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एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस सहित शामिल हुए 4 नए शेयर, 3 बाहर

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई (मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल) ने अपनी अगस्त 2026 की आवधिक समीक्षा के तहत अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस समेत चार कंपनियों को एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में शामिल किया है, जबकि तीन कंपनियों को इंडेक्स से बाहर कर दिया गया है। ये बदलाव 31 अगस्त 2026 के कारोबार समाप्त होने के बाद प्रभावी होंगे।

एमएससीआई के अनुसार, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के अलावा जिन अन्य कंपनियों को इंडेक्स में शामिल किया गया है, वे पूंजी बाजार (कैपिटल मार्केट) और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं। हालांकि इंडेक्स से बाहर की गई कंपनियों के नाम इस घोषणा में नहीं बताए गए।

एमएससीआई की यह समीक्षा बाजार पूंजीकरण, लिक्विडिटी और फ्री-फ्लोट जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर की जाती है। इसी आधार पर तय किया जाता है कि कौन-सी कंपनियां इंडेक्स का हिस्सा बनी रहेंगी और किन्हें इसमें शामिल या बाहर किया जाएगा।

इस समीक्षा के साथ एमएससीआई इंडिया डोमेस्टिक स्मॉल कैप इंडेक्स में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। इस इंडेक्स में 12 नए शेयर जोड़े गए हैं, जबकि 19 शेयरों को हटाया गया है। इस प्रकार कुल मिलाकर इंडेक्स में सात कंपनियों की शुद्ध कमी हुई है।

एमएससीआई इंडेक्स को दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक और पैसिव फंड बेंचमार्क के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि इंडेक्स में शामिल होने या बाहर होने वाली कंपनियों के शेयरों में अक्सर निवेशकों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इंडेक्स में बदलाव के बाद कई वैश्विक फंड अपने पोर्टफोलियो को नए भार के अनुसार पुनर्संतुलित करते हैं, जिससे संबंधित शेयरों में निवेश प्रवाह देखने को मिलता है।

एमएससीआई के मुताबिक, उसका भारत केंद्रित सूचकांक भारतीय शेयर बाजार के लगभग 85 प्रतिशत इक्विटी यूनिवर्स का प्रतिनिधित्व करता है। भारत में निवेश करने वाले कई अंतरराष्ट्रीय निवेशक और वैश्विक फंड इसी सूचकांक को प्रमुख मानक के रूप में देखते हैं।

इससे पहले जून में आई एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि एमएससीआई समीक्षा के बाद भारतीय शेयर बाजार में लगभग 30,214 करोड़ रुपए का पैसिव निवेश प्रवाह आ सकता है। उस रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई थी कि कुछ फार्मा कंपनियां एमएससीआई इंडिया स्मॉल कैप इंडेक्स से आगे बढ़कर एमएससीआई इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल हो सकती हैं।

एमएससीआई की घोषणा के बाद अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। बीएसई पर कंपनी के शेयर शुरुआती कारोबार में 2.24 प्रतिशत तक उछलकर 1,638 रुपए के इंट्रा-डे उच्च स्तर पर पहुंच गए।

स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के शेयर ने पिछले 52 सप्ताह में 1,789 रुपए का उच्चतम स्तर और 745.45 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है।

लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न देता रहा है।

पिछले 5 वर्षों में शेयर करीब 64 प्रतिशत, जबकि पिछले 3 वर्षों में लगभग 90 प्रतिशत चढ़ा है। वहीं बीते एक वर्ष में इसने निवेशकों की पूंजी लगभग दोगुनी कर दी है, और करीब 100 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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'बॉलीवुड का पाकिस्तान प्रेम कब खत्म होगा....', कंगना रनौत ने साधा नसीरुद्दीन शाह पर निशाना, फिल्म इंडस्ट्री को लेकर कही ऐसी बात

Kangana Ranaut on Naseeruddin Shah: बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने मशहूर एक्टर नसीरुद्दीन शाह के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने छात्र आंदोलनों के मुद्दे पर बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल उठाए थे. कंगना ने नसीरुद्दीन शाह की आलोचना करते हुए न सिर्फ अपने पुराने बयान का बचाव किया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी पक्ष लिया और फिल्म इंडस्ट्री के एक ग्रुप पर कई गंभीर आरोप लगाए.

'जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी होती है, वो भौंक नहीं सकता'

दरअसल, ये पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब नसीरुद्दीन शाह ने शिक्षा सुधारों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में बॉलीवुड सेलेब्रिटीज की चुप्पी पर सवाल उठाया. ‘द वायर’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि बॉलीवुड के लोग तभी किसी मुद्दे पर बोलेंगे, जब उनका जमीर उन्हें ऐसा करने के लिए कहेगा. इसी दौरान उन्होंने एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी होती है, वो भौंक नहीं सकता. नसीरुद्दीन शाह के इसी बयान पर कंगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि वो नसीरुद्दीन शाह की तरह ‘लोमड़ी’ कहलाने के बजाय ‘कुत्ता’ कहलाना पसंद करेंगी. इसके साथ ही उन्होंने शाह पर भारत में रहकर पड़ोसी देश के पक्ष में बोलने का आरोप भी लगाया था.

