मंगल से 1761 नमूनों की जांच कर 3943 रिपोर्ट भेज चुका है एपीएक्सएस, जानें कैसे काम करता है यह हाईटेक सेंसर
नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। मंगल ग्रह की सतह पर लगातार काम कर रहा कनाडा का अत्याधुनिक अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) अब तक 1761 नमूनों का विश्लेषण कर 3943 परिणाम पृथ्वी तक भेज चुका है। यह उपकरण अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के क्यूरियोसिटी रोवर पर लगाया गया है, जो पिछले कई सालों से लाल ग्रह की मिट्टी और चट्टानों की जांच में जुटा है।
कनाडाई स्पेस एजेंसी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट कर एपीएक्सएस से जुड़े अपडेट साझा किए, एजेंसी के मुताबिक, एपीएक्सएस वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर रहा है कि मंगल ग्रह की सतह किन तत्वों से बनी है और क्या वहां कभी जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं।
अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर आकार में लगभग रूबिक क्यूब (3डी पजल) जैसा दिखता है। यह क्यूरियोसिटी रोवर की रोबोटिक भुजा के सिरे पर लगा हुआ है। जब रोवर किसी चट्टान या मिट्टी के नमूने के पास पहुंचता है, तब यह उपकरण उस नमूने के करीब जाकर उस पर एक्स-रे और अल्फा कणों की बौछार करता है। इसके बाद नमूने से निकलने वाली एनर्जी का अध्ययन कर वैज्ञानिक उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, एपीएक्सएस किसी नमूने में मौजूद सूक्ष्म से सूक्ष्म तत्व की पहचान करने में सक्षम है। किसी नमूने का विस्तृत विश्लेषण करने में इसे करीब दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि त्वरित जांच लगभग 10 मिनट में पूरी हो जाती है। यही कारण है कि यह उपकरण मंगल ग्रह की सतह पर लगातार महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी जुटा रहा है।
साल 2024 में एपीएक्सएस ने एक बड़ी खोज में अहम भूमिका निभाई थी। क्यूरियोसिटी रोवर के एक चट्टान के ऊपर से गुजरने पर वह टूट गई थी, जिसके अंदर वैज्ञानिकों को शुद्ध सल्फर के क्रिस्टल मिले। मंगल ग्रह पर पहली बार इस तरह के क्रिस्टल मिलने से वैज्ञानिक काफी उत्साहित हुए थे। माना जा रहा है कि इस खोज से मंगल के पुराने वातावरण और वहां मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।
कनाडाई स्पेस एजेंसी ने बताया कि एपीएक्सएस दिन और रात दोनों समय लगातार काम कर सकता है। यह उपकरण एक थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से संचालित होता है, जो एनर्जी पैदा करता है। इसी वजह से क्यूरियोसिटी रोवर को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वह मंगल की कड़ाके की सर्दियों में भी सक्रिय रहता है।
1 फरवरी 2026 तक क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह की सतह पर 36.2 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है। इस दौरान एपीएक्सएस ने हजारों वैज्ञानिक आंकड़े जुटाकर पृथ्वी तक पहुंचाए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन जानकारियों से भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की तैयारी और वहां जीवन की संभावनाओं को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।
कनाडा ने इस मिशन में अपनी भागीदारी मार्च 2029 तक बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में एपीएक्सएस से और भी महत्वपूर्ण खोजों की उम्मीद की जा रही है।
--आईएएनएस
एमटी/पीएम
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Bakrid 2026: देशभर में आज मनाई जा रही बकरीद 2026, देखें तस्वीरें, जानें ईद-उल-अजहा का महत्व
Bakrid 2026: आज पूरे देश में ईद-उल-अजहा का पर्व मनाया जा रहा है. भारत में इसे बकरीद भी कहते हैं. इस्लाम धर्म का यह खास त्योहार होता है. ईद-उल-अजहा को कुर्बानी वाली ईद के नाम से भी जाना जाता है. इस ईद पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है. इस्लामी कैलेंडर हिजरी के अनुसार, आखिरी महीने जिल-हिज्जा की 10 तारीख पर मनाया जाता है. ईद को मुख्य रूप से त्याग, प्रेम, समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास के लिए मनाया जाता है.
