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Global Health Emergency!! अफ्रीका में 'इबोला' का घातक प्रकोप, संकट के बीच भारत ने कांगो भेजी आपातकालीन चिकित्सा सामग्री की बड़ी खेप

मध्य अफ्रीका में जानलेवा इबोला (इबोला) वायरस का प्रकोप तेजी से पैर पसार रहा है। इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट से निपटने और इंसानी जिंदगियों को बचाने के लिए भारत ने एक बार फिर 'वैश्विक मित्र' की भूमिका निभाई डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) को आपातकालीन चिकित्सा दवाओं और उपकरणों की एक बड़ी खेप दिखाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कांगो और युगांडा में इबोला के बढ़ते मामलों को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद भारत की यह त्वरित सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Africa CDC के अनुसार, इस सहायता पैकेज में ज़रूरी जांच उपकरण, इलाज की दवाएं, संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए ज़रूरी सामान, और मरीज़ों के इलाज के लिए ज़रूरी सामग्री शामिल है।

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एजेंसी ने इस खेप के पहुंचने का सार्वजनिक रूप से स्वागत करते हुए कहा, "Africa CDC भारत सरकार और भारत की जनता द्वारा उदारतापूर्वक दान की गई आपातकालीन चिकित्सा सामग्री के आगमन का स्वागत करता है। यह सामग्री DR कांगो में बुंडीबुग्यो इबोला के प्रकोप से निपटने के चल रहे प्रयासों में मदद करेगी।" एजेंसी ने भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत "पूरे महाद्वीप में लोगों की जान बचाने और स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार अपना समर्थन और प्रतिबद्धता दिखा रहा है।"
 

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बुंडीबुग्यो स्ट्रेन और बढ़ती चिंताएं
बुंडीबुग्यो वेरिएंट, जो इबोला वायरस की छह ज्ञात प्रजातियों में से एक है, ने 2007 में युगांडा में पहली बार पहचाने जाने के बाद से अफ्रीका में कई बार प्रकोप फैलाया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि इस खास स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई भी स्वीकृत टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। इबोला संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों, दूषित वस्तुओं या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके लक्षणों में अक्सर बुखार, गंभीर उल्टी, दस्त और शरीर के अंदर या बाहर रक्तस्राव शामिल होते हैं।

इंसानों में संक्रमण तब फैलना शुरू हो सकता है, जब वे संक्रमित जंगली जानवरों—जैसे फल खाने वाले चमगादड़, गोरिल्ला, चिंपांज़ी, जंगली हिरण या बंदर—के खून या शारीरिक स्रावों के संपर्क में आते हैं। ये जानवर अक्सर वर्षावनों वाले इलाकों में मृत या बीमार पाए जाते हैं।

क्षेत्रीय स्वास्थ्य आपातकाल का बढ़ता खतरा
भारत का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब उसने अफ्रीका के साथ अपने स्वास्थ्य सहयोग को और मज़बूत किया है। यह सहयोग विशेष रूप से COVID-19 महामारी जैसे बड़े स्वास्थ्य संकटों के दौरान दवाइयों और टीकों के रूप में सहायता प्रदान करने पर केंद्रित रहा है। WHO ने हाल ही में कांगो और युगांडा में इबोला के बढ़ते प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (Public Health Emergency of International Concern) घोषित किया है।

अब तक 1,000 से अधिक संदिग्ध संक्रमणों और कम से कम 220 मौतों की सूचना मिली है, जिनमें से युगांडा में सात मामलों की पुष्टि हुई है। WHO और मानवीय सहायता समूह, दोनों ने ही चेतावनी दी है कि इबोला का वास्तविक प्रसार मौजूदा आंकड़ों से कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।
 

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मंगल से 1761 नमूनों की जांच कर 3943 रिपोर्ट भेज चुका है एपीएक्सएस, जानें कैसे काम करता है यह हाईटेक सेंसर

नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। मंगल ग्रह की सतह पर लगातार काम कर रहा कनाडा का अत्याधुनिक अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (एपीएक्सएस) अब तक 1761 नमूनों का विश्लेषण कर 3943 परिणाम पृथ्वी तक भेज चुका है। यह उपकरण अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के क्यूरियोसिटी रोवर पर लगाया गया है, जो पिछले कई सालों से लाल ग्रह की मिट्टी और चट्टानों की जांच में जुटा है।

कनाडाई स्पेस एजेंसी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट कर एपीएक्सएस से जुड़े अपडेट साझा किए, एजेंसी के मुताबिक, एपीएक्सएस वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर रहा है कि मंगल ग्रह की सतह किन तत्वों से बनी है और क्या वहां कभी जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं।

अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर आकार में लगभग रूबिक क्यूब (3डी पजल) जैसा दिखता है। यह क्यूरियोसिटी रोवर की रोबोटिक भुजा के सिरे पर लगा हुआ है। जब रोवर किसी चट्टान या मिट्टी के नमूने के पास पहुंचता है, तब यह उपकरण उस नमूने के करीब जाकर उस पर एक्स-रे और अल्फा कणों की बौछार करता है। इसके बाद नमूने से निकलने वाली एनर्जी का अध्ययन कर वैज्ञानिक उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, एपीएक्सएस किसी नमूने में मौजूद सूक्ष्म से सूक्ष्म तत्व की पहचान करने में सक्षम है। किसी नमूने का विस्तृत विश्लेषण करने में इसे करीब दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि त्वरित जांच लगभग 10 मिनट में पूरी हो जाती है। यही कारण है कि यह उपकरण मंगल ग्रह की सतह पर लगातार महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी जुटा रहा है।

साल 2024 में एपीएक्सएस ने एक बड़ी खोज में अहम भूमिका निभाई थी। क्यूरियोसिटी रोवर के एक चट्टान के ऊपर से गुजरने पर वह टूट गई थी, जिसके अंदर वैज्ञानिकों को शुद्ध सल्फर के क्रिस्टल मिले। मंगल ग्रह पर पहली बार इस तरह के क्रिस्टल मिलने से वैज्ञानिक काफी उत्साहित हुए थे। माना जा रहा है कि इस खोज से मंगल के पुराने वातावरण और वहां मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

कनाडाई स्पेस एजेंसी ने बताया कि एपीएक्सएस दिन और रात दोनों समय लगातार काम कर सकता है। यह उपकरण एक थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से संचालित होता है, जो एनर्जी पैदा करता है। इसी वजह से क्यूरियोसिटी रोवर को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वह मंगल की कड़ाके की सर्दियों में भी सक्रिय रहता है।

1 फरवरी 2026 तक क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह की सतह पर 36.2 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है। इस दौरान एपीएक्सएस ने हजारों वैज्ञानिक आंकड़े जुटाकर पृथ्वी तक पहुंचाए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन जानकारियों से भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशनों की तैयारी और वहां जीवन की संभावनाओं को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।

कनाडा ने इस मिशन में अपनी भागीदारी मार्च 2029 तक बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में एपीएक्सएस से और भी महत्वपूर्ण खोजों की उम्मीद की जा रही है।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

Video: वैभव के अटैक पर बजाईं तालिया, सनराइजर्स हैदराबाद की हार पर फूटे आंसू! काव्या मारन का टूटा दिल

राजस्थान रॉयल्स के 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 एलिमिनेटर में ऐसा तूफान मचाया कि पूरी दुनिया उनकी बल्लेबाजी की दीवानी हो गई। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुल्लांपुर में खेले गए मुकाबले में वैभव ने सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन ठोक दिए और राजस्थान को 47 रन की बड़ी जीत दिलाकर क्वालिफायर-2 में पहुंचा दिया।

मैच के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस पल की हुई, वह था सनराइजर्स हैदराबाद की ओनर काव्या मारन का वैभव सूर्यवंशी को बधाई देना। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में काव्या मारन मैच खत्म होने के बाद वैभव से हाथ मिलाती और उनसे थोड़ी देर बातचीत करती नजर आईं।

दरअसल, पूरे मैच के दौरान कैमरे बार-बार काव्या मारन के रिएक्शन दिखा रहे थे। हैदराबाद के गेंदबाजों की लगातार पिटाई और फिर बल्लेबाजी के बिखरने के बाद काव्या काफी निराश और भावुक दिखाई दीं। लेकिन हार के बावजूद उन्होंने युवा बल्लेबाज की तारीफ कर खेल भावना का शानदार उदाहरण पेश किया।

वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही हैदराबाद के गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। कप्तान पैट कमिंस लगातार फील्ड बदलते रहे, गेंदबाजों से चर्चा करते रहे और नई-नई रणनीति अपनाते रहे, लेकिन वैभव के सामने कोई योजना काम नहीं आई। कभी यॉर्कर डाली गई, कभी बाउंसर, तो कभी स्लोअर गेंदों से उन्हें रोकने की कोशिश हुई, लेकिन वैभव हर अंदाज में रन बरसाते रहे।

फुल लेंथ गेंदों को उन्होंने सीधे साइटस्क्रीन के पार पहुंचाया जबकि छोटी गेंदों को स्क्वायर लेग और मिडविकेट के ऊपर से स्टैंड में भेज दिया। पैड्स पर आई गेंदों को भी उन्होंने बड़ी आसानी से बाउंड्री के बाहर पहुंचाया।

जब तक वैभव आउट हुए, तब तक वह 12 छक्के और 5 चौके जड़ चुके थे। उनका स्ट्राइक रेट 334 से ज्यादा का रहा। वह IPL इतिहास का सबसे तेज शतक लगाने से सिर्फ 3 रन दूर रह गए।

दूसरी तरफ, SRH की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। 244 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम ने सिर्फ 5 ओवर में 57 रन पर 4 विकेट गंवा दिए। जोफ्रा आर्चर की तेज गेंदबाजी ने मैच वहीं लगभग खत्म कर दिया। मैच के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने काव्या मारन को ट्रोल भी किया, लेकिन ज्यादातर फैंस ने वैभव को बधाई देने वाले उनके व्यवहार की तारीफ की। क्रिकेट फैंस का मानना है कि हार के बाद भी विरोधी खिलाड़ी का सम्मान करना ही असली खेल भावना होती है।

Thu, 28 May 2026 10:11:56 +0530

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