Responsive Scrollable Menu

AI बदलेगा बैंकों का भविष्य! Europe में हर 5 में से 1 कर्मचारी की Job जाएगी, Morgan Stanley की रिपोर्ट

मॉर्गन स्टैनली की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से यूरोप के बैंकों में अगले पांच वर्षों में 10 से 20 प्रतिशत तक कर्मचारियों की संख्या कम हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार इससे बैंकों को परिचालन खर्च में 4 से 9 प्रतिशत तक बचत होने की संभावना है।

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट जूलिया मियोटो की अगुवाई वाली विश्लेषकों की टीम ने तैयार की है। उनका कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में एआई तकनीक के इस्तेमाल से कई काम तेज और आसान हो जाएंगे, जिससे कम कर्मचारियों में भी काम चल सकेगा।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नौकरी में होने वाली कई कटौतियां सीधे छंटनी के रूप में नहीं होंगी। इनमें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और कर्मचारियों के खुद नौकरी छोड़ने जैसी स्थितियां भी शामिल हो सकती हैं।

बता दें कि एआई तकनीक केवल खर्च घटाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे बैंकों की कमाई बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक नई तकनीक ग्राहकों की जरूरत को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी। इससे बैंक यह तय कर सकेंगे कि किस ग्राहक को कौन सा वित्तीय उत्पाद ज्यादा उपयुक्त रहेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि जिन बैंकों के पास खुदरा बैंकिंग, बचत, बीमा और संपत्ति प्रबंधन जैसी सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं, उन्हें इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।

यूरोप के कई बड़े बैंक पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने अगले चार वर्षों में करीब 8 हजार सहायक पद खत्म करने की योजना का संकेत दिया है। वहीं एचएसबीसी बैंक भी लगभग 20 हजार नौकरियों में कटौती पर विचार कर रहा है।

गौरतलब है कि जर्मनी के कॉमर्जबैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेटिना ओरलोप ने भी कहा है कि आने वाले वर्षों में एआई तकनीक की मदद से बैंक लगभग 35 करोड़ यूरो तक की बचत कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक जहां काम को आसान और तेज बनाएगी, वहीं पारंपरिक नौकरियों पर दबाव भी बढ़ा सकती है। ग्राहक सेवा, दस्तावेज जांच और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में एआई तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

Continue reading on the app

AI Honeytrap Scam in Jaipur: जयपुर की हाईटेक हसीना ने एआई वीडियो से वसूले 90 लाख, ऐसे बुना था जाल

AI Honeytrap Scam in Jaipur: राजधानी जयपुर की भीड़भाड़ वाली सड़कों से दूर, महेश नगर थाना एक ऐसी शिकायत से हिल उठा जिसकी परतें खुलनी शुरू हुईं तो पुलिस भी चौंक गई. एक आईटी प्रोफेशनल महिला, जो बेहद सधी हुई और बेहद चालाक है, वह कॉर्पोरेट दुनिया में हनी ट्रैप की रानी बन चुकी थी. इस डिजिटल शिकारी का नाम दिशा बाबला है. दिशा ने जयपुर के एक नामी आईटी व्यवसायी विमल कुमार डागा की जिंदगी को अपने जाल में ऐसा घेरा कि वह पूरी तरह टूट गए. आरोपी महिला ने पिछले साल कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक का सहारा लेकर व्यवसायी से पूरे 90 लाख रुपये ऐंठ लिए थे.

AI वीडियो से बनाया ब्लैकमेलिंग का जाल

पीड़ित व्यवसायी विमल डागा ने पुलिस को बताया कि दिशा बाबला कभी उनके ऑफिस में इंटर्न के तौर पर काम करती थी. काम के दौरान उसने व्यवसायी के डिजिटल फुटप्रिंट्स हासिल किए. इसके बाद दिशा और उसके गैंग ने व्यवसायी को ब्लैकमेल करने के लिए एआई तकनीक से तैयार नकली फोटो और वीडियो का इस्तेमाल किया. समाज में बदनामी और परिवार टूटने के डर से व्यवसायी ने शुरुआत में चुपचाप पैसे दे दिए. व्यवसायी ने सोचा था कि इतनी बड़ी रकम देने के बाद मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. पुलिस ने जब पुराने रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि दिशा पहले भी इस मामले में जेल जा चुकी है.

जेल से आते ही दोबारा मांगी 50 लाख की रंगदारी

दिशा बाबला कुछ समय पहले ही कोर्ट से जमानत पर बाहर आई थी. बाहर आते ही उसने डिजिटल अपराध का अगला एपिसोड शुरू कर दिया. उसने व्यवसायी को दोबारा कॉल किया और इस बार 50 लाख रुपये की नई डिमांड रख दी. इसके साथ ही उसने पुरानी पुलिस शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और ऐसा न करने पर सारे एआई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी. इस बार दिशा की नजर व्यवसायी के करोड़ों रुपये के नए एआई प्रोजेक्ट पर भी थी. इससे परेशान होकर पीड़ित ने हिम्मत जुटाई और दोबारा महेश नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया.

जोधपुर से हुई गिरफ्तारी और पुलिस का बयान

शिकायत मिलते ही जयपुर साउथ के डीसीपी राजर्षि राज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया. पुलिस टीम ने जाल बिछाकर आरोपी दिशा बाबला को जोधपुर से गिरफ्तार कर लिया. डीसीपी राजर्षि राज ने बताया कि यह एक संगठित अपराध है. यह गैंग पूरी प्लानिंग के साथ शादीशुदा, अमीर और ऊंचे पदों पर बैठे कॉर्पोरेट लोगों को अपना शिकार बनाता है. पहले मीठी बातों में फंसाया जाता है और फिर एआई वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू होता है. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और बाकी पीड़ितों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कर रही है.

