पुरानी कढ़ाई फेंकने से पहले समझ लें ये ट्रिक! मिनटों में लौट आएगी चमक
Kadhai ki kali parat kaise saf karen : भारतीय किचन में लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल आज भी बड़े पैमाने पर होता है. इसमें बना खाना स्वादिष्ट भी माना जाता है और सेहत के लिए फायदेमंद भी. लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद कढ़ाई के नीचे और किनारों पर मोटी काली परत जमने लगती है. तेल, मसाले और तेज आंच की वजह से यह परत इतनी सख्त हो जाती है कि सामान्य साबुन या स्क्रबर से साफ नहीं होती. कई लोग पुरानी कढ़ाई को बेकार समझकर बदल देते हैं. प्रयागराज की गृहणी सुमन ने कुछ आसान तरीकों से इसे फिर से चमकाने का तरीका बताया है.
तंबाकू की लत पड़ रही भारी! कैंसर के 40% मरीज युवा, विशेषज्ञों की बड़ी चेतावनी
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि तंबाकू का सेवन अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। पहले जहां तंबाकू से जुड़ी गंभीर बीमारियां अधिक उम्र में दिखाई देती थीं, वहीं अब कम उम्र के युवा भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
इंदौर के सरकारी और निजी अस्पतालों में हर साल हजारों नए कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्होंने लंबे समय तक तंबाकू या उससे जुड़े उत्पादों का सेवन किया है। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
तंबाकू और ई-सिगरेट की बढ़ती लत बना रही युवाओं को शिकार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू के पारंपरिक रूपों के साथ-साथ ई-सिगरेट का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है। हालांकि भारत में ई-सिगरेट की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद कई माध्यमों से यह युवाओं तक पहुंच रही है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं में इसका चलन बढ़ने की बात भी सामने आ रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि शुरुआत में इसे फैशन या शौक के रूप में अपनाया जाता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है। इसके बाद व्यक्ति तंबाकू के अन्य उत्पादों की ओर बढ़ता है। चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र की युवतियां भी तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के साथ अस्पताल पहुंच रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जागरूकता अभियान के साथ-साथ परिवार और स्कूल स्तर पर भी बच्चों को इसके खतरों के बारे में लगातार जानकारी देना जरूरी है।
तंबाकू से बढ़ रहे कैंसर और अन्य गंभीर रोग
चिकित्सकों के अनुसार तंबाकू का सबसे बड़ा असर कैंसर के रूप में सामने आता है। ओरल कैंसर यानी मुंह का कैंसर भारत में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। इसके अलावा फेफड़ों का कैंसर, गले का कैंसर, खाने की नली का कैंसर, पेट का कैंसर और रक्त से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां भी तंबाकू सेवन से जुड़ी हुई हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि तंबाकू सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि हृदय रोग, सांस की बीमारी, दमा और आंखों से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ाता है। वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। भारत में गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का उपयोग भी बड़ी समस्या बना हुआ है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि तंबाकू से दूरी बनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी जल्दी इस आदत को छोड़ा जाए, स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान को उतना ही कम किया जा सकता है।
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