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खरगे की रैली के बाद हुए 'शुद्धिकरण' पर संसद में हंगामा, नड्डा ने कहा- हम ऐसी गतिविधियों में विश्वास नहीं रखते
Kharge shuddhikaran controversy: राज्यसभा में उस समय जबरदस्त हंगामा मच गया, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि भाजपा शासित उत्तराखंड में जिस स्थान पर उन्होंने एक रैली को संबोधित किया था, वहां एक 'शुद्धिकरण' समारोह आयोजित किया गया। खड़गे द्वारा यह मुद्दा उठाए जाते ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस घटना को "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया और स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।
बता दें कि यह मुद्दा पहले से ही उत्तराखंड में एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है, जहां कांग्रेस और भाजपा हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए इस अनुष्ठान को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। यह अनुष्ठान एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा आयोजित किया गया था, वह भी उस दिन के दो दिन बाद जब दलित नेता खड़गे ने इसी मैदान में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित किया था। गुरुवार को, जो संसद के मानसून सत्र का आखिरी दिन था, यह मुद्दा राज्यसभा में भी गूंजा।
संसद में क्या बोले मल्लिकार्जुन खड़गे?
कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 8 अगस्त को जिस मंच से उन्होंने रैली को संबोधित किया था, वहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने "हवन" कर उस मंच का "शुद्धिकरण" किया।
मैंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया।
— Mallikarjun Kharge (@kharge) August 13, 2026
उस जनसभा में मैंने किसी जाति या धर्म का नाम नहीं लिया, सिर्फ जनता की समस्याओं पर बात की।
लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ता है कि मेरे भाषण के बाद BJP के लोगों ने वहाँ हवन किया और उस स्टेज का शुद्धिकरण करने का काम… pic.twitter.com/m4MOm6AaoK
खड़गे ने कहा, "उस समय वहां लाखों लोग मौजूद थे। मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया। मैंने सिर्फ वहां के लोगों की समस्याओं के बारे में बात की। लेकिन मेरे भाषण के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने हवन किया।"
कांग्रेस के इतिहास में दूसरे दलित नेता के तौर पर पार्टी की कमान संभालने वाले खड़गे ने आगे कहा, "क्या लोकतंत्र में यही तरीका है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं नेता प्रतिपक्ष हूं। मैं कभी इन मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहता था।"
'भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती': नड्डा
कांग्रेस सांसदों की जोरदार नारेबाजी के बीच राज्यसभा के सभापति ने खड़गे को शांत करने की कोशिश करते हुए इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में 'छुआछूत' से बड़ा कोई पाप नहीं है।
उन्होंने कहा, "इसकी निंदा होनी चाहिए। जिन्होंने यह किया है, उन्हें पकड़ा जाना चाहिए। इस पर कोई दो राय नहीं है।"
Delhi: Rajya Sabha Leader of the House and Union Minister JP Nadda says, "What Kharge ji said is really sad, not just for the Congress party but for all of us. Because he said that BJP people... Let me clarify that the BJP does not subscribe to such activities..." pic.twitter.com/00a5rFm6mB
— IANS (@ians_india) August 13, 2026
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस घटना से भाजपा को अलग करने की कोशिश करते हुए खड़गे को आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, "कृपया बार-बार यह मत कहिए कि हमने (भाजपा ने) यह किया। भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि वहां जो कुछ भी हुआ, उसकी निश्चित तौर पर जांच होगी। पार्टी अध्यक्ष खुद इस मामले को देखेंगे। यह हम सभी के लिए बेहद खेद की बात है कि आपकी भावनाएं आहत हुईं।"
इस पर खड़गे ने स्पष्ट किया कि वे इस घटना के लिए किसी को दोष नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं कह रहा हूं कि मामला दर्ज करें, उन्हें गिरफ्तार करें। हमारी यही मांग है।"
आखिर क्या है पूरा विवाद?
यह मामला उत्तराखंड में एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। इस 'शुद्धिकरण' समारोह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक पुजारी को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन कराते हुए देखा जा सकता है।
एक अन्य वीडियो में आयोजकों में से एक व्यक्ति यह कहते नजर आता है कि इस स्थान का धार्मिक महत्व है और इसे सख्ती से केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए ही आरक्षित रखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक आयोजनों के लिए। TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनुष्ठान का बचाव करते हुए संगठन के एक सदस्य गिरीश चंद्र पांडे ने कहा कि खड़गे की रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारे "इस्लामिक नारों जैसे लग रहे थे।"
कांग्रेस और भाजपा में तीखी बयानबाजी
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि यह अनुष्ठान श्री राम सेना नामक संगठन ने करवाया, जिसे उन्होंने भाजपा से जुड़ा हुआ बताया। हालांकि भाजपा ने इस आरोप को खारिज कर दिया है।
गोदियाल ने दावा किया कि यह अनुष्ठान इसलिए कराया गया क्योंकि खड़गे दलित समुदाय से आते हैं, और उन्होंने भाजपा पर समाज में जातिगत विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने तो इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग तक कर डाली। प्रियंका ने कहा, "यह मानसिकता साफ तौर पर भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को दर्शाती है। इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए।"
इस घटना को लेकर राजद की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई, जिसने भाजपा पर ऐसे "जातिवादी कट्टरपंथियों" को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। राजद प्रवक्ता प्रियंका भारती ने ट्वीट करते हुए लिखा, "मनु की बर्बर संतान इस बात को हजम नहीं कर पा रही कि एक दलित देश के शीर्ष नेताओं में से एक है।"
हालांकि भाजपा ने इस समारोह के आयोजकों से किसी भी तरह के संबंध से साफ इनकार किया है।
वहीं दूसरी ओर, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड के मंत्री और भाजपा प्रवक्ता खजान दास ने आरोप लगाया कि खड़गे की रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों से सनातन समुदाय की "भावनाएं आहत" हुई होंगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामलीला मैदान एक धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान है, और वहां किसी अन्य धर्म से जुड़े नारे लगाए जाने से लोगों में नाराजगी पैदा हुई होगी।
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