UNCOVERED with Manoj Gairola: आखिर क्यों बदली गई सलमान खान की फिल्म का नाम? यहां समझिए सॉफ्ट पावर का खेल
UNCOVERED with Manoj Gairola: जिस समय धुरंधर फिल्म ने पूरे संसार में धूम मचाई थी, उसी वक्त यानी दिसंबर 2025 में सलमान खान की एक फिल्म का टीजर आया. 72 सेकंड के इस टीजर को 24 घंटे के अंदर 6 करोड़ लोगों ने देखा और 72 घंटे के अंदर ही चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक बड़ा आर्टिकल लिखकर इस फिल्म की आलोचना की. एक बॉलीवुड टीजर ने चीन को इतना बेचैन कर दिया कि उन्हें रेस्पोन्ड करना पड़ा. मतलब साफ था, चीन बॉलीवुड की सॉफ्ट पावर की गंभीरता को समझता था और धुंरधर की सक्सेस ने उसे बता दिया था कि बॉलीवुड कैसे भारतीय नैरेटिव तैयार करता है और कैसे भारत की सरकार ने अब इस सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.
धुरंधर की वैश्विक सफलता
धुरंधर फिल्म इंडिया की इंटेलिजेंस एजेंसी, रॉ के एक खुफिया ऑपरेशन पर आधारित है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे पाकिस्तान भारत में आतंकी गतिविधि करता है और साथ ही अपने देश में बलूचों के साथ अन्याय करता है. ये फिल्म भारत के साथ-साथ संसार के कई देशों में सुपरहिट रही. और मजे की बात ये है कि पाकिस्तान में भी ये सबसे ज्यादा देखे जाने वाली फिल्म बनी, वो भी तब जब पाकिस्तान में भारतीय फिल्म्स बैन हैं. वहां लोगों ने इसे इंटरनेट के जरिए देखा.
‘बैटल ऑफ गलवान’ पर बदले रुख
अनकवर्ड में हम आपको बताएंगे कि सॉफ्ट पावर कैसे काम करती है? लेकिन पहले बात करते हैं सलमान की फिल्म के 72 सेकंड के वीडियो पर. जिस फिल्म का ये टीजर था, उसका नाम था 'बैटल ऑफ गलवान'. ये फिल्म जून 2020 में, गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए फौजी संघर्ष पर आधारित थी. इस संघर्ष में कर्नल संतोष बाबू समेत भारत के 20 फौजियों का बलिदान हुआ था. इस फिल्म में संतोष बाबू बने हैं सलमान खान. वो भारतीय सेना को चीन की सेना के अगेन्स्ट लीड करते हैं. जिस तरह इस घटना के बाद देश में चीन के खिलाफ माहौल बना था, हर किसी को इस फिल्म का इंतजार था. लेकिन जिस तरह बॉलीवुड की फिल्मों में ट्विस्ट आता है, यहां भी आ गया. लेकिन ये फिल्मों के ट्विस्ट से कहीं ज्यादा सरप्राइजिंग था. इसने सबको, खास तौर से जिन्हें Right Wing Supporters कहते हैं, उन्हें शॉक्ड कर दिया.
दरअसल, इंडियन गवर्नमेंट ने इस फिल्म की थीम को चेंज करने के निर्देश दे दिए थे. जिसके बाद इसका नाम 'बैटल ऑफ गलवान' से बदलकर 'मातृभूमि' हो गया. अब लड़ाई के बजाय इसमें शांति और प्यार-मोहब्बत की बात की गई है. इसकी 40 प्रतिशत शूटिंग दोबारा हो रही है. ये फिल्म इस साल अप्रैल में रिलीज होनी थी, लेकिन अब पता नहीं ये सिनेमाहॉल में कब आएगी?
चीन के प्रति भारत की कूटनीतिक रणनीति
इसी तरह एक और फिल्म प्रोड्यूसर हिमालय दसानी भी इसी थीम पर फिल्म बनाना चाहते थे, जिसका नाम था 'द लायन ऑफ गलवान' लेकिन इस फिल्म को भी रोक दिया गया. हिमालय दसानी फिल्म अभिनेत्री भाग्यश्री के पति हैं. तो ऐसा क्या है कि पाकिस्तान के खिलाफ फिल्म बनाने वालों को तो मोदी सरकार सहयोग देती है और चीन के खिलाफ फिल्में रोक देती है? और वो भी तब, जब 2020 में हुई गलवान वैली की घटना के बाद, मोदी सरकार ने कई चाइनीज कंपनियों को बैन कर दिया था. चाइनीज निवेश पर रोक लगा दी थी और कई केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी के मुख्यमंत्रियों ने, चाइनीज सामान के बॉयकॉट का अभियान शुरू कर दिया था.
