वर्ष, लॉन्च करेगी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स
सरकार थोक मूल्य सूचकांक यानी होलसेल प्राइस इंडेक्स (डब्ल्यूपीआई) के आधार वर्ष को बदलकर 2022-23 करने जा रही है.इसके साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) भी लॉन्च करने जा रही है, जिसे भारत की महंगाई मापने की प्रणाली को आधुनिक और अधिक सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
प्रेस ब्रीफिंग और आधिकारिक घोषणा
इसके अलावा, सरकार ने इस विषय पर मंगलवार को मीडिया को ब्रीफिंग के लिए आमंत्रित किया है, जिसे उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो संबोधित करेंगे.
एमओएसपीआई सचिव का बयान और नए आंकड़े
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा, "हमने डब्ल्यूपीआई 2022-23 के आंकड़ों का उपयोग किया है, जो हमें आंतरिक रूप से उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों में कोई संशोधन न करना पड़े.हमें उम्मीद है कि ये आंकड़े अगले कुछ सप्ताह में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जाएंगे."
उन्होंने बताया कि वर्तमान डब्ल्यूपीआई शृंखला का आधार वर्ष 2011-12 है, जबकि संशोधित शृंखला में इसे बदलकर 2022-23 कर दिया जाएगा.
डब्ल्यूपीआई से पीपीआई में बदलाव की प्रक्रिया
सौरभ गर्ग ने कहा कि नया सूचकांक शुरू होने के बाद भी डब्ल्यूपीआई से आउटपुट पीपीआई में बदलाव तुरंत नहीं किया जाएगा.सरकार पहले नई शृंखला की स्थिरता और विश्वसनीयता का अध्ययन करेगी, उसके बाद ही इसे व्यापक स्तर पर अपनाने का निर्णय लिया जाएगा.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में डब्ल्यूपीआई और आउटपुट पीपीआई के बीच बहुत अधिक अंतर होने की संभावना नहीं है, क्योंकि डब्ल्यूपीआई की गणना के लिए पहले से ही ऐसी पद्धति अपनाई जाती है जो दोनों के बीच अंतर को सीमित रखती है.
आईआईपी के संशोधित आंकड़े और डिफ्लेटर का इस्तेमाल
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही सांख्यिकी मंत्रालय ने 2022-23 आधार वर्ष के साथ संशोधित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जारी किया था.
मंत्रालय ने बताया था कि मूल्य आधारित वस्तुओं की गणना के लिए नए आधार वर्ष वाले अद्यतन डब्ल्यूपीआई डिफ्लेटर का पहले ही इस्तेमाल किया जा चुका है.
जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के आधार वर्ष में बदलाव
इस साल फरवरी में सरकार ने कहा था कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आधार वर्ष 2022-23 किया जा रहा है, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का आधार वर्ष 2024 किया जा रहा है और आईआईपी का आधार वर्ष भी 2022-23 किया जा रहा है.इसके साथ ही भारत की सांख्यिकीय प्रणाली का व्यापक आधुनिकीकरण किया जा रहा है.
सरकार के अनुसार, "डब्ल्यूपीआई के आधार वर्ष में संशोधन का काम भी जारी है.जब तक नया डब्ल्यूपीआई उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा डब्ल्यूपीआई का उपयोग डिफ्लेटर के रूप में किया जाता रहेगा."
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इसके अलावा, मंत्रालय निकट भविष्य में प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) को भी शामिल करने की योजना बना रहा है.
पीपीआई उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापता है, जिन्हें उत्पादक खरीदते और बेचते हैं.इससे उत्पादन स्तर पर कीमतों के रुझान को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है और महंगाई के आकलन को अधिक सटीक बनाया जा सकता है.
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्कलेमर- हेडिंग, सबहेड और समरी को छोड़कर पूरी स्टोरी न्यूज एजेंसी IANS की है
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