देशभर में मनाई गई बकरीद 2026
#WATCH | Tamil Nadu | A massive gathering of devotees offers the morning Namaz at Coimbatore on the occassion of Eid al-Adha (Bakrid). pic.twitter.com/M7xlKhZA4s
— ANI (@ANI) May 28, 2026
तमिलनाडु में ईद-उल-अजहा के मौके पर कोयंबटूर में सुबह की नमाज पढ़ते हुए श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़.
#WATCH | Jaipur, Rajasthan: A massive gathering of devotees offer namaz at the Eidgah, located at Delhi Road, on the occasion of Eid al-Adha. pic.twitter.com/4ZY2vy3Dv6
— ANI (@ANI) May 28, 2026
जयपुर में भी ईदगाह पर बकरीद की नमाज पढ़ी गई.
#WATCH | BJP leader Mukhtar Abbas Naqvi offers namaz in Delhi on the occasion of Eid al-Adha. pic.twitter.com/vgSBAJgHn2
— ANI (@ANI) May 28, 2026
बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी के घर ईद की नमाज अदा करते दिखे लोग.
#WATCH | Assam: A massive gathering of devotees offers the morning Namaz at Sijubari Eidgah in Guwahati on the occassion of Eid al-Adha. pic.twitter.com/TXDJmDuFJ8
— ANI (@ANI) May 28, 2026
#WATCH | Uttar Pradesh | A massive gathering of devotees offer namaz at Moradabad on the occasion of Eid al-Adha. pic.twitter.com/cXpKkDeAaA
— ANI (@ANI) May 28, 2026
ईद-उल-अजहा का इतिहास और महत्व
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, ईद-उल-अजहा का संबंध हजरत इब्राहिन और उनके बेटे हजरत इस्माइल के कड़े इम्तिहान से है. मान्यता है कि अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनसे उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी थी. हजरत इब्राहिम के सबसे अजीज उनके बेटे यानी कि हजरत इस्माइल थे. अल्लाह के हुक्म का पालन करेन के लिए हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया. जैसे ही उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी के लिए गर्दन पर छुरी रखी तो अल्लाह ने उनकी ईमानदारी को कुबूल कर लिया. अपने फरिश्ते के जरिए उन्होंने हजरत इस्माइल की जगह एक दुंबे यानी की भेड़ को रख दिया. इस पल को ऐतिहासिक माना जाने लगा. इसलिए, इसकी याद में हर साल दुनियाभर में मुसलमान समुदाय के लोग अल्लाह की राह में जानवरों की हलाल कुर्बानी देते हैं.
#WATCH | Uttarakhand: On the occasion of Eid al-Adha, Muslim devotees offer namaz at the Eidgah located on Chakrata Road in Dehradun. pic.twitter.com/tTXl10YaAc
— ANI (@ANI) May 28, 2026
Kolkata, West Bengal: People offer Eid-ul-Adha prayers at Red Road pic.twitter.com/qSo5Z2s8gE
— IANS (@ians_india) May 28, 2026
हज और बकरीद का क्या संबंध?
ईद-उल-अजहा का पर्व हज यात्रा के समापन के रूप में मनाया जाता है. मक्का में हज के नियम पूरे होने के बाद पूरी दुनिया से आए मुसलमान अपनी इबादत को मुकम्मल करते हैं.
Jamshedpur, Jharkhand: People offer Eid-ul-Adha prayers at mosques pic.twitter.com/L9tNmHdPiU
— IANS (@ians_india) May 28, 2026
Muzaffarnagar, Uttar Pradesh: People offered Eid-ul-Adha prayers at Eidgah in Muzaffarnagar pic.twitter.com/25hKNmMNGB
— IANS (@ians_india) May 28, 2026
कैसे मनाया जाता है यह पर्व?
ईद के दिन सुबह सभी मुसलमान नहा-धोकर नए साफ-सुथरे कपड़े पहनता है. इसके बाद ईदगाह या मस्जिद में जाकर इक्ट्ठा होते हैं और वहां नमाज अदा करते हैं. नमाज के बाद अमन-चैन और खुशहाली की दुआएं मांगते हैं. नमाद के बाद ईद-उल-अजहा पर ऊंट, बकरा, भेड़ और अन्य कुर्बानी वाले जानवरों की कुर्बानी होती है. जानवरों से पाया गोश्त सिर्फ अपने पास नहीं रखना होता है बल्कि गरीबों और जरूरतमंदों को बांटा जाता है. इस गोश्त के भी तीन हिस्से होते हैं.
- पहला- गरीबों और जरूरतमंदों को
- दूसरा- रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों को
- तीसरा- अपने परिवार के लिए
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