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LAC पर भारत-चीन सेना की झड़प? बीजिंग से क्या जवाब आया

भारत चीन सीमा पर एक बार फिर हलचल की खबरों के बीच चीन का एक बड़ा बयान सामने आया है। इस बयान के बाद कई सवालों के जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने और हाल में भारतीय चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरों पर जब चीन के प्रवक्ता से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन बस इतना कहा गया कि फिलहाल चीन भारत सीमा पर हालात आमतौर पर स्थिर हैं। यानी चीन ने ना तो किसी नई सैन्य घटना की पुष्टि की और ना ही अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सेना की गतिविधियां बढ़ने की खबरों को साफ तौर पर खारिज किया।

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चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोज याकुन से मीडिया ने सीधा सवाल किया। उनसे पूछा गया कि भारतीय सोशल मीडिया पर चीन की सीमा के पास बड़ी सैन्य गतिविधियों के वीडियो सामने आ रहे हैं। साथ ही भारत सरकार के एक प्रवक्ता ने हाल की सीमा घटना से इंकार नहीं किया है। ऐसे में क्या हाल में भारत और चीन के बीच कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि चीन भारत सीमा पर हालात फिलहाल आमतौर पर स्थिर हैं। चीन और भारत ने पिछले हफ्ते चीन भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म की 36वीं बैठक की। दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इतने सीधे सवाल के बावजूद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरों पर कोई जवाब नहीं दिया। 

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दरअसल पिछले कुछ वक्त में सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैली और कई तरह के दावे किए गए कि कुछ दिन पहले अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसेसरी जिले में तिब्बत से सटे टैक्सिंग इलाके के पास भारतीय और चीनी सेना की पेट्रोलिंग टीमें आमने-सामने आ गई थी और इसी के बाद तमाम तरह की खबरें फैलने लगी। लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की और अब जब चीनी प्रवक्ता से सीधा सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी बस इतना कह के बात पलट दी कि फिलहाल भारत चीन सीमा पर सब कुछ स्थिर है। आपको बता दें भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर पुराना विवाद है। चीन इस पूरे राज्य पर अपना गलत दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है। चीन इसे जंगना कहता है। वहीं बार-बार भारत चीन के इन दावों को पूरी तरह खारिज करता है और साफ़ कहता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है। 
भारत ने हाल ही में कहा था कि चीन के साथ सीमा से जुड़े मामलों को वो बेहद गंभीरता से लेता है। नई दिल्ली ने साफ किया कि एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है क्योंकि सीमा पर हालात दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करते हैं। आपको बता दें भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक नाम तय करने को लेकर चीन की आपत्ति भी खारिज कर दी। भारत का कहना है कि नाम बदलने या किसी तरह का दावा करने से जमीन पर वास्तविकता नहीं बदल जाएगी।

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दरअसल यह पूरा घटनाक्रम इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत और चीन के रिश्ते 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की बातचीत की।

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सेना की वर्दी में आए पुतिन, उठाया कागज, भारत पर बड़ा खुलासा

रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन अचानक सेना की वर्दी में आए और यह महत्वपूर्ण कागज पढ़ने लगे। इस कागज को पढ़ने के बाद पुतिन ने ऐसा ऐलान किया जो कई देशों को परेशान कर सकता है। पुतिन ने भारत का नाम लेकर बहुत बड़ा ऐलान कर दिया है। दरअसल भारत से करीब 7000 किमी दूर एक इलाका है जहां दुनिया की महाशक्तियों के बीच एक बहुत बड़ी जंग शुरू हो चुकी है। बर्फ से ढका यह इलाका आर्कटिक है। पुतिन ने कहा है कि आर्कटिक एक नया जिओपॉलिटिकल फ्रंटियर बन रहा है और अब भारत इसका फायदा उठाने के लिए रूस के साथ आ चुका है। पुतिन ने कहा है कि भारत अब उन देशों में शामिल हो चुका है जो नॉर्दन सी रूट पर कदम रखेंगे। 

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दरअसल रूस भारत को उस आर्कटिक पर लेकर पहुंचा है जहां पर कई बार तापमान -50° तक गिर जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में ग्लोबल वार्मिंग के चलते इस इलाके का तापमान बढ़ने लगा। बर्फ पिघलने लगी और बर्फ पिघलने के बाद कई नए रास्ते खुलने शुरू हो गए। बर्फ पिघलने की वजह से आर्कटिक से आने-जाने के नए शिपिंग रूट तैयार हो रहे हैं। इन नए शिपिंग रूट्स का इस्तेमाल अब व्यापार, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जाएगा। अब इन्हीं शिपिंग रूट्स पर दावा ठोकने के लिए रूस ने भारत के साथ एक बड़ा प्लान तैयार कर लिया है। आर्कटिक की बर्फ पिघलने से तीन मुख्य शिपिंग रूट्स तैयार हो रहे हैं। इनमें पहला है नॉर्थ वेस्ट पैसेज, दूसरा है ट्रांस पोलर सी रूट और तीसरा है नॉर्दन सी रूट। भारत के लिए नॉर्दन सी रूट सबसे महत्वपूर्ण है। अभी तक इस इलाके में भारत ने सिर्फ एक उंगली रखी है लेकिन अब पैर जमाने की बारी आ गई है। 

