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AI Honeytrap Scam in Jaipur: जयपुर की हाईटेक हसीना ने एआई वीडियो से वसूले 90 लाख, ऐसे बुना था जाल
AI Honeytrap Scam in Jaipur: राजधानी जयपुर की भीड़भाड़ वाली सड़कों से दूर, महेश नगर थाना एक ऐसी शिकायत से हिल उठा जिसकी परतें खुलनी शुरू हुईं तो पुलिस भी चौंक गई. एक आईटी प्रोफेशनल महिला, जो बेहद सधी हुई और बेहद चालाक है, वह कॉर्पोरेट दुनिया में हनी ट्रैप की रानी बन चुकी थी. इस डिजिटल शिकारी का नाम दिशा बाबला है. दिशा ने जयपुर के एक नामी आईटी व्यवसायी विमल कुमार डागा की जिंदगी को अपने जाल में ऐसा घेरा कि वह पूरी तरह टूट गए. आरोपी महिला ने पिछले साल कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक का सहारा लेकर व्यवसायी से पूरे 90 लाख रुपये ऐंठ लिए थे.
AI वीडियो से बनाया ब्लैकमेलिंग का जाल
पीड़ित व्यवसायी विमल डागा ने पुलिस को बताया कि दिशा बाबला कभी उनके ऑफिस में इंटर्न के तौर पर काम करती थी. काम के दौरान उसने व्यवसायी के डिजिटल फुटप्रिंट्स हासिल किए. इसके बाद दिशा और उसके गैंग ने व्यवसायी को ब्लैकमेल करने के लिए एआई तकनीक से तैयार नकली फोटो और वीडियो का इस्तेमाल किया. समाज में बदनामी और परिवार टूटने के डर से व्यवसायी ने शुरुआत में चुपचाप पैसे दे दिए. व्यवसायी ने सोचा था कि इतनी बड़ी रकम देने के बाद मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. पुलिस ने जब पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि दिशा पहले भी इस मामले में जेल जा चुकी है.
जेल से आते ही दोबारा मांगी 50 लाख की रंगदारी
दिशा बाबला कुछ समय पहले ही कोर्ट से जमानत पर बाहर आई थी. बाहर आते ही उसने डिजिटल अपराध का अगला एपिसोड शुरू कर दिया. उसने व्यवसायी को दोबारा कॉल किया और इस बार 50 लाख रुपये की नई डिमांड रख दी. इसके साथ ही उसने पुरानी पुलिस शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और ऐसा न करने पर सारे एआई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी. इस बार दिशा की नजर व्यवसायी के करोड़ों रुपये के नए एआई प्रोजेक्ट पर भी थी. इससे परेशान होकर पीड़ित ने हिम्मत जुटाई और दोबारा महेश नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया.
जोधपुर से हुई गिरफ्तारी और पुलिस का बयान
शिकायत मिलते ही जयपुर साउथ के डीसीपी राजर्षि राज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया. पुलिस टीम ने जाल बिछाकर आरोपी दिशा बाबला को जोधपुर से गिरफ्तार कर लिया. डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि यह एक संगठित अपराध है. यह गैंग पूरी प्लानिंग के साथ शादीशुदा, अमीर और ऊंचे पदों पर बैठे कॉर्पोरेट लोगों को अपना शिकार बनाता है. पहले मीठी बातों में फंसाया जाता है और फिर एआई वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू होता है. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और बाकी पीड़ितों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कर रही है.
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