ईरान हिमायती इस्लामिक रेजिस्टेंस यानी इसराइल के खिलाफ प्रतिरोध की धुरी के एक अहम ग्रुप यमन के अंसारुल्लाह को छेड़कर ऐसा लग रहा है सऊदी अरब ने मुसीबत मोल ले ली है। यमन के हूतियों ने लाल सागर सऊदी के लिए बैन कर रखा है। ना सिर्फ बैन है बल्कि हमले भी अंजाम दे रहे हैं। अब मीडिया रिपोर्ट और सऊदी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्टर सऊदी अरब पर एक ऐसा खौफनाक खतरा मंडरा रहा है जिसने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नींद उड़ा दी है। अब मीडिया रिपोर्ट्स और सऊदी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्टर सऊदी अरब पर बेहद खौफनाक खतरा मंडरा रहा है। खबर है कि रेजिस्टेंस के ग्रुप सऊदी पर एक साथ दो तरफ से अटैक कर सकते हैं। सऊदी अरब के नॉर्थ बॉर्डर से हसदुशाबी, कताइयब हिजबुल्ला, अल नुजवा और कताइयब सैयद अल शोहदा जैसी तंजीमे हमला बोलेंगी और साउथ की तरफ से यमन पर कब्जा जमाए बैठे हूतियों की प्रोफेशनल आर्मी मिसाइलों, ड्रोंस और लंबी दूरी के रॉकेटों से सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल देंगी।
वैसे भी हूतियों और सऊदी अरब की दुश्मनी 15 साल से भी ज्यादा पुरानी है। जब सऊदी पर उत्तर और दक्षिण की तरफ से एक साथ सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों से हमले होंगे तो सऊदी अरब में लगा अमेरिकी डिफेंस का चक्रव्यूह टूट जाएगा। यह कैंची की तरह काटने वाला अटैक होगा। जैसे कैंची के दो अलग-अलग सिरे साथ जुड़ते हैं तो कोई भी चीज कट जाती है। ठीक उसी तरह सऊदी अरब को काटने की तैयारी है। हो सकता है सऊदी को पहले से इस प्लान की भनक हो तभी तो उसने पिछले दिनों अमेरिका के साथ मिलकर इराक में हजो शाबी के ठिकानों पर भीषण हमले अंजाम दिए थे। खुफिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस हमले का असली मकसद सऊदी अरब की इकोनमी की कमर तोड़ना है और उसके बुनियादी ढांचे को तबाह करना है। सऊदी अरब के एक सीनियर अफसर ने सीएनएन से बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया है ऐसा मीडिया रिपोर्ट दावा करती हैं।
वो कहते हैं कि उन्हें खुफिया एजेंसियों से मल्टीपल कोऑर्डिनेटेड अटैक की कई रिपोर्ट्स मिली हैं। इन रिपोर्ट्स में साफ कहा गया है कि यह हमले आने वाले कुछ समय में हो सकते हैं। गौरतलब है कि हूं को ला रहे एक प्लेन पर सऊदी अरब ने उस वक्त हमला किया था जब वह ईरान से आयतुल्लाह खामने के जनाजे में शामिल होकर लौट रहे थे। वो हमला तो फेल हो गया लेकिन हूती सऊदी अरब के पीछे पड़ गए हैं और यह जंग अब बड़ी होती जा रही है। पानी में ऊपर की ओर उतर आया और समंदर से निकलकर किनारों पर बहता हुआ यह तेल देखिए। ऐसा लग रहा है जैसे समंदर से तेल की झील फूट पड़ी हो। यह ईरान का समुद्र है। ऐसा नहीं है कि ईरान का समंदर तेल छोड़ने लगा है। दरअसल, यह उन जहाजों और तेल टैंकरों से निकला ऑयल है जिन्हें ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मोस में उड़ा दिया था या डुबो दिया। यह ईरान के दुश्मनों के उन जहाजों का तेल है जिन्हें उसकी परमिशन के बिना आबनाए होमोस से गुजारा जा रहा था। ईरान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स पर यह वीडियो गश्त कर रहा है। जिसमें समंदर के किनारों पर तेल ही तेल नजर आता है। ईरान में आईआरजीसी नेवी ने पहले भी वीडियो दिखाते हुए कई दावे किए हैं और कई वीडियो में दिखाया गया है कि अगर स्टेट ऑफ हुर्मस पर ईरान को इग्नोर करके कोई भी जहाज निकालने की कोशिश की गई तो अंजाम यह होगा। जो लोग अमेरिका के आर्डर को फॉलो कर रहे हैं उनका हश्र यह है।
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भारत चीन सीमा पर एक बार फिर हलचल की खबरों के बीच चीन का एक बड़ा बयान सामने आया है। इस बयान के बाद कई सवालों के जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी सेना की गतिविधियां बढ़ने और हाल में भारतीय चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरों पर जब चीन के प्रवक्ता से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा लेकिन बस इतना कहा गया कि फिलहाल चीन भारत सीमा पर हालात आमतौर पर स्थिर हैं। यानी चीन ने ना तो किसी नई सैन्य घटना की पुष्टि की और ना ही अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सेना की गतिविधियां बढ़ने की खबरों को साफ तौर पर खारिज किया।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोज याकुन से मीडिया ने सीधा सवाल किया। उनसे पूछा गया कि भारतीय सोशल मीडिया पर चीन की सीमा के पास बड़ी सैन्य गतिविधियों के वीडियो सामने आ रहे हैं। साथ ही भारत सरकार के एक प्रवक्ता ने हाल की सीमा घटना से इंकार नहीं किया है। ऐसे में क्या हाल में भारत और चीन के बीच कोई सैन्य घटना हुई है और क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि चीन भारत सीमा पर हालात फिलहाल आमतौर पर स्थिर हैं। चीन और भारत ने पिछले हफ्ते चीन भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म की 36वीं बैठक की। दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इतने सीधे सवाल के बावजूद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पास अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरों पर कोई जवाब नहीं दिया।
दरअसल पिछले कुछ वक्त में सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैली और कई तरह के दावे किए गए कि कुछ दिन पहले अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसेसरी जिले में तिब्बत से सटे टैक्सिंग इलाके के पास भारतीय और चीनी सेना की पेट्रोलिंग टीमें आमने-सामने आ गई थी और इसी के बाद तमाम तरह की खबरें फैलने लगी। लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की और अब जब चीनी प्रवक्ता से सीधा सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी बस इतना कह के बात पलट दी कि फिलहाल भारत चीन सीमा पर सब कुछ स्थिर है। आपको बता दें भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर पुराना विवाद है। चीन इस पूरे राज्य पर अपना गलत दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है। चीन इसे जंगना कहता है। वहीं बार-बार भारत चीन के इन दावों को पूरी तरह खारिज करता है और साफ़ कहता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है।
भारत ने हाल ही में कहा था कि चीन के साथ सीमा से जुड़े मामलों को वो बेहद गंभीरता से लेता है। नई दिल्ली ने साफ किया कि एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है क्योंकि सीमा पर हालात दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करते हैं। आपको बता दें भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक नाम तय करने को लेकर चीन की आपत्ति भी खारिज कर दी। भारत का कहना है कि नाम बदलने या किसी तरह का दावा करने से जमीन पर वास्तविकता नहीं बदल जाएगी।
दरअसल यह पूरा घटनाक्रम इसलिए जरूरी है क्योंकि भारत और चीन के रिश्ते 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की बातचीत की।
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