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मंदसौर में पेट्रोल पंप पर लूट की योजना बनाते 3 गिरफ्तार, अवैध हथियार भी बरामद

मंदसौर जिले की भानपुर थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने पेट्रोल पंप पर लूट की योजना बनाते हुए 3 शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं। लूट के दौरान यह जिस सामग्री का उपयोग करने वाले थे वह भी पुलिस ने जप्त की है।

जानकारी के मुताबिक यह तीनों आरोपी राजस्थान के रहने वाले हैं और जिले के एक पेट्रोल पंप पर लूट करने की योजना बना रहे थे। इनके दो अन्य साथी मौके से अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए हैं।

पेट्रोल पंप लूट की बना थे योजना

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक भानपुरा उप निरीक्षक बापू सिंह बामनिया को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि ग्राम करमदीखेड़ा स्थित इंडियन पेट्रोल पंप के पास बंद दुकानों के पीछे कुछ लोग लूट की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीणा के निर्देश एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामसनेही मिश्रा और एसडीओपी गरोठ विजय कुमार यादव के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी भानपुरा उप निरीक्षक विनय बुंदेला और टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। मौके पर दबिश देते हुए यहां से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

ये आरोपी गिरफ्त में

पुलिस ने कल्लू कंजर निवासी रेनखेड़ा रावतभाटा जिला चित्तौड़गढ़, दिनेश बागरी देवली कला जिला कोटा, बादल कंजर निवासी चेचट जिला कोटा को मौके से गिरफ्तार किया है। इस दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर राहुल बांछड़ा और रणजीत बांछड़ा नाम के दो युवक फरार हो गए हैं।

 

हथियार किए गए बरामद

पुलिस ने इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए, इनके पास से लूट ने इस्तेमाल किए जाने वाले अवैध हथियार बरामद किए हैं। जिसमें तलवार, लोहे का सरिया, लाल मिर्च पाउडर और दो लट्ठ शामिल है। इनके खिलाफ भारतीय दंड सहित की धारा 310(4), 310 (5) और 25 आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। फरार हुए दो युवकों की तलाश की जा रही है।

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Who is spreading Islamic radicalism in India? दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए कार बम धमाके को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक निगरानी टीम ने आधिकारिक तौर पर अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS से जोड़ दिया है. इस खुलासे के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर अल-कायदा भारत के पीछे क्यों पड़ा है. 

AQIS असल में है क्या, और यह संगठन देश की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा सिरदर्द बन चुका है.  आइए अब आपको इस बारे में सिलसिलेवार तरीके से समझाते हैं. 

अल-कायदा भारत को निशाना क्यों बनाता है?

भारत अल-कायदा की नजर में कोई नई एंट्री नहीं है. संगठन के तत्कालीन प्रमुख ओसामा बिन लादेन ने 1996 में ही जम्मू-कश्मीर और असम का जिक्र करते हुए भारत को निशाने पर रखने के संकेत दिए थे. ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद जब अयमान अल-जवाहिरी संगठन की कमान संभाली तो दक्षिण एशिया पर फोकस बढ़ाया गया ताकि इस्लामिक कट्टरपंथ की विचारधारा को इस क्षेत्र में फैलाया जा सके. इसके पीछे तर्क यह दिया जाता रहा है कि कश्मीर मुद्दा, धार्मिक टकराव और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को हथियार बनाकर भारत के मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से को भड़काया जा सकता है. संगठन समय-समय पर हिजाब विवाद, बाबरी मस्जिद और सांप्रदायिक घटनाओं का हवाला देकर अपने प्रचार तंत्र में भारत विरोधी नैरेटिव तैयार करता रहा है.

AQIS क्या है और यह कब बना?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने सितंबर 2014 में एक वीडियो जारी कर औपचारिक रूप से AQIS के गठन की घोषणा की थी. इस वीडियो में मकसद साफ नजर आया कि दक्षिण एशिया में अल-कायदा की विचारधारा को मजबूत करना है. बता दें आसिम उमर को इसका पहला प्रमुख बनाया गया था. जिसने बनते ही इस  पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज को अगवा करने की कोशिश और बांग्लादेश में प्रकाशकों पर हमलों जैसी वारदातों को अंजाम दिया.

AQIS अब तक भारत में क्या-क्या कर चुका है?

खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय तक यह संगठन सिर्फ प्रचार और भर्ती तक सीमित माना जाता रहा था. ये संगठन खासकर जम्मू-कश्मीर में एक्टिव था. लेकिन बीते कुछ वर्षों में इस संगठन ने झारखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी जड़ें मजबूत की हैं. इन राज्यों में इसके कई मॉड्यूल पकड़े भी गए हैं. बता दें रांची के एक रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर के AQIS से जुड़े होने और भर्ती में शामिल होने का मामला सामने आ चुका है तो झारखंड की नकाटा हिल पर ट्रेनिंग कैंप बनाने की कोशिश भी नाकाम की गई है. राजस्थान के भिवाड़ी में भी एक ट्रेनिंग कैंप को एनआईए और सुरक्षा एजेंसियों ने ध्वस्त किया था. वहीं, असम में बांग्लादेश सीमा के करीब भी इसके स्लीपर सेल सक्रिय पाए गए हैं.

रेड फोर्ट धमाके का AQIS से क्या संबंध है?

जानकारी के मुताबिक 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास एक कार में विस्फोट हुआ था. इस धमाके में करीब 11-15 लोगों की जान गई थी. जांच के बाद एनआईए ने इस मामले में अंसार गजवतुल हिंद नाम के संगठन से जुड़े 10 आरोपियों को अरेस्ट किया और उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. बता दें यह संगठन AQIS का ही सहयोगी माना जाता है. अब संयुक्त राष्ट्र की 38वीं निगरानी रिपोर्ट ने भी इस हमले को सीधे तौर पर AQIS से जोड़ दिया है. 

AQIS की कार्यशैली और रणनीति क्या है?

संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक AQIS अब बिखरे हुए एक छोटे गुट से आगे बढ़कर एक क्षेत्रीय आतंकी संगठन के तौर पर उभर रहा है. इसने अपने वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क मजबूत किए हैं और यह बड़े संगठित समूहों की बजाय छोटे, बिखरे और गुप्त सेल के जरिए काम करता है. यानी अगर एक सेल पकड़ी भी जाए तो बाकी नेटवर्क पर असर नहीं पड़ता. रिपोर्ट में यह चिंता भी जताई गई है कि AQIS बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल अपने नए ठिकाने बनाने के लिए करने की कोशिश कर रहा है और इसके नेतृत्व के कई सदस्य अफगानिस्तान के काबुल में मौजूद हैं जहां उन्हें कथित तौर पर वहां की स्थानीय पहचान से जुड़े दस्तावेज भी मुहैया कराए गए हैं जो तालिबान और AQIS के बीच करीबी तालमेल की तरफ इशारा करता है.

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क्या यह भारत के लिए बड़ा खतरा है?

विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. एक तबका मानता है कि दशकों की धमकियों के बावजूद AQIS भारत में बड़े पैमाने पर संगठित ढांचा खड़ा नहीं कर पाया है और उसकी ज्यादातर गतिविधियां अब तक प्रचार-प्रसार तक सीमित रही हैं. वहीं, दूसरी तरफ रेड फोर्ट धमाके ने यह साबित कर दिया है कि AQIS से जुड़े नेटवर्क अब सिर्फ बातों तक सीमित नहीं हैं बल्कि हमले करने की क्षमता भी रखते हैं. छोटे, बिखरे सेल में काम करने की रणनीति खुफिया एजेंसियों के लिए इसे पकड़ना मुश्किल बनाती है. इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे संगठन लंबे समय से रासायनिक और जैविक हथियार बनाने में दिलचस्पी रखते हैं भले ही अभी तक वे तकनीकी तौर पर सफल नहीं हो पाए हों.

भारत इस खतरे से कैसे निपट रहा है?

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार AQIS और उसके सहयोगी संगठनों के मॉड्यूल पर कार्रवाई कर रही हैं. अभी तक झारखंड, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में कई गिरफ्तारियां और ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त करने की कार्रवाई हो चुकी है. रेड फोर्ट धमाके के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें कर एजेंसियों को हर आरोपी तक पहुंचने के निर्देश दिए थे और मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं. बता दें एनआईए ने चार्जशीट दाखिल कर मामले की जांच जारी रखी है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.

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