PPF से पैसा निकालने का क्या है सरकारी नियम? मैच्योरिटी से पहले कैश चाहिए तो अपनाएं यह तरीका
PPF Withdrawl Rule: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) भारत सरकार की एक बेहद लोकप्रिय और सुरक्षित छोटी बचत योजना है. इस योजना को पीपीएफ एक्ट 1968 के तहत शुरू किया गया था. लंबी अवधि के निवेश के लिए इसे सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है क्योंकि इसमें जमा पैसे पर सरकार की गारंटी होती है. वर्तमान में इस योजना पर 7.1 प्रतिशत की दर से सालाना ब्याज मिल रहा है, जो हर साल कंपाउंड होता है.
क्या है इस खाते की सबसे बड़ी खासियत?
इस खाते की सबसे बड़ी खासियत इसका ई-ई-ई टैक्स स्टेटस है. इसका मतलब है कि निवेश की जाने वाली रकम, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी का पूरा पैसा पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है. पीपीएफ खाते की कुल अवधि 15 साल की होती है, लेकिन संकट के समय खाताधारकों की मदद के लिए इसमें से बीच में भी पैसा निकालने की अनुमति दी जाती है.
कब और कैसे कर सकते हैं आंशिक निकासी?
पीपीएफ खाते से आंशिक निकासी यानी आंशिक रूप से पैसा निकालने की सुविधा खाता खुलने के छह वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद मिलती है. यानी आप सातवें वित्तीय वर्ष से अपने खाते से पैसा निकाल सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति ने वित्तीय वर्ष 2019-20 में अपना खाता खुलवाया था, तो वह वित्तीय वर्ष 2025-26 के बाद इससे पैसा निकालने का हकदार हो जाता है. नियम के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में केवल एक ही बार आंशिक निकासी की जा सकती है. यह निकासी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा या खाताधारक के एनआरआई बनने जैसी जरूरी परिस्थितियों में की जा सकती है.
कितनी रकम निकालने की है इजाजत?
पीपीएफ से आंशिक निकासी के तहत आप एक निश्चित सीमा में ही पैसा निकाल सकते हैं. नियम के मुताबिक, निकासी वाले वर्ष से ठीक पहले वाले वित्तीय वर्ष के अंत में मौजूद कुल बैलेंस का 50 प्रतिशत या फिर निकासी वाले वर्ष से चार वर्ष पहले के अंत में मौजूद बैलेंस का 50 प्रतिशत, इन दोनों में से जो भी राशि कम होगी, उतनी ही रकम आप निकाल सकते हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार पैसा निकालने से निवेश पर मिलने वाला कंपाउंडिंग का फायदा कम हो जाता है. पैसा निकालने के लिए खाताधारक को फॉर्म सी भरकर, अपनी पासबुक के साथ बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करना होता है.
समय से पहले खाता बंद करने के नियम
यदि आपको बड़ी रकम की जरूरत है, तो आप पांच साल पूरे होने के बाद अपने पीपीएफ खाते को समय से पहले बंद भी करा सकते हैं. इसे प्रीमैच्योर क्लोजर कहा जाता है. लेकिन सरकार इस पर एक प्रतिशत की पेनाल्टी लगाती है. यह पेनाल्टी खाता खुलने की तारीख से या फिर वर्तमान पांच साल के ब्लॉक की शुरुआत से लागू होती है. इसका सीधा मतलब यह है कि खाता बंद करने पर आपको मिलने वाले कुल ब्याज में से एक प्रतिशत की कटौती की जाएगी.
किन परिस्थितियों में बंद हो सकता है खाता?
पीपीएफ खाते को समय से पहले केवल कुछ विशेष और गंभीर परिस्थितियों में ही बंद करने की अनुमति मिलती है. यदि खाताधारक, उसके जीवनसाथी या बच्चों को कोई गंभीर बीमारी हो जाती है, तो इलाज के लिए इसे बंद किया जा सकता है. इसके अलावा खाताधारक या बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए और खाताधारक के एनआरआई बन जाने की स्थिति में भी खाता बंद करके पूरी रकम निकाली जा सकती है. इसके लिए फॉर्म सी और फॉर्म एसबी-7बी भरकर जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा करना पड़ता है.