नसीरुद्दीन शाह के बयान से शुरू हुआ विवाद

नसीरुद्दीन शाह लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखने के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में उन्होंने छात्र आंदोलनों और उनके समर्थन में फिल्म इंडस्ट्री की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा था कि बॉलीवुड के कलाकार और बड़े सितारे किसी मुद्दे पर तभी अपनी आवाज उठाते हैं, जब उन्हें पर्सनली लगता है कि बोलना उनके लिए सुरक्षित है. इसी रिफरेन्स में उन्होंने ‘हड्डी वाले कुत्ते’ की कहावत का इस्तेमाल किया था. शाह के बयान के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस शुरू हो गई. इसी बहस में कंगना रनौत भी शामिल हो गईं और उन्होंने एक्टर पर निशाना साधा.

कंगना ने बताया क्यों कहा था ‘लोमड़ी’

अब कंगना ने अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए बताया है कि उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को लेकर इतनी तीखी टिप्पणी क्यों की थी. कंगना के मुताबिक, नसीरुद्दीन शाह ने एक वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और धमकी भरी बातें की थीं. कंगना ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान भी मिले हैं. ऐसे में उनके पद की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए. कंगना ने कहा कि वो लोकतंत्र और संविधान की गरिमा को महत्व देती हैं और उनका मानना है कि देश के संवैधानिक पदों का सम्मान किया जाना चाहिए, भले ही किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा अलग क्यों न हो. उन्होंने इसी आधार पर नसीरुद्दीन शाह की आलोचना करने को सही ठहराया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का किया बचाव

कंगना ने अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी बचाव किया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और नेताओं की आलोचना की जा सकती है, लेकिन आलोचना करते समय भाषा और संवैधानिक पद की गरिमा का ध्यान रखना जरूरी है. कंगना का कहना था कि प्रधानमंत्री देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसलिए उनके खिलाफ किसी भी तरह की टिप्पणी करते समय लोकतांत्रिक मर्यादाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए. वहीं कंगना और नसीरुद्दीन शाह के बीच ये टकराव नया नहीं है. दोनों अलग-अलग मौकों पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं. यही वजह है कि दोनों के बयान अक्सर सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन जाते हैं.

पाकिस्तान को लेकर भी कंगना ने उठाए सवाल

अपने ताजा बयान में कंगना रनौत ने बॉलीवुड के कुछ लोगों पर पाकिस्तान को लेकर कथित तौर पर नरम रुख अपनाने का आरोप भी लगाया. कंगना ने सवाल उठाया कि आखिर फिल्म इंडस्ट्री में पाकिस्तान को लेकर ये कथित ‘प्रेम कहानी’ कब खत्म होगी. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन को कई दशक बीत चुके हैं और दोनों देशों के बीच लगातार तनाव की स्थिति बनी रहती है. ऐसे में बॉलीवुड के कुछ लोगों की पाकिस्तान को लेकर सहानुभूति उन्हें समझ नहीं आती. 

कंगना ने पहलगाम आतंकी हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए भी अपनी बात रखी. उनका कहना था कि देश के नागरिक पड़ोसी देश से जुड़े मुद्दों और सुरक्षा को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री का एक ग्रुप अब भी पाकिस्तान को लेकर अलग तरह का नजरिया रखता है. हालांकि, पाकिस्तान और बॉलीवुड को लेकर कंगना के ये आरोप उनके निजी राजनीतिक विचार हैं और इन्हें पूरे फिल्म इंडस्ट्री की राय के तौर पर नहीं देखा जा सकता. 

‘फिल्म इंडस्ट्री वाले घड़ियाली आंसू बहा रहे थे’

कंगना ने इस दौरान दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शनों और झारखंड में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच भी तुलना की. उन्होंने आरोप लगाया कि जब दिल्ली में प्रदर्शन हुए थे, तब फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई लोग वहां पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखा रहे थे. लेकिन जब झारखंड में छात्रों से जुड़ा विवाद सामने आया, तो वही लोग कथित तौर पर चुप रहे. कंगना ने इसी को ‘घड़ियाली आंसू’ बताते हुए फिल्म इंडस्ट्री पर दोहरे क्राइटेरिया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने सवाल किया कि अगर बॉलीवुड के लोग छात्रों और उनके अधिकारों को लेकर इतने चिंतित हैं, तो फिर झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में क्यों नहीं पहुंचे? उनका कहना था कि अगर किसी मुद्दे पर आवाज उठानी है तो फिर हर जगह समान तरीके से आवाज उठाई जानी चाहिए. किसी एक आंदोलन का समर्थन और दूसरे आंदोलन पर चुप्पी को लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए.

‘कब खत्म होगी बॉलीवुड की पाकिस्तान से प्रेम कहानी?’

कंगना ने अपने बयान में बॉलीवुड और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जब भी भारत-पाकिस्तान से जुड़ा कोई संवेदनशील मुद्दा सामने आता है, तब फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोग पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति दिखाते नजर आते हैं. उन्होंने सवाल किया कि आखिर विभाजन के इतने साल बाद भी ये रवैया क्यों बना हुआ है.

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