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फ्लॉप का डर, अक्षय कुमार ने लिया भोजपुरी का सहारा:वल्गर लिरिक्स वाले गाने के बोल- रगड़के नहला देब साबुन से, ऐसे ही गाने से फंसे नोरा-संजय

फिल्म वेलकम टू द जंगल का गाना घिस घिस घिस आज रिलीज हो चुका है। ये एक भोजपुरी गाना है, जिसमें अक्षय कुमार भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह संग, वल्गर और डबल मीनिंग लिरिक्स पर थिरकते दिखे हैं। जाहिर तौर पर लगातार फ्लॉप फिल्में दे रहे अक्षय कुमार अब इस नई स्ट्रेटेजी के साथ भोजपुरी ऑडियंस को टारगेट करते हुए भोजपुरी स्टार्स का सहारा ले रहे हैं। अक्षय कुमार ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से फिल्म वेलकम टू द जंगल गाने की एक झलक शेयर की है। गाने के कैप्शन में अक्षय कुमार ने लिखा है, फटेगा स्पीकर और ब्रेक होगा पूरा डांस फ्लोर। घिस घिस घिस सॉन्ग आज रिलीज हो रहा है। एक नजर अक्षय कुमार के भोजपुरी गाने पर- फ्लॉप के डर से अक्षय कुमार ने लेनी पड़ी भोजपुरी स्टार्स की मदद! अक्षय कुमार लंबे समय से एक हिट फिल्म की तलाश में हैं। उनकी इस साल रिलीज हुई फिल्म भूत बंगला बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी है। इससे पहले 2025 में आईं उनकी फिल्में कनप्पा, स्काई फोर्स, हाउसफुल 5 और जॉली एलएल बी 3 भी कोई खास इम्पैक्ट नहीं छोड़ सकीं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अक्षय कुमार अब हिट की तलाश के लिए भोजपुरी स्टार्स और भोजपुरी गानों का सहारा ले रहे हैं। गाने के बारे में- फिल्म वेलकम टू द जंगल गाने का टाइटल है, घिस घिस घिस। गाने की लिरिक्स में रगड़के नहला देब साबुन से, होंठवा पे काटे जैसे मधुमक्खी, रगड़े जवानी जैसे भर-भर के, जैसे बोल इस्तेमाल किए गए हैं। गाने को विक्रम मोन्तरोज, सुप्रिया पाठक ने आवाज दी है, जबकि इसकी लिरिक्स अभिनव शेखर ने लिखी है। ऐसे ही गाने से फंसे संजय दत्त-नोरा फतेही नोरा फतेही और संजय दत्त भी एक ऐसे ही बोल वाले गाने सरके चुनरिया तेरी के चलते विवादों में हैं। दोनों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर समन भी किया गया और महिला आयोग द्वारा दोनों को फटकार भी लगाई गई है। महिला आयोग के सामने पेश हुए संजय दत्त और नोरा फतेही दोनों ने कहा कि उन्हें लिरिक्स की जानकारी नहीं थी। आयोग के सामने माफी मांगते हुए 50 आदिवासी बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई। वहीं दूसरी तरफ नोरा ने ऐलान किया कि वो अब से आइटम सॉन्ग में काम नहीं करेंगी। विवाद के बाद इस गाने को डिलीट किया गया था।

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पिता से उसेन बोल्ट के किस्से सुनकर धावक बने गुरिंदरवीर:स्मार्ट फोन से दूरी बनाई, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ते थे

25 साल के गुरिंदरवीर सिंह ने शनिवार को एथलेटिक्स फेडरेशन कप की 100 मीटर दौड़ 10.09 सेकेंड में पूरी कर भारत के सबसे तेज धावक बनने का रिकॉर्ड बनाया। साल 2008 में मशहूर धावक उसैन बोल्ट ने ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। तब 7 साल के गुरिंदरवीर सिंह TV पर यह देख रहे थे। बोल्ट को रिकॉर्ड बनाते देख वे प्रेरित हुए और तभी ठान लिया कि एक दिन भारत के सबसे तेज धावक बनकर देश का नाम रोशन करेंगे। कांस्टेबल पिता कमलजीत उन्हें अक्सर बोल्ट के किस्से सुनाते थे। 2 फोटो देखिए… लॉकडाउन में किराए पर होटल लेकर ट्रेनिंग की कोविड में ट्रैक और जिम बंद होने पर जालंधर में गुरिंदरवीर, कोच सरबजीत सिंह हैप्पी के साथ चोरी-छिपे स्थानीय पार्कों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ते थे। वे सुबह सुरक्षाकर्मियों की नजरों से बचकर ट्रैक पर पहुंचते, रनिंग ड्रिल पूरी कर लौट आते। कई बार ट्रेनिंग जारी रखने के लिए पटियाला में कुछ दिनों के लिए होटल किराए पर लेना पड़ता था। रूममेट बोला- 'फाइनल भी पूरा नहीं कर पाओगे', गोल्ड जीतकर जवाब दिया 2017 की एशियन यूथ चैम्पियनशिप से पहले गुरिंदरवीर ने 6 महीने तक स्मार्टफोन से दूरी बना ली थी। उनकी दुनिया सिर्फ अभ्यास और ट्रैक तक सीमित थी। लेकिन बैंकॉक में 100 मीटर हीट में वे आखिरी रहे तो ताने मिलने लगे। रूममेट तक कहने लगे कि फाइनल भी पूरा नहीं कर पाओगे। गुरिंदरवीर ने पिता कमलजीत सिंह को फोन कर कहा कि दूसरा-तीसरा रैंक शायद मिल जाए। यह सुन पिता बोले 'अगर सोच ही वही है, तो पहला कभी नहीं आएगा।' पिता की यही डांट प्रेरणा बनी और अगले दिन गुरिंदरवीर ने पहला रैंक हासिल कर गोल्ड जीत लिया। ------------------------------------- गुरिंदरवीर की यह खबर भी पढ़िए… गुरिंदरवीर 100 मीटर में भारत के सबसे तेज धावक, 10.09 सेकेंड में जीते रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में शनिवार भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। पंजाब के 25 साल के स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह ने एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता की पुरुषों की 100 मीटर रेस 10.09 सेकेंड में पूरी की और नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। यह पहली बार है, जब किसी भारतीय ने 100 मीटर रेस 10.10 सेकेंड से कम समय में पूरी की है। पढ़ें पूरी खबर

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  Sports

वैभव सूर्यवंशी की सफलता दबाव बना रही है, पर 'युगांतरकारी' आवाज कोई सुन रहा है? बिहार क्रिकेट के लिए बड़ा सवाल

Vaibhav Suryavanshi News: बिहार के समस्तीपुर के छोटे से कस्बे ताजपुर से निकला एक किशोर आज करोड़ों भारतीयों के सपनों को नई उड़ान दे रहा है. महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने जो कारनामा कर दिखाया है उसने साबित कर दिया है कि बिहार की धरती पर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ अवसर, समर्थन और सही दिशा की होती है. वैभव सूर्यवंशी अब केवल एक क्रिकेटर का नाम नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं के लिए उम्मीद का दूसरा नाम बन चुके हैं. वहीं, वैभव अब सरकार और शासन व्यवस्था पर दबाव बना रहे हैं कि... Sat, 30 May 2026 10:03:18 +0530

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