यही नहीं, ऑपरेशन सिंदूर के समय चाइना ने पाकिस्तान को पूरी मदद दी और भारत को इसका नुकसान भी उठाना पड़ा था. पूरे देश के सेंटिमेंट्स आज भी चाइना के खिलाफ है और इसमें मौजूदा सरकार का बड़ा रोल है. तो आखिर ऐसा क्या हो गया? क्या हम चीन से डर गए? क्या मोदी सरकार ने 'सॉफ्ट पावर' की बजाय, चीन के सामने सॉफ्ट सरेंडर कर दिया? या कोई और मजबूरी थी?
बदलती जियोपॉलिटिकल रियलिटी का असर
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर से लेकर अब तक Geopolitical Situation पूरी तरह से चेंज हो चुकी है. पहले अमेरिका, इंडिया के करीब था. लेकिन ट्रंप के आने के बाद, अमेरिका ने पहले भारत पर टैरिफ लगाए और उसके बाद भारत विरोधी पॉलिसी बनाई. इस तरह भारत और अमेरिका के रिश्तों में दरार पैदा हो गई. पिछले कुछ सालों में भारत की विदेश नीति (Foreign Policy) Pro America हो गई थी, और साथ ही Anti-China भी. ट्रंप के आने के बाद हमें इसका भारी नुकसान उठाना पड़ा.
भारत की फॉरेन पॉलिसी
एक अच्छी Foreign Policy वो होती है, जो भावनाओं को दरकिनार कर देश के हितों की रक्षा करे. पिछले साल अगस्त में ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया. इसके ठीक बाद पीएम मोदी SCO की मीटिंग के लिए चीन पहुंचे और वहां उन्होंने जिनपिंग और पुतिन के साथ गर्मजोशी से मुलाकात की. इस मुलाकात की तस्वीर पूरी दुनिया में छा गई. आज हमारे लिए ये जरूरी है, कि हम चीन के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें. इसलिए भारत सरकार का चाइनीज थीम वाली फिल्मों को लेकर लिया गया ये डिसीजन, आज की Geopolitical Situation के हिसाब से ठीक लगता है.
बॉलीवुड की सॉफ्ट पावर
अब बात करते हैं बॉलीवुड की सॉफ्ट पावर पर. आपको बता दें कि संसार में सबसे ज्यादा फिल्में भारत में बनती हैं, ना कि अमेरिका में. इंडिया में करीब 1500 फिल्में हर साल बनती हैं और ये फिल्में मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, साउथ ईस्ट एशिया, यूरोप, रूस और साउथ अमेरिकी देशों में भी देखी जाती हैं. इस तरह करीब 70 देशों में भारतीय फिल्मों के दर्शक हैं. अभी तक भारत का ये फिल्म व्यवसाय अपनी ही चाल से चल रहा था और भारत सरकार का इस सॉफ्ट पावर पर ज्यादा फोकस नहीं था. लेकिन अब मोदी सरकार, भारत के नैरेटिव को मजबूत बनाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है और धुरंधर फिल्म इसका सबूत है.
अमेरिका से हुई थी इसकी शुरूआत
सिनेमा को सॉफ्ट पावर के रूप में इस्तेमाल करने की शुरुआत अमेरिका से हुई. कोल्ड वॉर के दौरान सोवियत रूस को विलेन दिखाने वाली कई फिल्में बनीं. वियतनाम युद्ध में अमेरिका हार गया था. पूरे देश में हताशा थी और उसे दबाने के लिए 'रैम्बो' जैसी फिल्म बनाई गई. 80 के दशक में आई टॉम क्रूज की मशहूर फिल्म 'टॉप गन'. इसे बनाने के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पैंटागन ने पूरा सहयोग दिया. इस फिल्म का जलवा ऐसा रहा कि सिनेमा हॉल के बाहर ही यूएस नेवी ने भर्ती के लिए अपने बूथ लगा दिए. इसके बाद नेवी में 500 प्रतिशत भर्ती बढ़ गई. ये बात काफी कम लोगों को पता है कि हॉलीवुड में पैंटागन का अपना एक दफ्तर है. एक स्टडी के मुताबिक पेंटागन, हॉलीवुड की 800 फिल्में और 1000 हजार से ज्यादा टीवी शोज को बनाने में सहयोग कर चुका है. तो ऐसे में आप समझ ही गए होंगे कि सिनेमा कोई भी नैरेटिव बनाने के लिए कितनी बड़ी सॉफ्ट पावर है और चीन को भी बॉलीवुड की इस सॉफ्ट पावर का अहसास है.
'इतना खून बहता है', दिव्यांका त्रिपाठी की डिलीवरी देख सुन्न पड़ गए थे पति विवेक, बताया लेबर रूम में क्या-क्या हुआ?
Divyanka Tripathi-Vivek Dahiya: टीवी जगत की पॉपुलर जोड़ी दिव्यांका त्रिपाठी और विवेक दहिया हाल ही में पैरेंट्स बने हैं. दिव्यांका ने 25 मई को जुड़वा बेटों को जन्म दिया. एक्ट्रेस के घर में इस समय खुशियों का माहौल सजा है और कपल ने अपने जुड़वा बच्चों का घर में धमाकेदार वेलकम किया. इस बीच लेटेस्ट व्लॉग में विवेक ने बताया कि पापा बनने उनके लिए कितना घबराहट भरा था. इतना ही नहीं एक्टर डिलीवरी के समय लेबर रूम में भी गए थे. उन्होंने अपना एक्सपीरियंस शेयर किया, जो हैरान कर देने वाला है.
ट्विंस के साथ दिव्यांका का हुआ जोरदार वेलकम
दिव्यांका त्रिपाठी अपने ट्विंस के जन्म के बाद हाल ही में घर लौटीं, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया. वायरल हो रहे वीडियो में दिव्यांका की सासू मां ने दोनों बच्चों की नजर उतारी और फिर आरती की दिव्यांका ने बाहर आकर पैप्स से बातचीत भी की. इसके बाद कपल ने पैपराजी को पोज दिया और उन्हें मिठाईयां भी बाटीं. हालांकि उन्होंने फोटोग्राफर्स से गुजारिश की कि वो उनके बच्चों का चेहरा ना दिखाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
परवरिश को लेकर डर रहे विवेक
वहीं, बच्चों के घर आने के बाद दिव्यांका का नाय व्लॉग सामने आया है, जिसमें उनके पति विवेक ने बताया कि बच्चों के जन्म लेने पर वो खुश हैं. लेकिन नर्वस भी हैं. उन्हें डर लग रहा है क्या वो बच्चों को सुरक्षित लाइफ दे पाएंगे? क्या वो अच्छे पापा बनेंगे? उनकी जिम्मेदारी अच्छे से निभाएंगे या नहीं? विवेक ने इस दौरान ये भी बताया कि बच्चों को पहली बार देखकर वो इमोशनल हो गए थे. इतना ही नहीं विवेक दिव्यांका के साथ लेबर रूम में भी गए थे और उन्होंने कहा कि वो देखने के बाद मदर्स के लिए उनकी रिस्पेक्ट बढ़ गई है.
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लेबर रूम में जाने से पहले हो गई डिलीवरी
विवेक दहिया ने कहा- 'मैंने पहले से डॉक्टर्स को कहा था कि मैं लेबर रूम में दिव्यांका के साथ रहूंगा. मैं बच्चों के दुनिया में आने का पूरा प्रोसेस देखूंगा. हमें बताया गया कि सर्जरी देखने के बाद बहुत से लोग बेहोश हो जाते हैं. देख नहीं पाते. हमें कहा गया कि आप दूर से डिलीवरी देखना. क्यों उस जोन में जाना है. मैं इंतजार कर रहा था अंदर जाने का. लेकिन डिलीवरी के वक्त डॉक्टर्स ने मुझे लेट बुलाया. लेबर रूम में 7-8 डॉक्टर्स थे, मैंने देखा कि बच्चे पैदा हो चुके थे. मुझे हैरानी हुई, मैं उनकी अंबिलिकल कॉर्ड काटना चाहता था.'
बेहता खून देख हैरान थे विवेक
विवेक ने अपनी बात को आगे रखते हुए कहा- 'मैंने दिव्यांका का हाथ पकड़ा, बच्चों को देखा. मैं 20 मिनट अंदर था. मैंने पूरी सर्जरी देखी लेकिन कुछ ऐसा फील नहीं किया कि मैं बेहोश हो जाऊं. लेकिन मैं हैरान था इतना खून बहता है. उस प्रोसेस को देखकर आप हैरान हो जाते हो. वो जो कुछ मैंने देखा मुझे समझ नहीं आया कैसे रिएक्ट करना है. बाहर आया तो फैमिली खुश थी, लेकिन मैं तब भी सुन्न था. मैं इमोशनली नंब था. लेकिन मैं धीरे-धीरे फॉर्म में आया. मुझे अपनी फीलिंग को सिंक करने में वक्त लगा पर अब मैं नॉर्मल हूं.'
बच्चों को बताया था करण-अर्जुन
बता दें, दिव्यांका और विवेक ने अपने बच्चों की अनाउंसमेट बेहद खास अंदाज में की थी. कपल ने इंस्टाग्राम पर दो क्यूट बच्चों की तस्वीर लगाई है, जो हल्के नीले रंग की ड्रेस पहने हुए हैं. इसमें उनका चेहरा नहीं दिखाई दे रहा है. इस तस्वीर के साथ दिव्यांका ने बताया कि उन्होंने जुडवां बेटों को जन्म दिया है. साथ ही फोटो में लिखा है- 'हमने खुशी मांगी थी, भगवान ने कहा, ‘दोगुनी खुशी लो’ जुड़वा बेटों का आशीर्वाद मिला है.'
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