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आपको बता दें कि आर्कटिक के विशाल बर्फीले इलाकों को लेकर रूस, अमेरिका, यूरोप और चीन के बीच वर्चस्व की जंग शुरू हो चुकी है। यह इलाका भारत से दूर है, लेकिन भारत के लिए बहुत जरूरी है। इसीलिए अब रूस भारत को इस इलाके में रणनीतिक बढ़त दिलवा सकता है। आपको बता दें कि आर्कटिक किसी एक देश का नहीं है। आर्कटिक आठ तटीय देशों में बंटा हुआ है। जिनमें कनाडा, डेनमार्क, ग्रीनलैंड, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन और अमेरिका शामिल हैं। डॉनल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा इसीलिए करना चाहते हैं ताकि आर्किटिक में अमेरिका की पकड़ और दावेदारी मजबूत हो जाए। भारत इस इलाके में फिलहाल हिमाद्री रिसर्च स्टेशन के जरिए साइंटिफिक रिसर्च का काम कर रहा है। लेकिन भारत अब इस इलाके में अपनी मौजूदगी को बढ़ाना चाहता है। लेकिन आपके मन में सवाल होगा कि आर्कटिक के पीछे इतनी बड़ी जंग शुरू क्यों हुई है? ऐसे में आपको बता दें कि आर्किटिक की बर्फीली जमीन के नीचे रेयर अर्थ, क्रिटिकल मिनरल्स, तेल और गैस के असीम भंडार हैं। आर्कटिक की जमीन के नीचे अरबों का खजाना दबा है। ऐसे में जब इस इलाके की बर्फ पिघल रही है तो खजाना निकालना भी आसान हो गया है। बर्फ पिघल रही है तो आर्कटिक तक पहुंचना भी आसान हो रहा है। ऐसे में रूस भारत के साथ मिलकर बहुत एक्टिव हो गया है। रूस इस इलाके में बड़ा दावेदार है। लेकिन रूस के पास इतने रिसोर्सेज नहीं है कि वो अकेले ही इस इलाके पर अपना वर्चस्व बना पाए क्योंकि यहां पर रूस अमेरिका और यूरोपीय दुश्मनों से घिरा है। 

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  Sports

IPL Update: Ashwin ने CSK के Coach के लिए लिया Eoin Morgan का नाम, MS Dhoni तय करेंगे भविष्य की रणनीति

चेन्नई सुपर किंग्स के खेमे में इन दिनों बदलाव का दौर चल रहा है। लंबे समय तक टीम की कमान संभालने वाले स्टीफन फ्लेमिंग से रिश्ता खत्म होने के बाद अब फ्रेंचाइजी नए कोच की तलाश में है। इसी बीच पूर्व भारतीय ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने एक ऐसा नाम सामने रखा है, जिसने क्रिकेट जगत में चर्चा बढ़ा दी है। अश्विन के मुताबिक पूर्व इंग्लैंड कप्तान इयोन मोर्गन चेन्नई सुपर किंग्स के अगले कोच बन सकते हैं।

अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि मोर्गन का नाम नए कोच के लिए काफी मजबूती से चर्चा में है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह तय नहीं है कि मोर्गन इसी साल जिम्मेदारी संभालेंगे या टीम के साथ बाद में जुड़ेंगे। उनके मुताबिक एक संभावना यह है कि कोई दूसरा व्यक्ति पहले टीम का ढांचा तैयार करे और मोर्गन बाद में जिम्मेदारी संभालें।

गौरतलब है कि इयोन मोर्गन ने 2023 में पेशेवर क्रिकेट से दूरी बना ली थी। इसके बाद वह मुख्य रूप से क्रिकेट विशेषज्ञ और कमेंटेटर के तौर पर नजर आए हैं। उन्होंने अभी तक किसी अंतरराष्ट्रीय या फ्रेंचाइजी टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी नहीं संभाली है। इसके बावजूद सीमित ओवरों के क्रिकेट की उनकी समझ को काफी मजबूत माना जाता है।

मोर्गन ने इंग्लैंड की सफेद गेंद वाली टीम में बड़ा बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 2019 में पहली बार एकदिवसीय विश्व कप का खिताब जीता था। आक्रामक सोच, खिलाड़ियों से प्रदर्शन निकालने की क्षमता और मैदान पर तेज फैसले लेने के लिए उनकी पहचान रही है। यही वजह है कि कोचिंग का अनुभव नहीं होने के बावजूद उन्हें इस भूमिका के लिए गंभीर उम्मीदवार माना जा रहा है।

बता दें कि चेन्नई सुपर किंग्स पिछले कुछ सत्रों में अपने पुराने स्तर का प्रदर्शन नहीं कर सकी है। पांच बार की चैंपियन टीम के लिए हाल के दो सत्र निराशाजनक रहे हैं। ऐसे में फ्लेमिंग के जाने को टीम में नए तरीके से बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

इस बदलाव में महेंद्र सिंह धोनी की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। अश्विन का मानना है कि कम से कम अगले एक साल तक धोनी टीम को दिशा देने में अहम योगदान दे सकते हैं। उनके मुताबिक अगले बड़े बदलाव से पहले धोनी के नेतृत्व में टीम का नया ढांचा तैयार किया जा सकता है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अगले बड़े खिलाड़ियों के चयन से पहले केवल एक साल का समय बचा है। ऐसे में कोच की नियुक्ति का समय भी महत्वपूर्ण होगा। अश्विन का मानना है कि धोनी के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए टीम इस बदलाव को बेहतर तरीके से संभाल सकती है।

स्टीफन फ्लेमिंग का लंबा दौर खत्म होने के बाद चेन्नई सुपर किंग्स अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रही है। इयोन मोर्गन तुरंत जिम्मेदारी संभालते हैं या बाद में टीम से जुड़ते हैं, यह आने वाले समय में साफ होगा, लेकिन अश्विन के बयान ने सीएसके के नए कोच को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया हैं।
Thu, 13 Aug 2026 21:13:17 +0530

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