यह भी पढ़ें: AI का गंदा खेल! ‘टॉक्सिक’ एक्ट्रेस की बिकिनी वाली फेक तस्वीर-वीडियो वायरल, बोलीं- ‘ये प्राइवेसी का उल्लंघन है'

Continue reading on the app

  Sports

Lalit Modi का सनसनीखेज खुलासा: Sharad Pawar अध्यक्ष न बनते तो कभी नहीं शुरू हो पाता IPL

भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी और सबसे कमाई करने वाली प्रतियोगिता मानी जाने वाली इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत के पीछे किस तरह की राजनीतिक और प्रशासनिक लड़ाई चली थी, इसको लेकर अब ललित मोदी ने कई बड़े दावे किए हैं।
 
इंडियन प्रीमियर लीग के संस्थापक माने जाने वाले ललित मोदी ने हाल ही में एक बातचीत में बताया कि वर्ष 2005 में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के चुनावों में शरद पवार को अध्यक्ष बनवाने के लिए उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका कहना है कि अगर उस समय शरद पवार बोर्ड के अध्यक्ष नहीं बनते, तो इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत संभव नहीं हो पाती।

गौरतलब है कि इंडियन प्रीमियर लीग ने भारतीय क्रिकेट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी थी। इस प्रतियोगिता ने क्रिकेट को नए कारोबारी स्तर पर पहुंचाया और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड को दुनिया का सबसे ताकतवर क्रिकेट संगठन बना दिया। हालांकि ललित मोदी खुद लंबे समय से विवादों में रहे हैं, लेकिन इस प्रतियोगिता की नींव रखने में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार ललित मोदी ने बताया कि उस दौर में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के भीतर दो बड़े गुटों के बीच जबरदस्त संघर्ष चल रहा था। एक तरफ शरद पवार का समूह था, जबकि दूसरी तरफ जगमोहन डालमिया का प्रभाव बना हुआ था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव जीतने के लिए दोनों पक्षों के बीच लगातार रणनीति, दबाव और समर्थन जुटाने की कोशिशें चल रही थीं।

ललित मोदी के मुताबिक शुरुआती चुनाव में उनका पक्ष केवल एक वोट से हार गया था। उन्होंने दावा किया कि पुणे क्रिकेट संघ के भीतर मतभेद और आखिरी समय में बदले समर्थन के कारण यह हार हुई थी। इसके बाद अगले साल संघर्ष और भी ज्यादा बढ़ गया था।

बता दें कि ललित मोदी ने उस समय के कई बड़े क्रिकेट प्रशासकों के नाम भी लिए। उन्होंने दावा किया कि अनुराग ठाकुर, अरुण जेटली, एन श्रीनिवासन और राजीव शुक्ला जैसे कई प्रभावशाली लोग जगमोहन डालमिया के पक्ष में थे। हालांकि उन्होंने कहा कि लगातार संपर्क और रणनीति के जरिए उनके समूह ने आखिरकार बोर्ड के सदस्यों का भरोसा जीत लिया था।

गौरतलब है कि ललित मोदी ने वर्ष 2005 के चुनावों को भारतीय क्रिकेट प्रशासन का सबसे नाटकीय दौर बताया है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान अदालत तक मामला पहुंच गया था और सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की निगरानी में चुनाव कराने का आदेश लिया गया था। उनके अनुसार कोलकाता में हुई उस बैठक के दौरान भारी हंगामा हुआ था और पुलिस व्यवस्था तक करनी पड़ी थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई सदस्यों को होटल के कमरों में रोका गया और कुछ लोगों की उड़ानों तक का रास्ता बदल दिया गया था ताकि मतदान प्रभावित किया जा सके। ललित मोदी ने स्वीकार किया कि उनके समूह ने भी कुछ सदस्यों की उड़ानों को दूसरी जगह मोड़ने की रणनीति अपनाई थी। उनका कहना था कि उस समय यह चुनाव किसी बड़े राजनीतिक मुकाबले जैसा बन चुका था।

मौजूद जानकारी के अनुसार अंत में शरद पवार का समूह चुनाव जीतने में सफल रहा और उसी के बाद भारतीय क्रिकेट में बड़े बदलाव की शुरुआत हुई। ललित मोदी का दावा है कि यही वह मोड़ था, जहां से आधुनिक क्रिकेट की नई क्रांति शुरू हुई और बाद में इंडियन प्रीमियर लीग अस्तित्व में आई।

जानकारों का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग ने सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि खेल कारोबार, प्रसारण और खिलाड़ियों की कमाई के तरीके को भी पूरी तरह बदल दिया।
Fri, 29 May 2026 23:15:06 +0530

  Videos
See all

News Ki Pathshala | ऑपरेशन सिंदूर के वक्त तुर्की ने की धोखेबाजी | PM Modi Turkey Strategy | India | #tmktech #vivo #v29pro
2026-05-29T18:06:04+00:00

NEET Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट ने NTA को लगाई फटकार, जानिए कोर्ट रूम के अंदर क्या हुआ वकील ने बताया #tmktech #vivo #v29pro
2026-05-29T18:03:12+00:00

Kanpur ICU Wedding News: जिसने वीडियो देखा रो पड़ा.. 'ICU वाली शादी' में ऐसा क्या हुआ ? | Hindi News #tmktech #vivo #v29pro
2026-05-29T18:03:02+00:00

Road Accident: जोजिला की खतरनाक सड़क से सीधे खाई में गिरा ट्रक, मौत को छूकर निकला ड्राइवर! #tmktech #vivo #v29pro
2026-05-29T18:13:08+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers