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'ये भगवान की इच्छा थी...' कपिल देव की तरह तेज गेंदबाज बनना चाहते थे हरभजन सिंह फिर कैसे बन गए स्पिनर, जानिए पूरी कहानी

Harbhajan Singh : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बताया है कि, वो शुरुआत में स्पिन गेंदबाज बनना नहीं चाहते थे. वो कपिल देव की तरह एक तेज गेंदबाज बनना चाहते थे. फिर वो स्पिनर कैसे बनने इस बारे में आज हम आपको बताने वाले हैं. इसके साथ ही अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर में हरभनज को किस बात का मलाल रह गए है, इसके बारे में भी हम आपको इस आर्टिकल में विस्तार से बताने वाले हैं. तो आइए हरभजन सिंह ने पीटीआई से बात करते हुए क्या कहा है, इस बारे में जानते हैं.

स्पिनर नहीं बनना चाहते थे हरभजन सिंह

हरभजन सिंह ने कपिल देव के बारे में कहा कि, 'मैं कपिल पाजी (कपिल देव) जैसा बनना चाहता था, लेकिन मेरे पास उसके लिए फिजीक नहीं थी. किसी ने मुझसे कहा कि मुझे स्पिनर बनना चाहिए. सच कहूं तो, मुझे उस समय यह भी नहीं पता था कि स्पिन बॉलिंग क्या होती है, लेकिन जब किसी ने कहा, तो यह आइडिया मेरे दिमाग में ही रहा और मैंने बॉल को थोड़ा स्पिन करने की कोशिश शुरू कर दी. मुझे यह भी नहीं पता था कि बॉल को ठीक से कैसे पकड़ा जाता है. गुरशरण, जो अभी भी मेरे पड़ोस में रहते हैं, उन्होंने ही मुझे सलाह दी थी. तो उस सलाह के लिए गुच्ची पाजी, आपका धन्यवाद'.

हरभजन सिंह को किस बात का दुख

हरभजन सिंह ने आगे कहा कि, 'काश मैंने इंटरनेशनल लेवल पर बैटिंग को थोड़ा और सीरियसली लिया होता. जब मैं क्रिकेट में आया, तो मैं बॉल को अच्छी तरह से हिट कर सकता था, लेकिन मैं अक्सर बहुत जल्दी में रहता था. अगर मैंने थोड़ा और सब्र दिखाया होता, तो मैं दोगुने रन बना सकता था. अपने करियर के बाद के हिस्सों में मैंने इसे थोड़ा और सीरियसली लिया. मैंने लगातार दो सेंचुरी बनाईं और कुछ रिकॉर्ड बनाने में कामयाब रहा. मैंने बॉलिंग को पूरे डेडिकेशन के साथ किया अगर मैंने अपनी बैटिंग के लिए उस कमिटमेंट का 15 परसेंट भी दिया होता, तो मैं और ज्यादा रन बना पाता और टीम को और ज्यादा मैच जिताने में मदद कर पाता'.

हरभजन ने भगवान को किया धन्यवाद 

हरभजन सिंह ने कहा कि, 'मेरा मानना ​​है कि मुझे चुना गया था, चाहे वह 100 टेस्ट मैच खेलना हो या टेस्ट हैट्रिक लेने वाला पहला भारतीय बनना हो. यह भगवान की इच्छा थी, उनका आशीर्वाद था और मेरे परिवार का आशीर्वाद था. मुझे सच में भगवान के प्लान पर विश्वास है, मैंने एक दोहा भी सोचा था. "यह कितना बड़ा वेहम था कि मैं अहम था, खुदा के बंदे, उस वाहेगुरु का शुक्रिया कर, यह तो उसका तेरे ऊपर रहम था".

हरभजन सिंह ने आगे कहा कि, 'सब कुछ ऊपर वाला करता है. हम तो बस चुने हुए हैं. मैं हर चीज के लिए बहुत शुक्रगुजार हूं. आज भी, मैं आपसे बात कर रहा हूं, सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी एजेंसी में बैठकर, एजेंसी के टॉप हेड से बात कर रहा हूं. ये सब भी भगवान की देन है'.

हरभनज सिंह का इंटरनेशनल करियर

हरभजन सिंह ने भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने अपना डेब्यू 1998 में किया था. उन्होंने भारत के लिए 2016 तक क्रिकेट खेला था. वो भारत के लिए 367 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं. उन्होंने भारत के लिए 711 विकेट हासिल किए हैं. इसके साथ ही बल्ले से हरभजन ने 3569 रन बनाए हैं.

ये भी पढ़ें : ‘क्रिकेट से ज्यादा पैसा कमाने पर ध्यान’, पूर्व चीफ सिलेक्टर ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लताड़ा; मैनेजमेंट पर भी उठाए सवाल

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एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस सहित शामिल हुए 4 नए शेयर, 3 बाहर

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई (मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल) ने अपनी अगस्त 2026 की आवधिक समीक्षा के तहत अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस समेत चार कंपनियों को एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में शामिल किया है, जबकि तीन कंपनियों को इंडेक्स से बाहर कर दिया गया है। ये बदलाव 31 अगस्त 2026 के कारोबार समाप्त होने के बाद प्रभावी होंगे।

एमएससीआई के अनुसार, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के अलावा जिन अन्य कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया गया है, वे पूंजी बाजार (कैपिटल मार्केट) और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं। हालांकि इंडेक्स से बाहर की गई कंपनियों के नाम इस घोषणा में नहीं बताए गए।

एमएससीआई की यह समीक्षा बाजार पूंजीकरण, लिक्विडिटी और फ्री-फ्लोट जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर की जाती है। इसी आधार पर तय किया जाता है कि कौन-सी कंपनियां इंडेक्स का हिस्सा बनी रहेंगी और किन्हें इसमें शामिल या बाहर किया जाएगा।

इस समीक्षा के साथ एमएससीआई इंडिया डोमेस्टिक स्मॉल कैप इंडेक्स में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। इस इंडेक्स में 12 नए शेयर जोड़े गए हैं, जबकि 19 शेयरों को हटाया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर इंडेक्स में सात कंपनियों की शुद्ध कमी हुई है।

एमएससीआई इंडेक्स को दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक और पैसिव फंड बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इंडेक्स में शामिल होने या बाहर होने वाली कंपनियों के शेयरों में अक्सर निवेशकों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इंडेक्स में बदलाव के बाद कई वैश्विक फंड अपने पोर्टफोलियो को नए भार के अनुसार पुनर्संतुलित करते हैं, जिससे संबंधित शेयरों में निवेश प्रवाह देखने को मिलता है।

एमएससीआई के मुताबिक, उसका भारत केंद्रित सूचकांक भारतीय शेयर बाजार के लगभग 85 प्रतिशत इक्विटी यूनिवर्स का प्रतिनिधित्व करता है। भारत में निवेश करने वाले कई अंतरराष्ट्रीय निवेशक और वैश्विक फंड इसी सूचकांक को प्रमुख मानक के रूप में देखते हैं।

इससे पहले जून में आई एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि एमएससीआई समीक्षा के बाद भारतीय शेयर बाजार में लगभग 30,214 करोड़ रुपए का पैसिव निवेश प्रवाह आ सकता है। उस रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई थी कि कुछ फार्मा कंपनियां एमएससीआई इंडिया स्मॉल कैप इंडेक्स से आगे बढ़कर एमएससीआई इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल हो सकती हैं।

एमएससीआई की घोषणा के बाद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। बीएसई पर कंपनी के शेयर शुरुआती कारोबार में 2.24 प्रतिशत तक उछलकर 1,638 रुपए के इंट्रा-डे उच्च स्तर पर पहुंच गए।

स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के शेयर ने पिछले 52 सप्ताह में 1,789 रुपए का उच्चतम स्तर और 745.45 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है।

लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न देता रहा है।

पिछले 5 वर्षों में शेयर करीब 64 प्रतिशत, जबकि पिछले 3 वर्षों में लगभग 90 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं बीते एक वर्ष में इसने निवेशकों की पूंजी लगभग दोगुनी कर दी है, और करीब 100 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

Gautam Gambhir को भज्जी की सलाह: Rohit-Virat के Experience पर जताएं भरोसा, उम्र नहीं Performance है पैमाना

भारत के महान स्पिनर हरभजन सिंह ने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि अगर लियोनेल मेस्सी खेल सकते हैं, तो विराट कोहली और रोहित शर्मा क्यों नहीं? उन्होंने इन दोनों दिग्गज खिलाड़ियों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर उनमें खेलने की प्रतिबद्धता है तो वे अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप में खेल सकते हैं। पीटीआई के मुख्यालय में एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में 46 वर्षीय पूर्व ऑफ स्पिनर ने रोहित और कोहली के भविष्य को लेकर चल रही अंतहीन बहस पर अपने विचार व्यक्त किए।

यह दोनों खिलाड़ी 35 वर्ष से अधिक उम्र के हैं और अब केवल एक ही प्रारूप में खेलते हैं। हरभजन ने साक्षात्कार के दौरान यह भी खुलासा किया कि उनकी आत्मकथा तैयार है और उसके इस वर्ष के आखिर में प्रकाशित होने की उम्मीद है। हरभजन ने कहा, ‘‘खिलाड़ी कोई भी हो, मेरा मानना ​​है कि मापदंड प्रदर्शन होना चाहिए, उम्र नहीं।’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्व कप में वैभव सूर्यवंशी जैसे होनहार लेकिन अपेक्षाकृत अनुभवहीन युवा खिलाड़ी की तुलना में कोहली और रोहित पर उम्मीदों का कहीं अधिक बोझ होगा। रोहित और कोहली ने अब तक जो प्रतिबद्धता दिखाई है, उसे देखते हुए हरभजन ने कहा कि वे वही कर सकते हैं जो 39 वर्षीय मेस्सी ने हाल ही में हुए फुटबॉल विश्व कप में दिखाया था।

मेस्सी ने अपने व्यक्तिगत कौशल के दम पर अर्जेंटीना को फाइनल तक पहुंचाया था। जब भी वह गेंद लेकर आगे बढ़ते तो विरोधी टीम की रक्षापंक्ति को भेद देते थे। जब अगले साल दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में वनडे विश्व कप होगा, तब रोहित 40 साल और कोहली 39 साल केहो जाएंगे। हरभजन ने कहा, ‘‘विराट भले ही 39 साल के हों, लेकिन अगर वह अभी भी मैदान पर 20 साल के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ रहे हैं, तो उनकी उम्र मायने नहीं रखती। लियोनेल मेस्सी को ही देख लीजिए। 40 (39) साल की उम्र में भी पांच खिलाड़ी उन्हें रोक नहीं पाते। अगर किसी खिलाड़ी के पास ऐसी फिटनेस और कौशल हो कि पांच विरोधी भी उसे रोक न सकें, तो हम जानते हैं कि कौशल ही सर्वोपरि है।’’

हरभजन ने कोहली को श्रेय देते हुए कहा कि उन्होंने खिलाड़ियों को लगातार यह कहकर जीत का आत्मविश्वास जगाया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिटनेस के मामले में कोहली ने ही उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उन्हें यह अहसास दिलाया कि उनकी क्षमता उनकी सोच से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, ‘‘यह बदलाव सबसे पहले विराट कोहली 2014-15 में कप्तान बनने के बाद लाए थे। उससे पहले हम यह नहीं सोचते थे कि हम आखिरी दिन 400 रन का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।

विराट ने अपने साथियों से कहा, ‘चलो कम से कम कोशिश तो करते हैं। हम हार सकते हैं, लेकिन अगर हम कोशिश करते रहेंगे तो एक दिन हम आखिरी पारी में 400 से अधिक रन जरूर बना लेंगे।’’ हरभजन ने कहा, ‘‘अगर हमें आखिरी दिन 10 विकेट लेने हों, तो हम इसके लिए पूरी कोशिश करेंगे। जीतने की मानसिकता और ड्रॉ से संतुष्ट न होने का जज़्बा विराट कोहली में है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान फिटनेस संस्कृति को बढ़ावा देना था। फिटनेस क्रांति लाने का 90 प्रतिशत श्रेय कोहली को जाता है।

फिटनेस के बारे में मेरी धारणा सहनशक्ति थी, लेकिन विराट ने इस टीम को यह विश्वास दिलाया कि अगर आप फिट हैं, तो आप हवा में उड़ सकते हैं।’’ इसलिए हरभजन की मुख्य कोच गौतम गंभीर को सलाह है कि वे इन दोनों खिलाड़ियों के अनुभव पर भरोसा करें। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं कोच होता तो मेरा काम उन्हें मंच प्रदान करना होता, क्योंकि रोहित और विराट से मेरी अपेक्षाएं वैभव सूर्यवंशी से कहीं अधिक होतीं। इन दोनों के पास अनुभव है। इनके पास 300 मैचों का अनुभव है जो सूर्यवंशी के पास नहीं है। यह जरूर है सूर्यवंशी आकर गेंदबाजों की जमकर धुनाई कर सकते हैं, लेकिन विराट और रोहित के पास वो अनुभव है।’’

हरभजन ने कहा, ‘‘फिटनेस हमारी प्राथमिकता है और प्रदर्शन मायने रखता है। प्रदर्शन ही अंतिम मापदंड है। इसलिए यदि ये दोनों खिलाड़ी रन बना सकते हैं और श्रेयस (अय्यर) या यशस्वी (जायसवाल) जैसी फिटनेस रखते हैं तो बाकी कुछ भी मायने नहीं रखता।’’ जालंधर के रहने वाले हरभजन ने अपने शानदार करियर में टेस्ट क्रिकेट में 416 और वनडे क्रिकेट में 269 विकेट लिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी आमतौर पर जानते हैं कि उन्हें अपने करियर को कब समाप्त करना है। उन्होंने याद किया कि कैसे उनके शरीर ने उन्हें संन्यास लेने की औपचारिक घोषणा करने से पूरे छह साल पहले ही रुकने का संकेत दे दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘रोहित और विराट को इसका जवाब अपने भीतर से ही मिलेगा। आपको तब अहसास होता है जब आप उस मुकाम पर पहुंच जाते हैं जहां आपको संन्यास लेना पड़ता है।’’ हरभजन ने आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2021 में संन्यास लिया, लेकिन उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2015 में गॉल में श्रीलंका के खिलाफ खेला था, जहां दिनेश चांदीमल ने उनकी गेंद की जमकर धुनाई की थी जिससे उन्हें अहसास हुआ कि शायद लाल गेंद के क्रिकेट को अलविदा कहने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘आपको तब अहसास होता है जब आप उस मुकाम पर पहुंच जाते हैं जहां अगर आपको खेलना जारी रखना है, तो आपको पहले से ज्यादा मेहनत करनी होगी। आप 35 साल से अधिक उम्र के हैं और आपसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि आप वही करें जो आप 18 या 20 साल की उम्र में करते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उस समय आपके नाम पर 400 विकेट दर्ज होते हैं और आपसे उसी स्तर का प्रदर्शन करने की अपेक्षा की जाती है। कई खिलाड़ी प्रदर्शन में आई गिरावट से उबर सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होंगे जिन्हें लगेगा, ‘बस अब बहुत हो गया।’ अगर आप में हिम्मत है तो खेलना जारी रखने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो अपने शरीर की बात सुननी चाहिए।’’ हरभजन ने स्वीकार किया कि रविचंद्रन अश्विन का अच्छा प्रदर्शन करने वाले ऑफ-स्पिनर के रूप में उभरना भी उस समय उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘‘अश्विन पहले से ही अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। आपको यह वास्तविकता स्वीकार करनी होगी कि यह खिलाड़ी (अश्विन) अच्छा खेल रहा है। अगर मुझे अश्विन को पीछे छोड़ना होता तो मुझे बिल्कुल नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ती और उतनी ही मेहनत करनी पड़ती जितनी मैंने अपने पहले 400 विकेट के लिए की थी।

क्या मैं ऐसा कर पाता? मेरी अंतरात्मा ने इसका जवाब दिया कि मैं ऐसा नहीं कर सकता।’’ हरभजन ने 2027 में होने वाले विश्व कप के लिए भारत की वनडे टीम के बारे में बात करते हुए कहा कि अभी एक साल बाकी है, इसलिए वह फिलहाल उसके संयोजन को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब आपके पास बहुत सारे विकल्प होते हैं, तो यह भी एक समस्या हो सकती है, हालांकि विकल्प होना अच्छी बात है। अब जब वनडे विश्व कप की बात आती है, तो मेरा मानना ​​है कि टूर्नामेंट के शुरू होने से छह महीने पहले ही टीम प्रबंधन को मुख्य टीम को लेकर स्पष्ट हो जाना चाहिए और खिलाड़ियों को पता होना चाहिए कि उनकी भूमिका क्या है।

Thu, 13 Aug 2026 13:42:46 +0530

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