मैच्योरिटी और एक्सटेंशन के बाद निकासी
जब पीपीएफ खाता 15 साल में मैच्योर हो जाता है, तब खाताधारक बिना किसी पेनाल्टी या प्रतिबंध के अपनी पूरी रकम निकाल सकता है. इसके अलावा, अगर आप निवेश जारी रखना चाहते हैं, तो मैच्योरिटी के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं. इसके लिए फॉर्म एच जमा करना होता है. अगर आप नए निवेश के साथ खाते को आगे बढ़ाते हैं, तो आप कुल बैलेंस का अधिकतम 60 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं. वहीं, बिना किसी नए निवेश के खाता आगे बढ़ाने पर आप जब चाहें अपनी पूरी रकम निकाल सकते हैं और बची हुई राशि पर ब्याज भी मिलता रहता है. सबसे अच्छी बात यह है कि पीपीएफ से की जाने वाली हर तरह की निकासी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है और इसे इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाने की जरूरत भी नहीं होती है.
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गर्मी में व्यायाम क्यों जरूरी? बेहतर होता है रक्त संचार और गर्मी सहन करने की क्षमता
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। गर्मियों में लोग अक्सर सोचते हैं कि पसीना आने से शरीर के सारे विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, लेकिन क्या ऐसा सच में है? हेल्थ एक्सपर्ट इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। साथ ही बताते हैं कि गर्मियों में व्यायाम क्यों बेहद जरूरी है।
सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा बताती हैं कि पसीना शरीर से हानिकारक तत्व निकालने का मुख्य जरिया नहीं है। यह काम मुख्य रूप से लीवर और किडनी करते हैं। तो फिर गर्मी में हिलना-डुलना या व्यायाम क्यों जरूरी है? एक्सपर्ट के अनुसार, व्यायाम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है। अच्छा रक्त संचार शरीर के हर हिस्से तक पोषक तत्वों और ऑक्सीजन को पहुंचाने में मदद करता है। साथ ही लसीका तंत्र को सक्रिय रखता है, जो शरीर की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
व्यायाम से मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है और शरीर गर्मी के अनुकूल खुद को ढाल पाता है। पूजा मखीजा बताती हैं कि हल्की-फुल्की गतिविधियां जैसे तेज चलना, स्ट्रेचिंग या हल्का शक्ति प्रशिक्षण भी रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखने में कारगर साबित होती हैं। इससे शरीर तनाव को बेहतर तरीके से संभाल पाता है।
गर्मी में नियमित व्यायाम गर्म मौसम में शरीर को गर्मी सहन करने के लिए तैयार करता है। इससे पसीने की दक्षता बढ़ती है, प्लाज्मा की मात्रा में वृद्धि होती है, हृदय की कार्यक्षमता सुधरती है और शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र मजबूत होता है। नतीजतन, समय के साथ गर्मी में आपको कम थकान महसूस होती है और हीट स्ट्रेस का खतरा भी कम हो जाता है।
शोध भी इस बात की पुष्टि करते हैं। जर्नल ऑफ एप्लाइड फिजियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, व्यायाम के साथ गर्मी के संपर्क में आने से प्लाज्मा बढ़ता है और तापमान नियंत्रण बेहतर होता है। इसी तरह फिजियोलॉजिकल रिव्यूज जर्नल में कहा गया है कि व्यायाम रक्त वाहिकाओं के कार्य को सीधे प्रभावित करता है।
गर्मी में व्यायाम कोई सजा नहीं, बल्कि समझदारी का काम है। सुबह-शाम का समय चुनें, पर्याप्त पानी पिएं, व्यायाम की तीव्रता को मौसम के अनुसार समायोजित करें और शरीर के संकेतों पर ध्यान दें। धूप में ज्यादा देर तक न रहें। गर्मी के इस मौसम में हल्की शारीरिक गतिविधि जारी रखने से न सिर्फ फिटनेस बनी रहेगी, बल्कि शरीर गर्मी को बेहतर ढंग से झेलने में भी सक्षम बनेगा।
--आईएएनएस
एमटी/डीकेपी
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